पीलीभीत: गेमिंग एप के जरिए ठगी करने वाले दो और जालसाज भोपाल और दिल्ली से गिरफ्तार
पीलीभीत/घुंघचिहाई, अमृत विचार। फर्जी कॉल सेंटर संचालित कर साइबर ठगी करने वाले गिरोह की धरपकड़ को लेकर चलाए जा रहे अभियान के दौरान सर्विलांस टीम की मदद से घुंघचिहाई पुलिस ने दो और आरोपी धर दबोचे। उनके पास से सात मोबाइल, एक लैपटॉप, एक पासपोर्ट समेत अन्य सामान की बरामदगी की गई है।
बता दें कि बीते दिनों फर्जी कॉल सेंटर संचालित कर गेमिंग एप (एविएटर, रम्मी) के जरिए ठगी करने वाले दर्जनभर जालसाजों को पुलिस जेल भेज चुकी है। साइबर सेल की मदद से घुंघचिहाई पुलिस ने दो और आरोपी पकड़े हैं। बताते हैं कि घुंघचिहाई पुलिस को विवेचना के दौरान संज्ञान में आया कि गिरोह के सरगना हर्षित उर्फ तनिश निवासी भोपाल और आशुतोष मिश्रा उर्फ आशु उर्फ पंकज निवासी दिल्ली जोकि मूल रुप से उत्तरप्रदेश के शाहजहांपुर जनपद का रहने वाला है। फिर सक्रिय हो चुके हैं।
इस पर टीम ने सुरागरसी की और साक्ष्य जुटाए। जिसके बाद नौ फरवरी को आरोपी हर्षित उर्फ तनिश को भोपाल से धर दबोचा। उसके पास से तीन मोबाइल, एक लैपटॉप बरामद किया गया। वहीं, दिल्ली के मालवीय नगर में दबिश दी गई और आरोपी आशुतोष कुमार को भी पकड़ लिया। उसके पास से मोबाइल समेत अन्य सामान की बरामदगी की गई। दोनों को टीम पीलीभीत लेकर आई और पूछताछ की। आरोपी पूर्व में हुई धरपकड़ की कार्रवाई के दौरान फरार हो गए थे। फिर तनिश ने अपना नया ठिकाना भोपाल और आशुतोष ने मालवीय नगर दिल्ली में गिरोह का संचालन शुरू कर रहा था।
ये दोनों भी दुबई से फर्जी गेमिंग एव का कॉल सेंटर चलाना सीखकर आए थे। इन्होंने भी खुद कॉल सेंटर में पूर्व में नौकरी की थी। होटलों में फर्जी आधार कार्ड लगाकर रुका करते थे, ताकि असल पहचान उजागर न हो। आरोपियों ने दुबई में काम सीखा और फिर गिरोह बनाकर ठगी शुरू कर दी थी। कोई बैंक अकाउंट तो कोई सदस्य ब्लैक में खुरचे हुए सिम कार्ड मुहैया कराता था। लोगों को पहले रकम जिताकर भेजते थे और फिर लत पड़ने पर जालसाजी का खेल शुरू होता। पूर्व में अमृतपाल और मनजीत के गिरोह के पकड़े जाने के बाद उक्त आरोपी भाग गए थे और अब बेफ्रिक होकर पुराने अड़्डों पर रहने लगे थे। शुरुआत में गेम जीताकर रकम देते और फिर खातों की डिटेल जुटाकर रकम उड़ा लिया करते थे।
5.54 करोड़ से अधिक इन्वेस्टमेंट, प्रतिमाह दो करोड़ मुनाफा
बताते हैं कि सरगना दुबई और दिल्ली से गिरोह का संचालन कर रहे हैं। अमृतपाल की गिरफ्तारी के बाद इन लोगों ने बेवसाइट की लॉगइन आईडी व पासवर्ड ब्लॉक कर दिया था। चक्र खड़का गिरोह के लिए अकाउंट मेनटेन किया करता था। लैप्टॉप में मौजूद फेयरप्ले एप में गेम खेलने वाले करीब 50 हजार लोगों ने ऑनलाइन किया था, जिसमें 20 हजार ने रुपये इनवेस्ट किए थे।
अभी तक की पड़ताल पर गौर करें तो विक्रांत उर्फविक्की और चक्र खड़का के मोबाइल में मौजूद 11739 नंबर से करीब 05 करोड़ 54 लाख 40 हजार 242 रुपये इन्वेस्टमेंट किए गए थे। प्रतिदिन करीब 15 से 16 लाख रुपये का गेम लोगों को खिलवाते थे। इसमें सात-आठ लाख रुपये कस्टमर को वापस करते और बकाया मुनाफाता होता था। प्रतिमाह करीब दो करोड़ का मुनाफा ठगी के माध्यम से कमाते थे। ठगी से कमाए रुपये के बाद महंगे शौक पूरा करते थे। अभी भी पुलिस बरामद हुए मोबाइल लैपटाप की मदद से साक्ष्य जुटाने में लगी है।
