हाईकोर्ट : निजी परिसर में नमाज़ रोकने के आरोप में डीएम-एसएसपी बरेली को अवमानना नोटिस
प्रयागराज, अमृत विचार : इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बरेली के जिला मजिस्ट्रेट और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को एक निजी घर में नमाज़ अदा करने से कुछ व्यक्तियों, जिनमें याची तारिक खान भी शामिल हैं, को कथित रूप से रोकने के मामले में अवमानना नोटिस जारी किया है। उक्त आदेश न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन और न्यायमूर्ति सिद्धार्थ नंदन की खंडपीठ ने तारिक खान की याचिका पर सुनवाई करते हुए पारित किया।
कोर्ट ने अपने पूर्व निर्णय मरानाथा फुल गॉस्पेल मिनिस्ट्रीज बनाम उत्तर प्रदेश राज्य और 2 अन्य का हवाला देते हुए दोहराया कि यदि धार्मिक प्रार्थना किसी व्यक्ति की अपनी संपत्ति के निजी परिसर में की जा रही हो, तो उसके लिए किसी प्रकार की अनुमति आवश्यक नहीं है। यह अधिकार संविधान के अनुच्छेद 25 के तहत संरक्षित मौलिक अधिकार है। उपरोक्त आदेश में राज्य ने भी स्वीकार किया था कि निजी परिसर में धार्मिक प्रार्थना पर कोई प्रतिबंध नहीं है। वर्तमान मामले में याची ने आरोप लगाया कि 16 जनवरी को उन्हें और अन्य लोगों को रेशमा खान के स्वामित्व वाले एक खाली मकान में “बिना अनुमति” नमाज़ पढ़ने के आरोप में हिरासत में लिया और सीआरपीसी की धारा 151 (बीएनएसएस की धारा 170) के तहत चालान किया गया। 27 जनवरी के आदेश के बाद याची ने 28 जनवरी और 2 फरवरी को क्रमशः व्यक्तिगत रूप से और पंजीकृत डाक से डीएम व एसएसपी को अभ्यावेदन देकर रमज़ान के दौरान उसी निजी परिसर में नमाज़ अदा करने की अनुमति मांगी।
याची के अधिवक्ता राजेश कुमार गौतम का कहना है कि स्पष्ट न्यायिक निर्देश के बावजूद अधिकारियों ने इन अभ्यावेदनों पर कोई निर्णय नहीं लिया। याचिका में अधिकारियों को आवश्यक अनुमति देने और किसी प्रकार की बाधा न उत्पन्न करने का निर्देश देने की मांग की गई है। मामले की गंभीरता को देखते हुए कोर्ट ने राज्य के अधिवक्ता को निर्देश प्राप्त करने को कहा और 27 जनवरी के आदेश के कथित उल्लंघन पर संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी किया। मामले को शीर्ष दस वादों में शामिल करते हुए 11 मार्च को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया गया है। तब तक याची के विरुद्ध दंडात्मक कार्रवाई पर रोक लगाने का भी आदेश दिया गया है।
