मिशन मेरठ : विधानसभा चुनाव 2027 से पहले विकास परियोजनाओं का उद्घाटन, जाट बेल्ट में सियासी बिसात बिछाने की तैयारी
लखनऊ। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जाट बहुल इलाके में अपनी राजनीतिक पकड़ को फिर से धार देने के इरादे से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) रविवार को मेरठ में होने वाली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रैली को निर्णायक मोड़ के रूप में देख रही है। माना जा रहा है कि 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले विकास परियोजनाओं के उद्घाटन को राजनीतिक संदेश में बदलकर प्रभावशाली सामाजिक समीकरणों को साधने की रणनीति तैयार की गई है।
किसान आंदोलन के बाद पार्टी से दूरी बना चुके जाट मतदाताओं को पुनः साथ लाना इस रैली का अहम लक्ष्य माना जा रहा है। लोकसभा चुनावों में हुए संभावित नुकसान की भरपाई की दृष्टि से भी यह आयोजन महत्वपूर्ण समझा जा रहा है। मंच पर प्रधानमंत्री के साथ जाट नेता एवं कौशल विकास और उद्यमिता राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) जयंत चौधरी की मौजूदगी को इसी व्यापक सामाजिक संतुलन के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
दिल्ली-मेरठ नमो भारत रैपिड रेल और मेरठ मेट्रो के उद्घाटन के बाद मोहिउद्दीनपुर में आयोजित जनसभा को केवल औपचारिक कार्यक्रम नहीं माना जा रहा बल्कि इसे व्यापक मतदाता वर्ग तक सशक्त राजनीतिक संदेश पहुंचाने की रणनीति का हिस्सा समझा जा रहा है, जहां विकास की परियोजनाएं संवाद का माध्यम बनेंगी। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह आयोजन शक्ति-प्रदर्शन का रूप ले सकता है।
विकास, राष्ट्रवाद और संगठनात्मक मजबूती को अभियान का केंद्रीय सूत्र बनाया गया है, ताकि मेरठ से उठी आवाज प्रदेश के अन्य जिलों तक प्रभावी ढंग से पहुंच सके। भाजपा 'डबल इंजन' सरकार की उपलब्धियों के रूप में मेट्रो और नमो भारत परियोजनाओं को प्रमुखता से रेखांकित कर रही है। पार्टी का दावा है कि बेहतर संपर्क व्यवस्था से शिक्षा, उद्योग और रियल एस्टेट को नई गति मिलेगी।
हालांकि विश्लेषकों का मानना है कि विकास के इस विमर्श के समानांतर सामाजिक समीकरणों को साधने की कोशिश भी निहित है। गौरतलब है कि मेरठ प्रधानमंत्री मोदी के चुनावी अभियानों का अहम पड़ाव रहा है। 5 फरवरी 2014 को यहीं से 'शंखनाद रैली' के जरिए लोकसभा चुनाव अभियान की शुरुआत हुई थी। इसके बाद 2019 और 2024 में भी चुनावी बिगुल मेरठ से ही फूंका गया, जिसने इस शहर को भाजपा की राजनीतिक रणनीति में विशेष स्थान दिलाया है।
