उत्तराषाढ़ा और श्रवण नक्षत्र के संयोग में मनेगा महाशिवरात्रि का महापर्व, मंदिरों में तैयारियां शुरू

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Published By Deepak Mishra
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कानपुर, अमृत विचार। महाशिवरात्रि का पर्व इस बार उत्तराषाढ़ा और श्रवण नक्षत्र के विशेष संयोग में मनाया जाएगा। ज्योतिषाचार्य इसे विशेष युग्म संयोग मान रहे हैं। शिवरात्रि पर शाम 7:48 तक उत्तराषाढ़ा नक्षत्र और उसके बाद श्रवण नक्षत्र के साथ सर्वार्थ सिद्धि व अन्य शुभ योग (व्यतीपात, वरियान) रहेंगे। जो पूजा-साधना के लिए उत्तम माने गए हैं। उधर शहर में महाशिवरात्रि क लिए मंदिरों में तैयारियां शुंरू हो गई हैं। 

पर्व पर ज्योतिषाचार्य पं. मनोज कुमार द्विवेदी ने बताया कि फाल्गुन मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि की शुरुआत 15 फरवरी को शाम में 5 बजकर 4 मिनट पर होगा। वहीं अगले दिन यानी 16 फरवरी को शाम में 5 बजकर 34 मिनट पर तिथि समाप्त होगी। शास्त्रों के नियम के अनुसार महाशिवरात्रि का पर्व जब मनाया जाता है जब चतुर्दशी तिथि निशीथ काल का समय भी लग रही हो। ऐसे में 15 फरवरी को चतुर्दशी तिथि निशीथ काल के समय होने के कारण 15 फरवरी रविवार को ही महाशिवरात्रि का पर्व मनाया जाएगा।

इस बार बना दुर्लभ संयोग 

महाशिवरात्रि पर सर्वार्थ सिद्धि योग पूरे दिन रहेगा। 15 फरवरी को सुबह 7 बजे से शाम 7 बजकर 48 मिनट तक सर्वार्थ सिद्धि योग रहेगा। यह योग जीवन के सभी कार्यों में सफलता और उन्नति का संकेत देता है। इसके साथ ही व्यतीपात और वरियान योग भी बन रहे हैं। व्यतीपात योग पूरे दिन विद्यमान रहेगा, जो आध्यात्मिक साधना और मंत्र जाप के लिए अत्यंत प्रभावशाली माना जाता है। 

शिव पूजा का विशेष महत्व 

उत्तराषाढा और श्रवण नक्षत्र का संयोग शिव-शक्ति मिलन का प्रतीक है, जिससे सूर्य की ऊर्जा (तेज, सफलता) और चंद्रमा का फल (मानसिक शांति, शीतलता) दोनों प्राप्त होंगे और किए गए कार्यों में सिद्धि मिलेगी।  इस योग में पूजा करने से जीवन में सुख, शांति, स्वास्थ्य और सफलता प्राप्त होगी। श्रवण नक्षत्र की शुरुआत 15 फरवरी को शाम 7 बजकर 48 मिनट पर होगा और 16 फरवरी की सुबह 8 बजकर 47 मिनट तक रहेगा।

श्रवण नक्षत्र को ज्ञान, साधना और आध्यात्मिक उन्नति का प्रतीक माना जाता है। निशिता काल महाशिवरात्रि पूजा का सर्वाधिक महत्वपूर्ण समय माना जाता है, निशिता काल मुहूर्त रात 11 बजकर 57 मिनट से 12 बजकर 48 मिनट तक रहेगा। इसके अतिरिक्त दोपहर 12 बजे मिनट से 12 बजकर 45 मिनट तक अभिजीत मुहूर्त और दोपहर 12 बजकर 59 मिनट से 2 बजकर 41 मिनट तक अमृतकाल रहेगा, जो पूजा और शुभ कार्यों के लिए अत्यंत फलदायी माना जाता है।

चार प्रहर का पूजा मुहूर्त

पहला प्रहर 15 फरवरी की शाम 6 बजकर 1 मिनट से रात 9 बजकर 12 मिनट तक होगा। इसी तरह दूसरा प्रहर 15 फरवरी की रात 9 बजकर 12 मिनट से 16 फरवरी की रात 12 बजकर 22 मिनट तक होगा। उधर तीसरा प्रहर 16 फरवरी की रात 12 बजकर 22 मिनट से सुबह 3 बजकर 33 मिनट तक होगा। चौथा प्रहर 16 फरवरी को सुबह 3 बजकर 33 मिनट से 6 बजकर 44 मिनट तक रहेगा।

चार प्रहर की पूजा का महत्व

शास्त्रों में महाशिवरात्रि की रात के चारों प्रहर में शिव पूजा का विशेष महत्व बताया गया है। प्रत्येक प्रहर की पूजा का अलग आध्यात्मिक फल होता है। चारों प्रहर की पूजा करने से धन, यश, स्थिरता, और संतान से जुड़ी बाधाओं से मुक्ति मिलने की मान्यता है।

मंदिरों में तैयारियां शुरू

महाशिवरात्रि पर महादेव के मंदिरों में भक्तों की भारी भीड़ के चलते तैयारियां शुरू हो गई हैं। इनमें खासतौर पर सुरक्षा तैयारियों पर विशेष जोर दिया जा रहा है। परमट स्थित आनंदेश्वर मंदिर, जागेश्वर महादेव मंदिर, वनखंडेश्वर मंदिर, नागेश्वर मंदिर सहित अन्य मंदिरों में सजावट कार्य भी शुरू हो गया है। उधर स्वरूप नगर घंटाघर स्थित शिव मंदिर में होने वाली साधना सरगम नाईट के लिए भी तैयारियां अंतिम दौर में हैं। मंदिर में इस बार फूलों का विशेष शृंगार भक्तों के आकर्षण का केंद्र होगा। 

महाशिवरात्रि पर राशिनुसार शिवलिंग का अभिषेक और पूजा करके अपने मनोरथ पूर्ण करें..

मेष:  गाय के कच्चे दूध में शहद मिलाकर अभिषेक करें।
वृष: दही से अभिषेक। सफेद पुष्प, फल और वस्त्र चढ़ाएं।
मिथुन: गन्ने के रस से अभिषेक करें। धतूरा, पुष्प, भांग व हरा फल चढ़ाएं।
कर्क: दूध में शक्कर मिलाकर अभिषेक करें। सफेद वस्त्र, मिष्ठान्न व मदार का पुष्प चढ़ाएं।
सिंह: शहद या गुड़ मिश्रित जल से अभिषेक करें। लाल पुष्प, वस्त्र और रोली अर्पित करें।
कन्या: गन्ने के रस से अभिषेक करें। भांग, धतूरा, मंदार का पत्र व पुष्प चढ़ाएं।
तुला: शहद से अभिषेक करें। भाग, मंदार पुष्प और सफेद वस्त्र चढ़ाएं।
वृश्चिक: शहद युक्त तीर्थजल से अभिषेक करें। लाल पुष्प, फल और मिष्ठान चढ़ाएं।
धनु: गाय के दूध में केसर मिलाकर अभिषेक करें। पीला वस्त्र, फल, भांग व धतूरा चढ़ाएं।
मकर: गंगाजल या गन्ने के रस से अभिषेक करें। शमी पत्र, भांग, धतूरा चढ़ाएं।
कुंभ: गन्ने के रस से अभिषेक करें। दूर्वा, शमी, मंदार पुष्प चढ़ाएं।
मीन: केसर मिश्रित दूध से अभिषेक करें। केला और पीला पुष्प, फल व मिष्ठान चढ़ाएं।

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