बनभूलपुरा अतिक्रमण : प्रभावितों को प्रति माह 2 हजार रुपये और पीएम आवास दिलाने की दलील
नयी दिल्ली/हल्द्धानी। सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को हल्द्वानी के बनभूलपुरा में रेलवे की जमीन पर अतिक्रमण केस की सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने दलील दी कि कुछ साल पहले नदी का पानी पटरियों में घुस गया था, जिससे रेलवे के बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचा था। भाटी ने कहा कि पात्र विस्थापित परिवारों को पीएमएवाई योजना के तहत उत्तराखंड या उत्तर प्रदेश में आवास उपलब्ध कराए जा सकते हैं और अगर आवश्यक हो तो उन्हें छह महीने तक प्रति माह 2,000 रुपये भी दिए जा सकते हैं।
उन्होंने कहा कि इलाके के 13 निवासियों के पास अपनी जमीन है और राज्य सरकार उन जमीनों का अधिग्रहण करेगी। पीठ ने मामले की सुनवाई अप्रैल तक स्थगित कर दी। शीर्ष अदालत ने 24 जुलाई 2024 को उत्तराखंड के मुख्य सचिव को हल्द्वानी में रेलवे की जमीन पर अतिक्रमण करने वाले 50,000 से अधिक लोगों के पुनर्वास के लिए केंद्र और रेलवे के अधिकारियों के साथ बैठक करने का निर्देश दिया था।
रेलवे ने याचिका में किया था अनुरोध
रेलवे ने साल 2024 में उच्चतम न्यायालय में याचिका दायर कर पांच जनवरी 2023 के उस आदेश को रद्द करने का अनुरोध किया था, जिसके तहत हल्द्वानी में रेलवे के दावे वाली 29 एकड़ भूमि से अतिक्रमण हटाने के उत्तराखंड उच्च न्यायालय के फैसले पर रोक लगा दी गई थी। याचिका में अनुरोध किया गया था कि रेल परिचालन को सुगम बनाने के लिए भूमि का एक टुकड़ा तत्काल आधार पर उपलब्ध कराया जाए, क्योंकि पटरियों की सुरक्षा करने वाली एक दीवार 2023 के मानसून के मौसम के दौरान गिर गई थी।
जमीन पर 4,365 अतिक्रमणकारी हैं
शीर्ष अदालत ने राज्य सरकार को बुनियादी ढांचे के उन्नयन और रेलवे लाइन के स्थानांतरण के लिए जरूरी भूमि के टुकड़े की पहचान बिना किसी देरी के करने का निर्देश दिया था। उसने उन परिवारों की पहचान करने के लिए भी कहा था, जिनके बेदखली के कारण प्रभावित होने की आशंका है। रेलवे के मुताबिक, संबंधित जमीन पर 4,365 अतिक्रमणकारी हैं, जो हल्द्वानी में विरोध-प्रदर्शन कर रहे हैं और दावा कर रहे हैं कि वे इसके असली मालिक हैं।
पहले मानवीय मुद्दा करार दिया था
विवादित भूमि पर चार हजार से अधिक परिवारों के लगभग 50,000 लोग रहते हैं, जिनमें से अधिकांश मुस्लिम हैं। शीर्ष अदालत ने हल्द्वानी में रेलवे के दावे वाली 29 एकड़ जमीन से अतिक्रमण हटाने के उत्तराखंड उच्च न्यायालय के आदेश पर पांच जनवरी 2023 को यह करते हुए रोक लगा दी थी कि यह एक मानवीय मुद्दा है और 50,000 लोगों को रातोंरात विस्थापित नहीं किया जा सकता।
