शाइन सिटी घोटाला: पांच वर्ष में अरबों समेट दुबई भागा था राशिद नसीम, जानें कैसे 2013 में प्रयागराज से शुरू हुआ था रियल एस्टेट का कारोबार
छह माह में गोमतीनगर के एसआरएस मॉल के सामने खोला लग्जरी ऑफिस
दुबई के बुर्ज खलीफा में बनाया ठिकाना, वहीं संचालित कर रहा था सिंडिकेट
लखनऊ, अमृत विचार: प्रयागराज के करेली की गलियों से निकलकर रियल एस्टेट कंपनी शाइन सिटी संचालित करने वाला राशिद नसीम महज पांच वर्षों में अरबों रुपये का साम्राज्य खड़ा कर लिया। बिना भूखंड के हजारों लोगों से रुपये ठगे। जब वसूली व कब्जे के लिए दबाव बना तो पहले यूपी छोड़ दिल्ली गया। इसके बाद दुबई निकल गया। वहां बुर्ज खलीफा में ठिकाना बनाया। फिर सिंडिकेट का संचालन शुरू कर दिया। लगातार दर्ज हो रहे मामलों से पुलिस पर दबाव बढ़ा। शासन ने मामले की जांच आर्थिक अपराध अनुसंधान संगठन को सुपुर्द कर दिया।
पुलिस सूत्रों के मुताबिक प्रयागराज में करेली का रहने वाला राशिद नसीम शाइन सिटी की स्थापना 2013 में की। पहला कार्यालय प्रयागराज में खोला। इसके छह माह के अंदर ही उसने गोमतीनगर के एसआरएस मॉल के सामने लग्जरी कार्यालय खोला। जहां चप्पे-चप्पे पर सीसीटीवी कैमरों की नजर व निजी सुरक्षाकर्मियों की निगरानी रहती थी। यहीं से पूरे सिंडिकेट को संचालित करना शुरू किया। महज तीन वर्ष में पूरे देश में अपने एजेंटों के जरिये नेटवर्क फैलाया। अरबों रुपये भूखंड पर निवेश कराये। पुलिस के मुताबिक 2016 में राशिद नसीम लखनऊ छोड़ दिया। उसके कार्यालय पर निवेशकों और भूखंड खरीदने वालों का प्रदर्शन शुरू हो गया। इसके बाद कुछ दिनों तक वह दिल्ली में रहा। लगातार एफआईआर दर्ज होने लगे। पूरे प्रदेश में ताबड़तोड़ पुलिस ने कार्रवाई शुरू की। हालांकि किसी भी जिम्मेदारों को गिरफ्तार करने के बजाए पुलिस एजेंटों को भेजकर अपनी पीठ थपथपाती रही। दबाव बढ़ा तो राशीद ने दुबई का रुख कर लिया। इसके बाद कभी लखनऊ वापस ही नहीं आया।
ऑडियो वायरल कर दी थी सफाई
पांच वर्ष पूर्व पुलिस ने कंपनी एमडी व राशिद नसीम के छोटे भाई आसिफ नसीम को एक नवंबर को गिरफ्तार किया। प्रयागराज में ईओडब्ल्यू व पुलिस की संयुक्त टीम ने उसे दबोच लिया। इसके बाद राशिद ने एक ऑडियो वॉयरल किया। जिसमें बताया कि सरकारी एजेंसियों ने उसकी एक हजार करोड़ की संपत्तियां जब्त कर चुका है। हालांकि सरकारी दावे महज पांच सौ करोड़ के बताये गये। ऑडियो में कहा गया था कि करीब 300 करोड़ रुपए किसानों और दलालों के बीच फंसे हैं। जमीन दिलाने वाले कुछ दलालों के फरार होने और रजिस्ट्री विवादों के कारण कंपनी कानूनी उलझनों में फंसी हुई है।
दोनों भाइयों पर पांच-पांच लाख रुपये था इनाम
2017 में प्रदेश की सत्ता में बदलाव हुआ। प्रदेश में योगी की सरकार बनी। इसके बाद राशिद नसीम व उसके सिंडिकेट के खिलाफ बड़ी कार्रवाई शुरू हुई। लगातार उसके करीबी लोगों को गिरफ्तार किया जाने लगा। इस कार्रवाई की जद में उसका भाई व दूसरी पत्नी भी आ गई। प्रदेश सरकार ने राशिद और उसके भाई आसिफ पर पांच-पांच लाख रुपये का इनाम घोषित कर दिया था। इसके अलावा कंपनी के करीब एक दर्जन से अधिक सदस्यों पर एक-एक लाख और 30 से अधिक पर 50-50 हजार रुपये का इनाम घोषित किया गया।
2018 में नेपाल पुलिस ने किया था गिरफ्तार
जांच एजेंसियों के मुताबिक दुबई में बैठकर राशिद पूरे नेटवर्क को संचालित कर रहा था। बताया जा रहा है कि उसने वहां बड़ा निवेश किया। भारत में अपने सहयोगियों के जरिए गतिविधियां जारी रखीं। 2018 में नेपाल में उसे कुछ सदस्यों के साथ कैसिनो से गिरफ्तार किया गया। करीब 43 दिन बाद जमान पर रिहा होने के बाद दुबइ्र पहुंच गया। कई वर्षों तक गिरफ्तारी से बचते रहने के कारण उसके अंतरराष्ट्रीय संपर्कों की भी जांच की जा रही है। एजेंसियां यह भी खंगाल रही हैं कि ठगी की रकम किस-किस चैनल से विदेश भेजी गई। शाइन सिटी व राशिद नसीम के खिलाफ सबसे अधिक लखनऊ में मामले दर्ज है। कंपनी का यहीं मुख्यालय भी था। उसके खिलाफ गोमतीनगर, विकासनगर, बीकेटी, मोहनलालगंज और गोसाईगंज में मामले दर्ज हैं। इसके अलावा प्रयागराज, वाराणसी के अलावा कई अन्य जनपदो में मामला दर्ज कराया गया है।
पॉन्जी और पिरामिड स्कीम पर वसूले रुपये
शाइन सिटी ग्रुप ने पॉन्जी और पिरामिड स्कीम चलाया। इसके जरिये कंपनी ने रियल एस्टेट निवेश, प्लॉट, घर, फ्लैट व अन्य आकर्षक योजनाओं के नाम पर निवेशकों से अरबो रुपये निवेश कराये। निवेशकों को मोटे मुनाफे का लालच दिया। निवेशकों को न तो वादा किए गए प्लॉट या संपत्तियां दी गईं और न ही रिटर्न। कई मामलों में, प्लॉट के दस्तावेज फर्जी पाए गए थे। राशिद नसीम पर मनी लॉन्ड्रिंग का भी मामला दर्ज किया गया। उसने फर्जी कंपनियों, निदेशकों और सहयोगियों के खातों में ट्रांसफर किया गया। इन रुपये का उपयोग जमीन, ऑफिस स्पेस, और रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स खरीदने में किया गया। इन रुपये का निवेश गलत तरीके से पाया गया।
अब तक 63 आरोपी जा चुके हैं जेल
शाइन सिटी ग्रुप से जुड़े फर्जीवाड़े में पुलिस और ईओडब्ल्यू ने अब तक 63 लोगों को गिरफ्तार किया है। इसमें सीएमडी राशिद नसीम, उसका भाई एमडी आसिफ नसीम, मनीष जायसवाल (उपाध्यक्ष) की सितंबर 2024 में गिरफ्तारी की गई। ज्ञान प्रकाश उपाध्याय, मोहम्मद अकरम, शशि बाला, अभिषेक सिंह, दुर्गा प्रसाद, उद्धव सिंह, अमिताभ श्रीवास्तव, मीरा श्रीवास्तव समेत कई लोग शामिल हैं। जांच में सामने आया कि रेरा में सिर्फ 58 भूखंडों का रजिस्ट्रेशन था, लेकिन शाइन सिटी ने तीन हजार से अधिक की बुकिंग दिखाई थी। अब तक कुल 266.70 करोड़ रुपये की संपत्तियां जब्त की गईं, जिनमें लखनऊ के मोहनलालगंज में 24 कृषि भूमि (47.80 करोड़), बाराबंकी में 6 आवासीय भूखंड (16.5 करोड़), हरियाणा के रेवाड़ी में स्प्रिंगडेल प्रोजेक्ट में कॉमर्शियल संपत्तियां (9.27 करोड़), बिहार के पटना में 20 करोड़ की संपत्तियां जब्त की जा चुकी हैं।
