यूपी बजट सत्र के चौथे दिन विपक्ष ने सरकार को घेरा, विधानसभा में उठा ट्रांसजेंडर समुदाय का मुद्दा, मंत्रियों ने दिए ये जवाब

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Published By Anjali Singh
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लखनऊ। उत्तर प्रदेश राज्य विधानसभा में गुरुवार को समाजवादी पार्टी (सपा) के विधायक सचिन यादव द्वारा ट्रांसजेंडर पर उठाए गए प्रश्न के जवाब में समाज कल्याण मंत्री असीम अरुण ने कहा कि यह सदन का एक महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक क्षण है, जब सबसे पिछड़े और हाशिए पर रहने वाले समुदाय की समस्याओं पर गंभीर चर्चा हो रही है। मंत्री ने कहा कि यह एक अच्छा और सार्थक सवाल है। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रदेश सरकार ट्रांसजेंडर समुदाय के कल्याण के लिए लगातार कार्य कर रही है। 

उच्चतम न्यायालय के वर्ष 2014 के ऐतिहासिक नालसा फैसले के बाद से ही उत्तर प्रदेश में इस दिशा में ठोस पहल शुरू की गई थी। असीम अरुण ने बताया कि राज्य सरकार ने किन्नर कल्याण बोर्ड का गठन किया है, जिसके लिए बजट की भी व्यवस्था की गई है। इसके माध्यम से समुदाय के सामाजिक, आर्थिक और शैक्षिक सशक्तिकरण की दिशा में कार्य किए जा रहे हैं। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि प्रदेश के प्रत्येक थाने में ट्रांसजेंडर व्यक्तियों की समस्याओं के समाधान हेतु अलग हेल्प डेस्क बनाई गई है, ताकि उन्हें सम्मानजनक और संवेदनशील वातावरण में सहायता मिल सके। 

मंत्री ने कहा कि सरकार का उद्देश्य ट्रांसजेंडर समुदाय को मुख्यधारा से जोड़ना और उन्हें समान अवसर उपलब्ध कराना है। मंत्री ने कहा कि सरकार आरोपों से सहमत नहीं है कि कुछ नहीं किया जा रहा।काम धीरे-धीरे लेकिन लगातार हो रहा है। ट्रांसजेंडर समुदाय को शिक्षा, रोजगार और स्वास्थ्य सेवाओं में शामिल करने के प्रयास जारी हैं । 

गौरतलब है कि समाजवादी पार्टी के विधायक इंजीनियर सचिन यादव ने विधानसभा में ट्रांसजेंडर समुदाय के मुद्दे को उठाते हुए सरकार से सवाल किया था कि इस समुदाय को मुख्यधारा में लाने के लिए अब तक क्या ठोस कदम उठाए गए हैं। सचिन यादव ने कहा कि ट्रांसजेंडर समुदाय में लगभग 92 प्रतिशत बेरोजगारी है। उन्होंने आरोप लगाया कि स्कूलों में उनके बच्चों के साथ भेदभाव होता है और उनकी समस्याओं की कहीं सुनवाई नहीं हो रही। 

उनके अनुसार सरकार केवल कागजी दावे कर रही है, जबकि जमीनी स्तर पर स्थिति बेहद चिंताजनक है। उन्होंने यह भी कहा कि पूरे उत्तर प्रदेश में अब तक केवल लगभग 1000 ट्रांसजेंडरों को ही पहचान पत्र जारी किए गए हैं, जबकि समुदाय की वास्तविक संख्या इससे कहीं अधिक है। ऐसे में पहचान, रोजगार, शिक्षा और सामाजिक सुरक्षा के क्षेत्र में गंभीर पहल की आवश्यकता है। सपा विधायक ने सरकार से मांग की कि ट्रांसजेंडर के लिए ठोस नीति, रोजगार के अवसर, शिक्षा में समानता और सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएं। 

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