बजट 2026-27 : यूपी की हरित ऊर्जा को नई उड़ान, किसानों को क्या मिला, क्या की गईं हैं अहम घोषणाएं

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Published By Anjali Singh
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लखनऊ, अमृत विचार: वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट भाषण में स्पष्ट किया कि योगी सरकार उत्तर प्रदेश को हरित और स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में अग्रणी बनाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है। अतिरिक्त ऊर्जा स्रोतों के विकास के लिए लगभग 2,104 करोड़ रुपये की व्यवस्था प्रस्तावित की गई है, जो पिछले वित्तीय वर्ष 2025-26 की तुलना में दो गुने से अधिक है। यह प्रावधान राज्य की ऊर्जा सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास की प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है।

राज्य सरकार द्वारा लागू उत्तर प्रदेश सौर ऊर्जा नीति-2022, उत्तर प्रदेश राज्य जैव ऊर्जा नीति-2022 और उत्तर प्रदेश ग्रीन हाइड्रोजन नीति-2024 के तहत आगामी पांच वर्षों में 22,000 मेगावॉट विद्युत उत्पादन का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। यह लक्ष्य प्रदेश को पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों पर निर्भरता कम कर आत्मनिर्भर ऊर्जा राज्य बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। प्रदेश में अब तक 2,815 मेगावॉट की सौर ऊर्जा परियोजनाएं स्थापित की जा चुकी हैं। यह उपलब्धि दर्शाती है कि नीति निर्माण के साथ-साथ क्रियान्वयन स्तर पर भी सरकार सक्रिय है।

पीएम कुसुम और सूर्यघर योजना को 1,500 करोड़

पीएम कुसुम सूर्यघर योजना को प्रदेश में सघन रूप से लागू किया जा रहा है। बजट में इसके लिए 1,500 करोड़ रुपये की व्यवस्था प्रस्तावित है। इससे किसानों और घरेलू उपभोक्ताओं को सौर ऊर्जा के माध्यम से आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में गति मिलेगी।

17 नगर निगम सोलर सिटी की ओर

अयोध्या और मथुरा सहित 17 नगर निगमों को सोलर सिटी के रूप में विकसित किया जा रहा है। शहरी क्षेत्रों में सौर ऊर्जा आधारित ढांचे को मजबूत करने का यह प्रयास स्वच्छ ऊर्जा की व्यापक पहुंच सुनिश्चित करेगा। ग्रामीण क्षेत्रों में अब तक 5.20 लाख सोलर स्ट्रीट लाइट संयंत्र स्थापित किए जा चुके हैं, जिससे ऊर्जा बचत के साथ-साथ सुरक्षा और सुविधाओं में भी सुधार हुआ है।

जैव ऊर्जा में देश में अग्रणी

उत्तर प्रदेश राज्य जैव ऊर्जा नीति-2022 के अंतर्गत प्रदेश में 36 सीबीजी (कंप्रेस्ड बायोगैस) संयंत्र स्थापित किए जा चुके हैं, जो देश में सर्वाधिक हैं। इससे अपशिष्ट प्रबंधन और स्वच्छ ईंधन उत्पादन दोनों को बढ़ावा मिला है।

ग्रीन हाइड्रोजन में नई पहल

ग्रीन हाइड्रोजन के क्षेत्र में भी उत्तर प्रदेश ने अग्रणी कदम उठाया है। ग्रीन हाइड्रोजन नीति-2024 के तहत प्रदेश में दो सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की स्थापना को स्वीकृति प्रदान की गई है। यह पहल भविष्य की स्वच्छ ऊर्जा तकनीकों के अनुसंधान और औद्योगिक उपयोग को बढ़ावा देगी।

प्राथमिकता में किसान, कृषि योजनाओं के लिए 10,888 करोड़ रुपये

वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने वित्तीय वर्ष 2026-27 का बजट पेश करते हुए कहा कि कृषि, मत्स्य, उद्यान, दुग्ध विकास, खाद्य-रसद पर खास फोकस है। बजट में कृषि योजनाओं के लिए 10,888 करोड़ रुपय का प्रावधान किया गया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में करीब 20% अधिक है। सरकार ने 2026-27 में 753.55 लाख मीट्रिक टन खाद्यान्न और 48.18 लाख मीट्रिक टन तिलहन उत्पादन का लक्ष्य रखा है। कृषकों के डीजल पंप सेट को सोलर पम्प में परिवर्तित करने के लिए 637.84 करोड़ रुपये खर्च करने का एलान किया गया।

एग्री-एक्सपोर्ट और यूपी एग्रीज

यूपी एग्रीज परियोजना के तहत एग्री-एक्सपोर्ट हब की स्थापना के लिए ₹245 करोड़ तथा किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) के लिए ₹75 करोड़ का रिवॉल्विंग फंड प्रस्तावित है। एक्वा कल्चर अवसंरचना के अंतर्गत विश्वस्तरीय हैचरी व प्रशिक्षण केंद्र के लिए ₹155 करोड़ की बाह्य सहायता परियोजना भी शामिल है।

डीजल पंप से सोलर की ओर

किसानों के डीजल पंप सेट को सोलर पंप में बदलने के लिए ₹637.84 करोड़ का प्रावधान किया गया है। नेशनल मिशन ऑन नेचुरल फार्मिंग योजना के लिए ₹298 करोड़ रखे गए हैं। निजी नलकूपों को निर्बाध बिजली आपूर्ति हेतु ₹2,400 करोड़ प्रस्तावित हैं।

प्रमुख प्रावधान

• निजी नलकूपों के लिए निर्बाध बिजली: ₹2,400 करोड़
• उद्यान व खाद्य प्रसंस्करण: ₹2,832 करोड़
• छुट्टा गोवंश रखरखाव: ₹2,000 करोड़
• मत्स्य थोक बाजार/एक्वा पार्क/प्रसंस्करण: ₹100 करोड़
• खाद्य एवं रसद योजनाएं: ₹20,124 करोड़
• मथुरा में 1 लाख लीटर प्रतिदिन क्षमता का नया डेयरी प्लांट

उद्यान व खाद्य प्रसंस्करण

उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण के लिए ₹2,832 करोड़ का प्रावधान है। राष्ट्रीय औद्यानिक मिशन के लिए ₹715 करोड़, प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना हेतु ₹478 करोड़ और खाद्य प्रसंस्करण उद्योग नीति-2022 के क्रियान्वयन के लिए ₹300 करोड़ रखे गए हैं।

दुग्ध विकास को बढ़ावा

मथुरा में 30 हजार लीटर क्षमता की प्रस्तावित परियोजना को संशोधित कर 1 लाख लीटर प्रतिदिन क्षमता का नया डेयरी प्लांट स्थापित किया जाएगा। इसके लिए ₹23 करोड़ का प्रावधान है। 220 नई दुग्ध समितियों के गठन और 450 के पुनर्गठन के लिए ₹107 करोड़ की व्यवस्था की गई है।

पशुधन संरक्षण

प्रदेश के 7,497 गो-आश्रय स्थलों में 12.38 लाख गोवंश संरक्षित हैं। छुट्टा गोवंश के रखरखाव के लिए ₹2,000 करोड़ तथा वृहद गो-संरक्षण केंद्रों के लिए ₹100 करोड़ प्रस्तावित हैं। पशु रोग नियंत्रण हेतु ₹253 करोड़ और पशु चिकित्सालय सुदृढ़ीकरण के लिए ₹155 करोड़ रखे गए हैं।

मत्स्य क्षेत्र में विस्तार

प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत ₹195 करोड़ (पुरुष घटक) और ₹115 करोड़ (महिला घटक) का प्रावधान है। एकीकृत एक्वा पार्क हेतु ₹190 करोड़ तथा अत्याधुनिक मत्स्य थोक बाजार व प्रसंस्करण केंद्र के लिए ₹100 करोड़ प्रस्तावित हैं।

खाद्य एवं रसद

खाद्य एवं रसद विभाग की योजनाओं के लिए ₹20,124 करोड़ का प्रावधान है। अन्नपूर्ति योजना हेतु ₹15,480 करोड़, निःशुल्क एलपीजी रिफिलिंग योजना के लिए ₹1,500 करोड़ और अन्नपूर्णा भवन निर्माण के लिए ₹500 करोड़ रखे गए हैं।

51.82 लाख परिवार को मिला 100 दिन काम

निवर्तमान योजना महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) ने गांवों में जरूरतमंद श्रमिकों को रोजगार देने के साथ उनका शहर की तरफ पलायन रोका है। प्रतिवर्ष महिलाओं की भागीदारी भी बढ़ी है। लखनऊ की बात करें तो मनरेगा का दायरा छोटा है। फिर भी इस वर्ष 11 फरवरी तक 16 हजार परिवारों ने काम करके 6.15 लाख मानव दिवस सृजित किए हैं। 370 परिवार ने गारंटी के 100 दिन काम किए हैं।

वित्तीय वर्ष में 41.36 फीसद महिला श्रमिकों की रही भागीदारी

वहीं, प्रदेश के आंकड़ों पर गौर करें तो वित्तीय वर्ष 2025-26 में 11 फरवरी तक प्रदेश में 21 करोड़ 92 लाख 17 हजार मानव दिवस सृजित हुए हैं। इनमें 51.82 लाख परिवार ने काम किया है। 1,60,152 परिवार को लगातार 100 दिन तक काम मिला है। इसमें महिलाओं की 41.31 फीसद भागीदारी है। अभी फरवरी और मार्च तक रोजगार का आंकड़ा और बढ़ेगा। 

प्रदेश में 11 फरवरी तक 21.92 लाख मानव दिवस हुए सृजित

पिछले वर्ष 2024-25 में मार्च तक 33 करोड़ 63 लाख 89 हजार मानव दिवस सृजित हुए थे, जबकि 65.26 लाख परिवारों ने काम किया था। उस समय महिलाओं की 41.87 फीसद भागीदारी रही है। जबकि 100 दिन गांरटी के 65.26 लाख परिवार ने काम किया था। अब वित्तीय वर्ष 2026-27 में योजना विकसित भारत - जी राम जी ने नाम से संचालित होकर श्रमिकों को और सशक्त बनाएगी। इसमें पहले से अधिक बजट और 125 दिन काम के साथ कई प्राविधान किए गए हैं।

प्रदेश में इस तरह बढ़ा महिला श्रमिकों का फीसद

- 2021-22 - 30.96
- 2022-23 - 31.75
- 2023-24 - 42.46

गांव में काम मांगने पर मिला है। भुगतान भी समय से खाते में आता है। इससे पारदर्शिता बढ़ी है और भरोसा भी बढ़ा है। जी राम जी में अधिक फायदा है।- सुरेश चंद्र, श्रमिक, टिकारी बीकेटी

मनरेगा में काम मिलने पर गांव के बाहर नहीं गए। इसके साथ खेतीबाड़ी भी करते हैं। सही से भरण-पोषण हो जाता है। आगे और अधिक फायदे मिलेंगे।- प्रेमलाल, श्रमिक, रामपुर देवरई बीकेटी

शिक्षा से सशक्त उत्तर प्रदेश का संकल्प

वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट में योगी सरकार ने शिक्षा को विकास की केंद्रीय धुरी बनाते हुए व्यापक प्रावधान किए हैं। बेसिक से लेकर उच्च, प्राविधिक और कौशल विकास तक हर स्तर पर उल्लेखनीय बढ़ोतरी कर प्रदेश को ज्ञान-आधारित अर्थव्यवस्था की दिशा में आगे बढ़ाने का रोडमैप प्रस्तुत किया गया है। शिक्षा, कौशल और तकनीकी प्रशिक्षण पर अभूतपूर्व निवेश कर सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि नया उत्तर प्रदेश ज्ञान, नवाचार और रोजगारोन्मुख प्रशिक्षण के मजबूत आधार पर ही निर्मित होगा।

बेसिक शिक्षा: मजबूत नींव

बेसिक शिक्षा के लिए ₹77,622 करोड़ का प्रावधान किया गया है।

श्रमिकों पर बड़ा फोकस, रोजगार मिशन के लिए 200 करोड़ 

वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट में योगी सरकार ने श्रमिकों और असंगठित कामगारों के कल्याण को विशेष प्राथमिकता दी है। वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने सदन में बताया कि उत्तर प्रदेश रोजगार मिशन समिति के गठन और संस्थागत सुदृढ़ीकरण के लिए ₹200 करोड़ का प्रावधान किया गया है। इसका उद्देश्य प्रदेश के श्रमिकों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना है।

• कक्षा 1–8 के विद्यार्थियों को निःशुल्क यूनिफॉर्म, बैग, जूते, मोजे व स्टेशनरी हेतु ₹650 करोड़।
• 75 जनपदों में 2-2 मुख्यमंत्री मॉडल कंपोजिट विद्यालय।
• आवासीय बालिका विद्यालय विस्तार के लिए ₹580 करोड़।
• शिक्षकों/कर्मचारियों के लिए कैशलेस चिकित्सा सुविधा: ₹358 करोड़।
• स्मार्ट स्कूल योजना: ₹300 करोड़।
• सहायता प्राप्त विद्यालयों के अनुरक्षण हेतु ₹300 करोड़।

माध्यमिक शिक्षा: गुणवत्ता और प्रतिस्पर्धा

माध्यमिक शिक्षा के लिए ₹22,167 करोड़ (15% वृद्धि)।

• राजकीय विद्यालयों के सुदृढ़ीकरण हेतु ₹520 करोड़।
• सहायता प्राप्त विद्यालयों के लिए ₹10 करोड़।
• संस्कृत पाठशालाओं की छात्रवृत्ति: ₹20 करोड़।
• ड्रीम स्किल लैब क्लस्टर: ₹150 करोड़।
• शिक्षकों के लिए कैशलेस चिकित्सा: ₹89.25 करोड़।
• छात्राओं हेतु निःशुल्क सेनेटरी नैपकिन: ₹300 करोड़।
• गोरखपुर में दूसरे सैनिक स्कूल का संचालन आरंभ।

उच्च शिक्षा: नए विश्वविद्यालय, नई उड़ान ₹6,591 करोड़ (7% वृद्धि)।

• रानी लक्ष्मीबाई स्कूटी योजना: ₹400 करोड़।
• मुख्यमंत्री शिक्षुता प्रोत्साहन: ₹40 करोड़।
• नए विश्वविद्यालयों हेतु आवंटन:
•  मां विंध्यवासिनी विश्वविद्यालय, मिर्जापुर– ₹50 करोड़
•  गुरु जम्भेश्वर विश्वविद्यालय, मुरादाबाद– ₹50 करोड़
• मां पटेश्वरी विश्वविद्यालय बलरामपुर– ₹50 करोड़
•  स्वामी शुकदेवानन्द विश्वविद्यालय शाहजहांपुर– ₹21 करोड़
•  काशी नरेश विश्वविद्यालय भदोही – ₹21 करोड़
• मानसिक स्वास्थ्य एवं कल्याण: ₹14.5 करोड़।
• एआई प्रमाणन शुल्क प्रतिपूर्ति: ₹10 करोड़।
• मुख्यमंत्री विद्यालक्ष्मी योजना: ₹30 करोड़।

प्राविधिक शिक्षा: उद्योगों के अनुरूप कौशल

प्राविधिक शिक्षा बजट में 72% वृद्धि, कुल ₹2,365 करोड़।

• 195 डिप्लोमा संस्थान संचालित; 23 नए पॉलिटेक्निक निर्माणाधीन।
• उत्कृष्टता केंद्र व उन्नयन: ₹714 करोड़।
• स्मार्ट कक्षाएं (251 स्थापित, 143 प्रक्रियाधीन)।
• अवसंरचना विकास: ₹254 करोड़।
• नए पॉलिटेक्निक: ₹50 करोड़।

व्यावसायिक शिक्षा व कौशल विकास: आत्मनिर्भर युवा

व्यावसायिक शिक्षा बजट में 88% वृद्धि, कुल ₹3,349 करोड़।

• 286 राजकीय आईटीआई; 1.90 लाख सीटें।
• 2,963 निजी आईटीआई; 4.58 लाख सीटें।
• 47 आईटीआई में महिला शाखाएं; 12 महिला आईटीआई स्वतंत्र।
• टाटा टेक्नोलॉजीज के सहयोग से 149 आईटीआई उन्नत; 62 और प्रगति पर।
• कौशल विकास मिशन प्रशिक्षण व्यय: ₹1,000 करोड़।
• दस्तकार प्रशिक्षण योजना: ₹836 करोड़।
• प्रोजेक्ट प्रवीण: ₹500 करोड़।
• मुख्यमंत्री शिक्षुता प्रशिक्षण: ₹20 करोड़।

8.41 करोड़ कामगारों को फैमिली आईडी, लेबर अड्डों का निर्माण

बजट 2026-27 में रोजगार सृजन, सामाजिक सुरक्षा, शिक्षा और स्वास्थ्य के माध्यम से श्रमिक परिवारों को सशक्त बनाने का स्पष्ट रोडमैप दिखाई देता है, जो प्रदेश में श्रम आधारित विकास मॉडल को मजबूती देने की दिशा में निर्णायक कदम है। सरकार ने घर से दूर शहरों में कार्यरत मजदूरों के लिए लेबर अड्डों के निर्माण की घोषणा की है, ताकि उन्हें सुरक्षित, संगठित और सुविधायुक्त कार्यस्थल मिल सके। इसे प्रवासी श्रमिकों के श्रम प्रबंधन और सुविधा विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

शिक्षा और स्वास्थ्य से सशक्तिकरण

श्रमिक परिवारों के सामाजिक उत्थान के लिए अटल आवासीय विद्यालयों में कक्षा 6 से 12 तक निःशुल्क गुणवत्तापूर्ण शिक्षा दी जा रही है। वर्तमान में इन विद्यालयों में 10,876 श्रमिक बच्चों का नामांकन है। इस योजना के लिए ₹70 करोड़ की व्यवस्था की गई है। निर्माण श्रमिकों के स्वास्थ्य परीक्षण और स्वास्थ्य शिक्षा के लिए पहली बार मोबाइल हेल्थ वैन पायलट परियोजना के रूप में संचालित की गई है। एक्स-ग्रेशिया अनुदान के तहत पंजीकृत असंगठित श्रमिकों की दुर्घटना में मृत्यु या पूर्ण दिव्यांगता की स्थिति में ₹2 लाख तथा आंशिक दिव्यांगता पर ₹1 लाख की सहायता का प्रावधान जारी रखा गया है।

8.41 करोड़ कामगारों को फैमिली आईडी

वित्त मंत्री ने बताया कि ई-श्रम पोर्टल पर पंजीकृत 8.41 करोड़ कामगारों को फैमिली आईडी से जोड़ा गया है। इसका उद्देश्य सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लक्षित क्रियान्वयन और पारदर्शिता सुनिश्चित करना है। डिजिटल पहचान के माध्यम से श्रमिकों को सरकारी योजनाओं का सीधा लाभ दिलाने की दिशा में यह पहल महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

बजट में नदियों की स्वच्छता पर जोर

प्रदेश सरकार ने बजट में नदियों की स्वच्छता पर जोर दिया है। नदियों को प्रदूषणमुक्त करने के लिए बजट में प्रावधान किया गया है। इसके लिए जल जीवन मिशन के तहत गोमती नदी में गिर रहे नालों के गंदे पानी को रोकने के लिए सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट बनाये जाने के प्रस्तावों के लिए बजट में व्यवस्था की गई है। इसके अलावा सीवरेज व्यवस्था में सुधार किया जाएगा साथ ही जर्जर हो चुकीं पुरानी वाटर लाइनें बदलकर नई डाली जाएंगी।

गोमती में गिर रहे नालों के गंदे पानी को रोकने के लिए बनेंगे एसटीपी

राजधानी में वर्तमान में केवल तीन एसटीपी संचालित हैं। इनमें हैदर कैनाल, भरवारा और दौलतगंज एसटीपी शामिल हैं। गोमती में गिरने वाले नालों का गंदा पानी रोकने के लिए करीब पांच एसटीपी की और आवश्यकता है। जल निगम इसके लिए प्रस्ताव तैयार करके शासन को भेज चुका है। 

एसटीपी के लिए नगर विकास विभाग को मिला बजट

जल निगम ग्रामीण की ओर से नमामि गंगे प्रोजेक्ट के तहत बसंतकुंज और बिजनौर में दो एसटीपी बन रहे हैं। कुकरैल नदी के पास और आशियाना सहित 4 नए एसटीपी प्रस्तावित हैं। बजट मिलने से जल्द ही इन एसटीपी का निर्माण शुरू हो सकेगा।

इंफ्रास्ट्रक्चर से विकास को मिलेगी रफ्तार, योजनाओं को लगेंगे पंख

प्रदेश में शहरों के विकास के लिए सरकार ने 800 करोड़ रुपये बजट अवसंरचना (इंफ्रास्ट्रक्चर) के लिए प्रस्तावित किया है। इससे लखनऊ विकास प्राधिकरण वर्ष 2026-27 में बुनियादी ढांचे को मजबूत करेगा। एक तरफ यातायात सुगम होगा और दूसरी तरह राजधानी को बेहतर कनेक्टविटी मिलेगी।

वित्तीय वर्ष 2026-27 में एलडीए बनाएगा योजना

इस धनराशि से एलडीए मास्टर प्लान रोड, फ्लाईओवर, ओवरब्रिज, ग्रीन कॉरिडोर, पार्क व संचार जैसी कार्य कराएगा। इससे शहर का विकास होगा और लाेगों के लिए सुविधाएं बेहतर होंगी। इन कार्यों से आवासीय व व्यावसायिक योजनाओं तेजी से विकसित होंगी। जहां अभी परेशानी या पहुंच नहीं हैं वह आसान हो जाएगा। 

सरकार ने प्राधिकरण के लिए बजट किया प्रस्तावित

सरकार से मिलने वाले बजट से कार्यों को बल मिलेगी और कमी पूरी होगी। नये वित्तीय वर्ष में एलडीए कई नई टाउनशिप भी लाएगा। इसके अलावा बहुमंजिला अपार्टमेंट बनाने का भी खाका तैयार किया है। योजनाओं की बुकिंग भी शुरू हो गई है। गरीब व मध्यम वर्ग के लिए कई आवासीय व भूखंड की योजनाएं धरातल पर उतर चुकी हैं। अवसंरचना के इन योजनाओं को पंख लगेंगे।

यूपी के बजट का आकार और तुलना

कुल बजट आकार: 9 लाख 12 हजार 696 करोड़ 35 लाख रुपये
कुल प्राप्तियां: 8.48 लाख करोड़
राजस्व प्राप्तियां: 7.29 लाख करोड़
कुल व्यय: 9.13 लाख करोड़
राजस्व व्यय: 6.64 लाख करोड़
पूंजीगत व्यय: 2.48 लाख करोड़

इस बार नई योजनाओं की भरमा

सरदार वल्लभभाई पटेल एम्प्लॉयमेंट एंड इंडस्ट्रियल जोन
बायोप्लास्टिक औद्योगिक नीति-2024
वेयरहाउसिंग एवं लॉजिस्टिक्स नीति
मुख्यमंत्री कृषक समृद्धि योजना
महिला उद्यमी क्रेडिट कार्ड योजना
पशुधन बीमा एवं जोखिम प्रबंधन योजना
सहकारी चीनी मिलों का आधुनिकीकरण
ड्रीम स्किल लैब
नए कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय
छात्राओं हेतु प्रत्येक जनपद में छात्रावास
टेक युवा-समर्थ युवा योजना
चार सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल (पीपीपी मोड)
ट्रॉमा सेंटर लेवल-2
चिकित्सा महाविद्यालयों में छात्रावास
उत्तर प्रदेश एआई मिशन
स्टेट डेटा सेंटर
डेटा सेंटर क्लस्टर
यू-हब की स्थापना
‘ग्रीन’ और ‘पिंक’ बजट पर फोकस
विभागीय आवंटन में प्राथमिकताएं
सबसे अधिक आवंटन प्राथमिक शिक्षा (₹80,997 करोड़), ऊर्जा (₹65,926 करोड़), गृह (₹44,145 करोड़) और लोक निर्माण विभाग (₹33,740 करोड़) को मिला है।
बुनियादी ढांचा और निवेश
7 संचालित एयरपोर्ट, जेवर एयरपोर्ट शीघ्र शुरू
16,000 स्टार्टअप, 8 यूनिकॉर्न
15 लाख करोड़ रुपये से अधिक निवेश प्रस्ताव
पर्यटन और धार्मिक अर्थव्यवस्था
महाकुंभ 2025 में 66 करोड़ से अधिक श्रद्धालु
234 गांव पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित
लखनऊ ‘क्रिएटिव सिटी ऑफ गैस्ट्रोनॉमी’

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