यौन उत्पीड़न केस : अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने अग्रिम जमानत के लिए हाईकोर्ट का किया रुख, जानें पूरा मामला

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Published By Deepak Mishra
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प्रयागराज/वाराणसी। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने नाबालिग के यौन उत्पीड़न और अन्य अपराधों के आरोप में मामला दर्ज होने के बाद मंगलवार को इलाहाबाद उच्च न्यायालय में अग्रिम जमानत के लिए याचिका दायर की। सूत्रों के अनुसार, अदालत में आवेदन दाखिल करने से पहले इस संबंध में सरकारी वकील के कार्यालय को नोटिस भेजा गया है। प्रयागराज के झूंसी थाने में अविमुक्तेश्वरानंद और उनके शिष्य मुकुंदानंद ब्रह्मचारी के खिलाफ पिछले एक साल में एक नाबालिग सहित दो व्यक्तियों के यौन शोषण के आरोपों में प्राथमिकी दर्ज की गई थी।

प्राथमिकी के अनुसार, शिकायतकर्ताओं में स्वामी रामभद्राचार्य के शिष्य आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज और एक नाबालिग सहित दो अन्य व्यक्ति शामिल हैं, जिन्होंने गुरुकुल में और माघ मेले सहित धार्मिक सभाओं के दौरान यौन शोषण किए जाने का आरोप लगाया था। इस बीच, वाराणसी में विद्यामठ में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा, ''हमारे शुभचिंतक अधिवक्ता हमारे पास आए थे।

हमसे कहा कि हम आपकी सहायता करने के लिए तैयार हैं तो हमने कहा ठीक है।'' उन्होंने पत्रकारों से कहा कि कुछ वकीलों ने सहायता की पेशकश करते हुए उनसे संपर्क किया था, लेकिन उन्हें अब तक उठाए गए किसी भी कदम के बारे में कोई जानकारी नहीं है। अविमुक्तेश्वरानंद ने एक तस्वीर दिखाई और आरोप लगाया कि प्रयागराज का एक पुलिस अधिकारी उनके खिलाफ साजिश रचने के केंद्र में है।

उन्होंने कहा कि तस्वीर में अधिकारी केक काटते हुए और आशुतोष ब्रह्मचारी उनके पास खड़े दिखते हैं। अविमुक्तेश्वरानंद ने दावा किया कि प्रशासन और पुलिस ने 18 जनवरी, मौनी अमावस्या से उनके खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी। उन्होंने कहा कि पॉक्सो अधिनियम के तहत तत्काल प्राथमिकी दर्ज करने के प्रावधानों के बावजूद, पुलिस ने खुद मामला दर्ज नहीं किया और इसके बजाय अदालत के आदेश के बाद मामला दर्ज किया गया।

अविमुक्तेश्वरानंद ने सवाल किया कि अधिकारियों को भेजे गए ईमेल से तुरंत मामला दर्ज क्यों नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि अदालत का आदेश सबूतों की तुलना में कानूनी फैसलों पर अधिक केंद्रित है और इससे संकेत मिलता है कि आशुतोष ब्रह्मचारी का समर्थन कौन कर रहा है। अविमुक्तेश्वरानंद ने यह भी दावा किया कि वाराणसी विकास प्राधिकरण के अधिकारियों ने हाल ही में विद्यामठ का सर्वेक्षण किया था।

उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें गौ संरक्षण अभियान से हटाने के लिए ''पूरी व्यवस्था'' का इस्तेमाल उनके खिलाफ किया जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार, संबंधित मामले में यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (पॉक्सो) अधिनियम की संबंधित धाराओं और अन्य संबंधित धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है। शिकायत में अविमुक्तेश्वरानंद और मुकुंदानंद ब्रह्मचारी के अलावा दो-तीन अज्ञात लोगों का भी उल्लेख है।

इसमें आरोप लगाया गया है कि आरोपियों ने खुद को धार्मिक उपदेशक बताकर नाबालिग और एक अन्य युवक का पिछले साल कई मौकों पर यौन उत्पीड़न किया। अविमुक्तेश्वरानंद हाल ही में प्रयागराज में माघ मेले के आयोजकों के साथ टकराव के कारण सुर्खियों में आए थे। उन्होंने प्रशासन पर मौनी अमावस्या के दिन उन्हें स्नान करने से रोकने का आरोप लगाया था। 

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