लेबनान में मानवीय संकट चरम पर: 24 घंटे में 1 लाख से ज्यादा लोग बेघर, कुल विस्थापित 6.67 लाख पार
बेरुत/जिनेवाः लेबनान पर इजरायल के लगातार बढ़ते हमलों के कारण पिछले 24 घंटों में यहां एक लाख से अधिक लोग अपना घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों की ओर जाने को मजबूर हुए हैं। इससे एक गंभीर मानवीय त्रासदी का संकेत मिलता है। लेबनान में संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी उच्चायुक्त (यूएनएचसीआर) की प्रतिनिधि कैरोलिना लिंडहोम बिलिंग ने जिनेवा में पत्रकारों को बताया कि अब तक लेबनान सरकार के ऑनलाइन पोर्टल पर कुल 6,67,000 से अधिक विस्थापित लोग पंजीकृत हो चुके हैं। उन्होंने चिंता जताते हुए कहा, "पंजीकृत विस्थापितों की संख्या में मात्र एक दिन में एक लाख का इजाफा हुआ है, जो बेहद डरावना है।"
यूएन प्रतिनिधि ने चेतावनी दी कि वर्तमान में विस्थापन की गति 2024 में इजरायल और हिजबुल्लाह के बीच हुए पिछले युद्ध की तुलना में कहीं अधिक तेज है। इजरायली बमबारी के डर से दक्षिण लेबनान और बेरुत के उपनगरीय इलाकों से लोग सुरक्षित ठिकानों की तलाश में उत्तर की ओर पलायन कर रहे हैं। विस्थापितों की भारी संख्या के कारण राहत शिविरों और आश्रय स्थलों पर अत्यधिक दबाव बढ़ गया है।
लेबनान सरकार और अंतरराष्ट्रीय सहायता एजेंसियां भोजन, दवा और स्वच्छ पानी उपलब्ध कराने के लिए संघर्ष कर रही हैं। मानवीय संगठनों ने तत्काल युद्धविराम की अपील की है ताकि विस्थापितों को आवश्यक सहायता पहुँचाई जा सके। संयुक्त राष्ट्र ने यह भी जानकारी दी है कि लेबनान में रहने वाले सीरियाई शरणार्थी अब वापस अपने देश लौटने को मजबूर हैं। गत दो मार्च से अब तक 80,000 से अधिक सीरियाई नागरिक इजरायली हमलों से बचने के लिए लेबनान की सीमा पार कर सीरिया जा चुके हैं। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार विस्थापन की स्थिति इतनी आपातकालीन है कि कई परिवार बिना अपना सामान लिए ही जल्दबाजी में लेबनान छोड़कर निकल गए।
