Bareilly: बदइंतजामी...गड्ढे भरने की फुर्सत नहीं, नया खोदने की जल्दी !
बरेली, अमृत विचार। विकास के नाम पर शहर की सूरत बिगाड़ने और जनता को आफत में झोंकने का खेल श्यामगंज में चरम पर है। गल्ला मंडी से लेकर फ्लाईओवर तक जलकल विभाग ने पहले पेयजल पाइपलाइन बिछाने के लिए सड़क का सीना चीर दिया और काम के बाद उसे ऊबड़-खाबड़ हाल में ही छोड़ दिया, जिससे लोग पहले से ही चोटिल हो रहे थे।
अब रही-सही कसर श्यामगंज चौराहे के बीचो-बीच ट्रंक सीवर लाइन जोड़ने के लिए शुरू हुई नई खुदाई ने पूरी कर दी है। इस व्यस्त चौराहे पर सोमवार को दिनभर अफरा-तफरी का माहौल रहा और पाइपलाइन के मलबे व सीवर की नई खुदाई के दोहरे वार से पूरा इलाका ''''जामगंज'''' में तब्दील हो गया। वाहनों की लंबी कतारों के बीच पुलिस के पसीने छूट गए।
सीवर लाइन के खोदे गए गड्ढे को जलकल विभाग के अफसर भले ही इसे कालीबाड़ी क्षेत्र की सीवर समस्या का समाधान बता रहे हों, लेकिन बिना किसी पूर्व योजना और वैकल्पिक मार्ग की व्यवस्था किए चौराहे को खोद देना विभाग की अदूरदर्शिता को दर्शाता है। एक तरफ जहां साहू गोपीनाथ से फ्लाईओवर तक की सड़क को मिट्टी डालकर खानापूर्ति कर दी गई है, जहां हर दस मिनट में लगने वाले जाम के कारण राहगीरों के बीच झगड़े होते हैं। दूसरी तरफ, अब मुख्य चौराहे की घेराबंदी ने मुसीबत ओर बढ़ा दी है।
स्थानीय दुकानदार राजू मौर्य, सुमित कुशवाहा, चंद्रसेन, रविंद्र आदि का कहना है कि नगर निगम का जलकल विभाग यह भूल गया है कि एक समस्या का समाधान दूसरी बड़ी मुसीबत पैदा करके नहीं किया जाना चाहिए। सिस्टम की इस बेतरतीब कार्यप्रणाली का खामियाजा चौराहे पर तैनात पुलिसकर्मी भी भुगत रहे हैं। धूल फांकते हुए यातायात संभालने के लिए जी-तोड़ मेहनत करते दिखे। सहायक अभियंता अजीतज विभाग का कहना है कि इस कार्य में तीन दिन ओर लगेंगे। जिसका सीधा मतलब है कि शहरवासियों को कम से कम तीन से चार दिन इसी दमघोंटू जाम और दुर्घटनाओं के साये में जीना होगा।
धूल फांकता कारोबार, सिसक रहे दुकानदार
श्यामगंज गल्ला मंडी के दुकानदारों का कहना है कि पहले पाइपलाइन के मलबे और धूल ने ग्राहकों का रास्ता रोका और अब बीच चौराहे की खुदाई ने रही-सही कसर पूरी कर दी है। दिनभर उड़ती धूल न केवल सेहत बिगाड़ रही है, बल्कि चौराहे के किनारे वाली दुकानों में रखा कीमती सामान भी खराब कर रही है। जाम के कारण ग्राहक इन रास्तों पर आने से तौबा कर रहे हैं, जिससे व्यापार चौपट हो गया है।
