हरभजन सिंह ने कीर्ति आजाद के 'मंदिर विवाद' पर दिया करारा जवाब, कहा- "उनकी बातें मत सुनिए, खेल और राजनीति अलग रखिए"
नई दिल्ली: टी20 वर्ल्ड कप 2026 की ऐतिहासिक जीत के बाद भारतीय टीम के कप्तान सूर्यकुमार यादव, हेड कोच गौतम गंभीर और आईसीसी चेयरमैन जय शाह ने ट्रॉफी लेकर अहमदाबाद के हनुमान मंदिर में जाकर पूजा-अर्चना की। इस घटना पर पूर्व क्रिकेटर और टीएमसी सांसद कीर्ति आजाद ने सवाल खड़े किए, जिस पर अब पूर्व भारतीय स्पिनर और राज्यसभा सांसद हरभजन सिंह ने कड़ा रुख अपनाया है।
क्या हुआ था विवाद?
8 मार्च 2026 को नरेंद्र मोदी स्टेडियम, अहमदाबाद में खेले गए फाइनल में भारत ने न्यूजीलैंड को 96 रनों से करारी शिकस्त दी। भारत ने 255/5 का स्कोर बनाया (संजू सैमसन 89, इशान किशन 54, अभिषेक शर्मा 52), जबकि न्यूजीलैंड 159 पर सिमट गया (जसप्रीत बुमराह 4 विकेट)। यह भारत की तीसरी टी20 वर्ल्ड कप ट्रॉफी थी और पहली बार घरेलू मैदान पर डिफेंड करने वाली टीम बनी।
https://twitter.com/KirtiAzaad/status/2030979146701271128?s=20
जीत के बाद उसी रात सूर्यकुमार, गंभीर और जय शाह ट्रॉफी लेकर स्टेडियम के पास हनुमान मंदिर पहुंचे और आशीर्वाद लिया।
कीर्ति आजाद ने सोशल मीडिया पर इसे गलत ठहराते हुए कहा: "टीम में हर धर्म के खिलाड़ी होते हैं, खेल का कोई धर्म नहीं। ट्रॉफी 140 करोड़ भारतीयों की है, किसी एक धर्म की नहीं। अगर ऐसा चलता रहा तो भारत और पाकिस्तान में क्या फर्क बचेगा? मैंने खेलते समय कभी धर्म नहीं जोड़ा। मस्जिद, चर्च या गुरुद्वारा क्यों नहीं?"
हरभजन सिंह का पलटवार
हरभजन सिंह ने कीर्ति आजाद के बयान को राजनीति से प्रेरित बताते हुए कहा कि "उनकी बातें आप मत सुनिए। खेल और राजनीति को अलग रखना चाहिए। आपकी आस्था है तो मंदिर जाइए, गुरुद्वारे जाइए, मस्जिद जाइए या कहीं भी जाइए। अगर सूर्यकुमार और गंभीर ने मन्नत मांगी थी और ट्रॉफी लेकर गए, तो यह उनकी व्यक्तिगत इच्छा है। इस पर सवाल खड़े करना बिल्कुल गलत है।"
हरभजन ने आगे कहा कि मंदिर, मस्जिद, चर्च और गुरुद्वारा सब एक समान हैं। खिलाड़ियों या बोर्ड के सदस्यों की आस्था पर सवाल उठाना शर्मनाक है। उन्होंने कहा, "कीर्ति खुद पूर्व क्रिकेटर हैं, उनसे ऐसी उम्मीद नहीं थी। शायद वे राजनीति को खेल से ऊपर रख रहे हैं।"
यह बयान क्रिकेट जगत में छिड़ी बहस को और तेज कर रहा है, जहां एक तरफ आस्था की स्वतंत्रता की बात हो रही है, तो दूसरी तरफ खेल को धर्म से अलग रखने की। कई पूर्व खिलाड़ी और फैंस हरभजन के पक्ष में हैं, जबकि कुछ कीर्ति आजाद के तर्क से सहमत दिख रहे हैं।
