UPPCL: बैलेंस नेगेटिव होने पर भी चल रहे 80 % स्मार्ट प्रीपेड मीटर, 1066 करोड़ रुपये बकाया से पावर कॉरपोरेशन परेशान

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Published By Anjali Singh
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लखनऊ, अमृत विचार: प्रदेश में स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाए जाने के बाद कई चौकानें वाले तथ्य सामने आए है। पावर कॉरपोरेशन के आंकड़ों के अनुसार, करीब 80 प्रतिशत प्रीपेड मीटर उपभोक्ताओं का बैलेंस नेगेटिव हो चुका है, जिससे बिजली कंपनियों पर 1066 करोड़ रुपये का बकाया खड़ा हो गया है। राज्य में अब तक लगभग 54.51 लाख उपभोक्ताओं के यहां स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं, जिनमें से 44.02 लाख उपभोक्ताओं के मीटर नेगेटिव बैलेंस में चल रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि इनमें ज्यादातर उपभोक्ता शहरी क्षेत्रों के हैं। ये पहले पोस्टपेड व्यवस्था में हर महीने नियमित रूप से बिजली बिल जमा करते थे। 

कारपोरेशन पुराने पोस्टपेड मीटरों को चरणबद्ध तरीके से स्मार्ट मीटरों से बदल रहा है। शुरुआती अवधि में ये मीटर पोस्टपेड मोड में चलते हैं, लेकिन बाद में इन्हें प्रीपेड मोड में परिवर्तित कर दिया जाता है। प्रीपेड होने के बाद बड़ी संख्या में उपभोक्ता मीटर रीचार्ज नहीं करा रहे हैं, जिससे उनका बैलेंस लगातार नेगेटिव होता जा रहा है। 

इस पूरे मामले पर चिंता जताते हुए कॉरपोरेशन ने सभी बिजली वितरण कंपनियों के एमडी को पत्र लिखकर विशेष अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं। आदेश में कहा गया है कि नेगेटिव बैलेंस वाले उपभोक्ताओं को विश्वास में लिया जाए, और उन्हें स्मार्ट मीटर और प्रीपेड प्रणाली के बारे में जागरूक किया जाए। 

साथ ही, स्मार्ट ऐप इंस्टॉल कराने, पॉजिटिव बैलेंस बनाए रखने के लिए प्रेरित करने और ओटीपी के जरिए मोबाइल नंबर सत्यापित कराने के निर्देश भी दिए गए हैं। वहीं, राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने मीटर रीचार्ज न कराने के पीछे एक और अहम वजह बताई है। उनका कहना है कि स्मार्ट मीटर लगते ही गलत बिल आने की शिकायतें बढ़ी हैं। कई मामलों में समय पर बिलों की गड़बड़ी दुरुस्त नहीं की जा रही है। ऐसे में उपभोक्ता बिल ठीक होने की उम्मीद में, मीटर के प्रीपेड होने के बावजूद रीचार्ज नहीं करवा रहे हैं।

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