यूपी बजट सत्र : भर्ती प्रक्रिया व निवेश नीति समेत कई मुद्दों पर तीखी बहस, मंत्री नंदी बोले - सरकार की कथनी और करनी में अंतर नहीं

Amrit Vichar Network
Published By Deepak Mishra
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लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र में गुरुवार को भर्ती प्रक्रिया, आईटीआई संचालन और निवेश नीति को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली। समाजवादी पार्टी (सपा) के विधायक संग्राम सिंह यादव ने सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि प्रदेश सरकार हर मोर्चे पर विफल रही है।

उन्होंने आरोप लगाया कि लोक सेवा आयोग और अधीनस्थ सेवा चयन आयोग की भर्तियों में बड़े स्तर पर भ्रष्टाचार हुआ है। उनका कहना था कि युवाओं और किसानों को लगातार गुमराह किया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार को बाबा साहेब के संविधान पर भरोसा नहीं है और भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित की जानी चाहिए। 

वहीं कांग्रेस विधायक दल की नेता आराधना मिश्रा ने प्रदेश में आईटीआई संचालन को लेकर सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि आईटीआई को चलाने के लिए अपनाए गए पीपीपी मॉडल के कारण गरीब छात्रों पर महंगी फीस का बोझ बढ़ रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या सरकार इस फैसले पर पुनर्विचार करेगी और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के छात्रों को राहत देने के लिए कोई ठोस कदम उठाएगी। 

आराधना मिश्रा ने यह भी कहा कि कई जिलों में आईटीआई भवन बनकर तैयार हैं, लेकिन उनका संचालन शुरू नहीं हो पाया है। इससे विद्यार्थियों को कक्षाओं के लिए जिला मुख्यालय तक लंबी दूरी तय करनी पड़ती है। इस पर सरकार की ओर से जवाब दिया गया कि जहां संस्थान संचालित नहीं हो रहे हैं, वहां शीघ्र ही स्टाफ की भर्ती कर उन्हें चालू किया जाएगा। 

निवेश से जुड़े सवालों पर प्रदेश के औद्योगिक विकास मंत्री नंद गोपाल नंदी ने कहा कि उत्तर प्रदेश को निवेशकों का पसंदीदा गंतव्य बनाने के लिए सरकार ने 32 से अधिक औद्योगिक नीतियां बनाई हैं। इन नीतियों के तहत निवेश प्रस्तावों पर त्वरित कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के सभी जिलों में औद्योगिक इकाइयों की स्थापना की जा रही है और पिछड़े जिलों विशेषकर पूर्वांचल और बुंदेलखंड को प्राथमिकता दी गई है।

 मंत्री ने दावा किया कि डबल इंजन सरकार के प्रयासों से सीतापुर से सहारनपुर और हमीरपुर से गोरखपुर तक विकास कार्यों की रोशनी पहुंची है। मंत्री ने कहा कि सरकार की कथनी और करनी में अंतर नहीं है, यही कारण है कि राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय निवेशक उत्तर प्रदेश में निवेश के लिए आगे आ रहे हैं।

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