Ramadan 2026: रोजा रखने से अगर मौत का अंदेशा हो तो रोजा हराम है? हेल्पलाइन पर रोजेदारों ने पूछे कई सवाल

Amrit Vichar Network
Published By Muskan Dixit
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लखनऊ, अमृत विचार। रमजान की 3 तारीख को इस्लामिक सेंटर ऑफ़ इंडिया और कार्यालय आयतुल्लाह अल उज़मा सैयद सादिक़ हुसैनी शीराजी की ओर से संचालित हेल्पलाइन पर रोजेदारों के सवालों का जवाब दिया गया। इन हेल्पलाइन के जरिये रोजेदारों को दीनी और शरई समस्याओं के सम्बन्ध में होने वाली शंकाओं का निराकरण किया जाता है।

एक रोजेदार ने इस्लामिक सेंटर ऑफ़ इंडिया की हेल्प लाइन पर पूछा कि एक शख्स को दांत में बहुत तकलीफ है, क्या वह रोजे की हालत में दांत उखड़वा सकता है ? इस सवाल के जवाब में बताया गया कि हलक में खून और दवा जाने का खतरा न हो तो दांत उखड़वाया जा सकता है।

हेल्पलाइन के सामने एक सवाल आया कि क्या नाबालिग लड़का तरावीह की नमाज की इमामत कर सकता है ? इस सवाल के जवाब में बताया गया कि इमामत के लिए बालिग होना शर्त है। एक सवाल आया कि रोजा अफ्तार किस चीज़ से करना बेहतर है ? जवाब में बतया गया कि खुजूर से करना बेहतर है, अगर खुजूर न हो तो किसी भी चीज से किया जा सकता है। इस हेल्पलाइन पर मौलाना खालिद रशीद फिरंगीमहली के मार्गदर्शन में धर्मगुरुओं के पैनल ने जवाब दिए।

आयतुल्लाह अल उज़मा सैयद सादिक़ हुसैनी शीराजी की ओर से जारी शिया हेल्पलाइन पर मौलाना सैयद सैफ अब्बास नक़वी ने जवाब दिए। इस हेल्पलाइन पर एक सवाल आया कि अगर किसी व्यक्ति को यह गुमान हो कि रोज़ा रखने से उसे नुक्सान होगा, तो क्या ऐसे व्यक्ति के लिए रोज़ा रखना जायज़ है? इस सवाल के जवाब में बताया गया कि अगर कोई व्यक्ति बर्दाश्त नहीं कर सकता तो रोज़ा सही नहीं है लेकिन अगर वह नुकसान मौत वगैरह का कारण बनने वाला हो, तो रोज़ा रखना हराम है।

एक सवाल आया कि अगर कोई व्यक्ति सहरी खाकर सो जाए लेकिन सुबह की नमाज न पढ़े, तो क्या उसका रोज़ा टूट जाएगा या मकरूह होगा ? इस सवाल के जवाब में बताया गया कि रोज़ा न तो बातिल होगा और न ही मकरूह लेकिन वह नमाज़ कज़ा करने का गुनहगार होगा।

हेल्पलाइन पर पूछा गया कि अगर कोई व्यक्ति खुम्स दिए बिना कोई जायदाद खरीदता है, तो क्या हुक्म है ? इसके जवाब में बताया गया कि खुम्स वाजिब है, उसे अदा करना चाहिए। अगर व्यापार के उद्देश्य से जायदाद खरीदी है, तो जब उसे बेचेगा तब खुम्स अदा करना होगा।

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