फेफड़ों का कैंसर ‘साइलेंट किलर’, समय रहते जांच ही बचाव... एआईपीकॉन 2026 में विशेषज्ञों की चेतावनी
केजीएमयू में उपलब्ध आधुनिक जांच व इलाज
लखनऊ, अमृत विचार : फेफड़ों का कैंसर अक्सर बिना स्पष्ट लक्षणों के शरीर में पनपता है, जिससे मरीज देर से डॉक्टर के पास पहुंचते हैं। समय पर जांच और सटीक उपचार से इस बीमारी पर काफी हद तक काबू पाया जा सकता है। ये जानकारी केजीएमयू के पल्मोनरी एंड क्रिटिकल केयर मेडिसिन विभाग के अध्यक्ष डॉ. वेद प्रकाश ने शनिवार को शताब्दी भवन प्रेक्षागृह में हुए एआईपीकॉन 2026 में दी।
डॉ. वेद ने बताया कि फेफड़ों के कैंसर के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। शुरुआती चरण में मरीज को लगातार खांसी, थकान, सांस लेने में हल्की कठिनाई या बार-बार फेफड़ों में संक्रमण जैसे लक्षण हो सकते हैं। चूंकि ये लक्षण सामान्य सर्दी-खांसी या धूम्रपान से जुड़ी समस्याओं से मिलते-जुलते हैं, इसलिए लोग इन्हें नजरअंदाज कर देते हैं। उन्होंने बताया कि शुरुआत में ट्यूमर का आकार छोटा होता है, जिससे स्पष्ट लक्षण दिखाई नहीं देते। जैसे-जैसे कैंसर बढ़ता है, मरीज को खून वाला बलगम, सीने में दर्द और सांस लेने में गंभीर कठिनाई महसूस हो सकती है। उन्होंने कहा कि केजीएमयू में फेफड़ों के कैंसर की पहचान और आधुनिक उपचार की सुविधाएं उपलब्ध हैं।
दिल्ली स्थित पटेल चेस्ट इंस्टीट्यूट के पूर्व निदेशक डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने कहा कि सीटी स्कैन, बायोप्सी और अन्य इमेजिंग तकनीकों के माध्यम से रोग की समय पर पहचान संभव है। उन्होंने जोर दिया कि सही समय पर सटीक इलाज से बीमारी पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सकता है।
सलाह
-धूम्रपान की लती और प्रदूषण प्रभावित क्षेत्रों में रहने वालों को नियमित फेफड़ों की जांच कराएं
-जीवनशैली में बदलाव लाएं
-धूम्रपान और तंबाकू से तौबा करें
-संतुलित आहार लें
-प्रदूषण से बचाव करें।
