निजी कॉलेज से एमबीबीएस, फिर भी बने गरीब : EWS कोटे से डॉक्टरों की नियुक्ति पर सवाल

Amrit Vichar Network
Published By Virendra Pandey
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लखनऊ, अमृत विचार : राजधानी में स्वास्थ्य विभाग की भर्ती प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। हेल्थ एंड वेलनेस सेंटरों पर संविदा के आधार पर एमबीबीएस डॉक्टरों की नियुक्ति में ईडब्ल्यूएस (आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग) कोटे के दुरुपयोग का मामला सामने आया है। आरोप है कि निजी व विदेशी मेडिकल कॉलेजों से लाखों-करोड़ों रुपये खर्च कर पढ़ाई करने वाले कुछ डॉक्टरों ने ईडब्ल्यूएस प्रमाण पत्र बनवाकर नौकरी हासिल कर ली।

मोहल्ला क्लीनिक की तर्ज पर संचालित हेल्थ एंड वेलनेस सेंटरों के लिए सात जनवरी को सीएमओ कार्यालय में वॉक-इन इंटरव्यू आयोजित किया गया था। 55 पदों के सापेक्ष लगभग 400 अभ्यर्थी साक्षात्कार में शामिल हुए। इनमें निजी मेडिकल कॉलेजों और विदेश से एमबीबीएस करने वाले अभ्यर्थी भी थे।

सूत्रों का दावा है कि विभाग के कुछ कर्मचारियों ने ऐसे अभ्यर्थियों को ईडब्ल्यूएस प्रमाण पत्र बनवाने की सलाह दी। इसके बाद कथित रूप से प्रमाण पत्र तैयार कराकर चयन प्रक्रिया में लाभ लिया गया। आरोप है कि तीन से चार डॉक्टरों का चयन इसी आधार पर किया गया और उन्हें हेल्थ एंड वेलनेस सेंटरों पर तैनाती भी दे दी गई। मामले की शिकायत समाजसेवी सूरज कश्यप ने की है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि आर्थिक रूप से सक्षम अभ्यर्थियों ने फर्जी या संदिग्ध आय प्रमाण पत्र के आधार पर आरक्षण का लाभ उठाया है।

ईडब्ल्यूएस कोटे के तहत वार्षिक आय आठ लाख रुपये से कम होने पर ही पात्रता मिलती है। आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए शिक्षा और सरकारी नौकरियों में 10 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान है। सीएमओ डॉ. एनबी सिंह ने बताया कि मामले की जांच कराई जाएगी। जांच के दौरान यदि प्रमाण पत्र फर्जी पाए गए तो संबंधित डॉक्टरों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया जाएगा और उनकी सेवाएं समाप्त की जाएंगी।

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