महाशिवरात्रि पर देवभूमि उत्तराखंड में शिव भक्तों का सैलाब, हर हर महादेव से गूँज उठा शिवालय
देहरादून। देवभूमि उत्तराखंड में महाशिवरात्रि पर हर तरफ रविवार को ब्रह्म मुहूर्त लगभग तीन बजे से शिव भक्तों के "हर-हर महादेव" के उदघोष गूंजायमान हैं। अनेक स्थानों पर भगवान शंकर और माता पार्वती के प्रतीक को आकर्षक वेशभूषा में सुसज्जित कर, बैंड बाजों के साथ उनकी बारात भी निकाली जा रही है।
राज्य के सभी छोटे, बड़े शिवालय में श्रद्धालुओं के पंक्ति जलाभिषेक के लिए अनवरत लगी हैं। आज महर्षि दयानंद का बोधिसत्व दिवस होने के कारण विभिन्न आर्यसमाज मन्दिरों में मंत्रोच्चारण के साथ यज्ञ भी किए जा रहे हैं।
महा शिवरात्रि और महर्षि दयानंद बोधोत्सव के अवसर पर देहरादून जनपद के विकासनगर, सुभाषनगर, हरिद्वार में गुरुकुल कांगड़ी सहित अन्य स्थानों पर स्थित आर्य समाज मन्दिरों और विद्यालयों में वैदिक ऋचाओं के मंत्रों के साथ यज्ञ आयोजित किये जा रहे हैं। जिनमें उपस्थित श्रद्धालु अपनी आहुति दे रहे हैं। जबकि शिवालयों में ब्रह्म मुहूर्त लगभग तीन बजे से ही शिव भक्तों की पंक्तियां शिवलिंग पर रुद्राभिषेक और जलाभिषेक कर रही हैं।
रूद्रप्रयाग के ऊखीमठ स्थित भगवान शिव के ग्यारहवें ज्योतिर्लिंग केदारनाथ के शीतकालीन गद्दी स्थल श्री ओंकारेश्वर, पौड़ी गढ़वाल जनपद अंतर्गत, नीलकंठ महादेव, देहरादून के टपकेश्वर, डाट काली, ऋषिकेश के वीर भद्र, नीम करौली बाबा धाम, हरिद्वार के दक्ष, अल्मोडा में जागेश्वर मंदिरों सहित सभी छोटे, बड़े मन्दिरों के शिवालयों में समाचार लिखने तक श्रद्धालुओं की आध्यात्मिक श्रद्धा, भक्ति और उत्साह में कोई कमी नहीं आई है।
संबंधित जनपदों के जिला अधिकारी और पुलिस विभाग के सभी छोटे, बड़े अधिकारी कर्मचारी व्यवस्थाओं को संभालने में लगे हैं। भोले के इन भक्तों ने शिवलिंग पर पंचामृत, गंगाजल, सफेद फूल, बेलपत्र, आखा फूल, कमल गंट्टा आदि से पूजन किया। राज्यपाल सेवानिवृत लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रदेशवासियों को महा शिवरात्रि की शुभकामनाएं दीं हैं। महाशिवरात्रि के उपलक्ष्य में सभी शिवालयों को भव्य तरीके से सजाया गया है।
विद्वानों के अनुसार, महाशिवरात्रि पर अनेक वर्षों बाद कई शुभ योग एक साथ बने हैं। इस दिन कुंभ राशि में बुधादित्य, शुक्रादित्य, लक्ष्मी नारायण और चतुर्ग्रही योग के साथ सर्वार्थ सिद्धि, प्रीति, ध्रुव व व्यतिपात योग भी रहेंगे। यह दिन ग्रह-नक्षत्रों की चाल के लिहाज से भी खास रहेगा।
उल्लेखनीय है कि महाशिवरात्रि की यह पावन रात्रि आत्म शुद्धि, साधना और शिव कृपा पाने का दुर्लभ संयोग है। फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि 15 फरवरी, रविवार को शाम पांच बजकर 4 मिनट से शुरू होगी। यह तिथि 16 फरवरी, सोमवार को शाम पांच बजकर 34 मिनट तक रहेगी।
