मान्यता सस्पेंड फिर भी वेतन जारी? हाईकोर्ट ने उठाए सवाल, अल्पसंख्यक विभाग पर लगे नियम तोड़ने के आरोप!
लखनऊ, अमृत विचार: सरकारी सहायता प्राप्त शैक्षणिक संस्थानों में मान्यता निलंबन के बाद अनुदान व वेतन के भुगतान पर पूरी तरह रोक है। पर, अल्पसंख्यक कल्याण विभाग प्रदेश के 18 मदरसों पर विशेष कृपा बरसा रहा है। सभी 18 मदरसों की मान्यता निलंबित है। इसके बाद भी इनके अनुदान और वेतन लगातार जारी किये जा रहे हैं। इस मामले में एक जनहित याचिका हाईकोर्ट लखनऊ पीठ में दायर की गई। जिस पर अल्पसंख्यक कल्याण विभाग से स्पष्टीकरण तलब किया है। इस मामले में अगली तारीख 30 मार्च रखी गई है।
जौनपुर निवासी एजाज अहमद ने बुधवार को हाईकोर्ट लखनऊ पीठ में जनहित याचिका दायर की। जिसमें बताया कि प्रदेश में सहायता प्राप्त 18 मदरसों की मान्यता निलंबित होने के बावजूद वेतन भुगतान और सभी तरह के अनुदान जारी रखने की बात कही है। मामले में वित्तीय अनुशासन, नीति की एकरूपता और सरकारी अनुदान की वैधानिकता को लेकर गंभीर सवाल खड़े किया हैं। याचिका के मुताबिक, वाराणसी स्थित मदरसा जामिया इस्लामिया, मदनपुरा तथा अशरफिया मुबारकपुर (आजमगढ़) सहित सिद्धार्थनगर, महराजगंज, कुशीनगर और अलीगढ़ समेत विभिन्न जनपदों के कुल 18 सहायता प्राप्त मदरसों का मामला कोर्ट के सामने प्रस्तुत किया गया है। आरोप है कि मान्यता निलंबन की स्थिति के बावजूद कुछ संस्थानों में शिक्षकों व शिक्षणेत्तर कर्मचारियों के वेतन भुगतान की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है। समान परिस्थितियों वाले अन्य संस्थानों में अनुदान पूरी तरह रोक दिया गया है। आरोपी मदरसों में ब्रिटिश नागरिकता हासिल करने के बाद वेतन व पेंशन उठाने वाले शमशुल हुदा जिस मदरसा में शिक्षक था, उसका भी नाम शामिल हैं।
प्रशासनिक पारदर्शिता पर सवाल
सामान्य प्रशासनिक व्यवस्था के अनुसार, माध्यमिक एवं बेसिक शिक्षा विभागों में किसी संस्थान की मान्यता निलंबित होते ही उसका अनुदान और वेतन भुगतान स्वतः स्थगित कर दिया जाता है। सूत्रों के मुताबिक, मान्यता और वित्तीय सहायता विधिक रूप से परस्पर संबद्ध होती हैं। जिससे गुणवत्ता नियंत्रण और वित्तीय जवाबदेही सुनिश्चित होती है। पर, अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के अंतर्गत संचालित कुछ मदरसों के संदर्भ में अलग स्थिति सामने आने के आरोपों ने पारदर्शिता पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है। सूत्रों के मुताबिक वाराणसी के मदरसा जामिया इस्लामिया, मदनपुरा से जुड़े विभागीय पत्राचार में यह उल्लेख सामने आया कि शिक्षकों एवं कर्मचारियों के वेतन भुगतान की प्रक्रिया चल रही है, जबकि प्रबंध समिति की ओर से वेतन बिल औपचारिक रूप से प्रस्तुत नहीं किए गए थे। इसी प्रकार पूर्वांचल के कुछ अन्य मदरसों में भी अनुदान जारी रहने अथवा प्रस्तावित होने की बात सामने आयी है।
जनहित याचिका से हाईकोर्ट में उठा मुद्दा
इस पूरे प्रकरण को लेकर जौनपुर निवासी सामाजिक कार्यकर्ता एजाज अहमद ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ खंडपीठ में जनहित याचिका संख्या 130/2026 दायर की है। याचिका में कहा गया है कि मान्यता निलंबित संस्थानों के संबंध में राज्य की अनुदान नीति स्पष्ट और एकरूप नहीं है, जिससे सरकारी धन के उपयोग की वैधानिकता पर प्रश्न उठते हैं। 18 फरवरी को मुख्य न्यायाधीश की पीठ के समक्ष हुई सुनवाई के दौरान न्यायालय ने राज्य सरकार से इस विषय में स्पष्ट निर्देश और स्थिति रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए समय दिया। कोर्ट ने यह भी संज्ञान लिया कि कुछ निलंबित संस्थानों को अनुदान दिए जाने की बात सामने आ रही है, जबकि अन्य संस्थानों में भुगतान रोक दिया गया है। साथ ही मदरसा बोर्ड के रजिस्ट्रार द्वारा अनुदान रोकने संबंधी की गई संस्तुति पर अंतिम निर्णय न लिए जाने की बात भी न्यायालय के सामने रखी गई।
