लखनऊ में बोगस फर्म से करोड़ों की GST चोरी करने वाले गिरोह का खुलासा, चार गिरफ्तार
लखनऊ, अमृत विचार: फर्जी दस्तावेजों के आधार पर बोगस फर्म बनाकर करोड़ों रुपये की जीएसटी चोरी करने वाले गिरोह का खुलासा साइबर क्राइम सेल और इटौंजा पुलिस की संयुक्त टीम ने किया है। पुलिस ने महिला समेत चार आरोपियों को सोमवार सुबह गिरफ्तार किया।
शुरुआती जांच में सामने आया है कि गिरोह ने 16 बोगस फर्म खोलकर करीब 2.75 करोड़ रुपये की जीएसटी चोरी की। गिरोह में कुछ सीए के जुड़े होने और जीएसटी विभाग के कर्मचारियों की मिलीभगत से स्थलीय सत्यापन में गलत रिपोर्ट लगाने की बात भी सामने आई है। पुलिस कुछ कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच कर रही है।
डीसीपी अपराध कमलेश दीक्षित के अनुसार गिरफ्तार आरोपियों में कानपुर नगर के जूही कॉलोनी निवासी तबस्सुम, कल्याणपुर का प्रशांत बेंजवाल, दीन दयालपुरम निवासी दौलत राम और इंदिरानगर सेक्टर का कारोबारी सुमित सौरभ शामिल हैं।
गिरोह का सरगना सीतापुर निवासी अम्मार अंसारी फरार है। पुलिस के मुताबिक तबस्सुम उसके इशारे पर फर्जी दस्तावेजों से बोगस फर्म तैयार कराती थी।
बीते वर्ष दो सितंबर को राज्य कर विभाग के सहायक आयुक्त अभिमन्यु पाठक ने इटौंजा थाने में 52 लाख रुपये की जीएसटी चोरी का मुकदमा दर्ज कराया था। जांच के दौरान एमएम स्वराज ट्रेडर्स, एसएस गैलेक्सी और एसएस इंटरप्राइजेज समेत कई फर्मों के जरिए कर चोरी का खुलासा हुआ।
आरोपियों के पास से 20 डेबिट कार्ड, 26 सिम कार्ड, 11 मोबाइल फोन, पांच मेमोरी कार्ड, एक लैपटॉप, 25 आधार कार्ड और 25 पैन कार्ड की फोटो कॉपी, तीन पासबुक, तीन चेकबुक, नौ कैशबुक, 137 फर्जी इनवाइस, खतौनी और कई निवास प्रमाणपत्र बरामद किए गए हैं।
विशेष टीम की जांच में हुआ खुलासा
डीसीपी के मुताबिक मामले की जांच में साइबर क्राइम थाना, क्राइम सेल और इटौंजा पुलिस की विशेष टीम को लगाया गया था। जांच में सामने आया कि प्रशांत, तबस्सुम, अम्मार अंसारी और दौलत राम ने मिलकर 16 बोगस फर्म बनाईं। गिरोह ने सीतापुर, लखीमपुर खीरी, लखनऊ समेत कई जिलों में इसी तरह जालसाजी की। अम्मार पूर्व में सीतापुर से जेल भी जा चुका है।
कैशियर के साथ मिलकर तैयार किया गिरोह
इंस्पेक्टर साइबर क्राइम ब्रजेश कुमार यादव के अनुसार तबस्सुम कानपुर में एक मॉल में नौकरी करती थी, जहां उसकी मुलाकात कैशियर प्रशांत से हुई। अधिक धन कमाने की लालसा में दोनों ने यह गिरोह बनाया और बाद में अम्मार अंसारी को इसमें शामिल किया, जिसने पूरे नेटवर्क की कमान संभाल ली।
फर्जी दस्तावेज देते थे 15 हजार रुपये
साइबर एक्सपर्ट सय्यद हसन आदिल ने बताया कि तबस्सुम जरूरतमंद लोगों से आधार कार्ड, पैन कार्ड, मोबाइल नंबर और बैंक खाते के दस्तावेज लेकर उन्हें 15 हजार रुपये देती थी। उन्हीं दस्तावेजों पर फर्जी फर्म का पंजीकरण कराया जाता था। अम्मार फर्जी जीएसटी रजिस्ट्रेशन, किरायानामा, आईटीसी और ई-वे बिल तैयार करता था। प्रत्येक फर्म के एवज में तबस्सुम और प्रशांत को एक-एक लाख रुपये मिलते थे। जीएसटी चोरी से प्राप्त रकम आपस में बांट ली जाती थी।
