जॉब का पहला दिन : जब मुझे बताना पड़ा, मैं यहां की अधिकारी हूं

Amrit Vichar Network
Published By Anjali Singh
On

फिल्मी रील्स में अक्सर जीवन का सजा-धजा रूप दिखाया जाता है। उसमें जीवन को किसी न किसी तरह के दिखावे और चमक-दमक में फ्रेम कर दिया जाता है, लेकिन मेरी ज्वाइनिंग के पहले दिन का अनुभव बिल्कुल अलग था। वह जीवन की सच्चाई थी बिना किसी फिल्टर के, बिल्कुल वास्तविक। मेरा चयन उत्तराखंड स्टेट सिविल सर्विसेज़ (पीसीएस) परीक्षा 2010 के माध्यम से हुआ था। प्रशिक्षण पूरा होने के बाद जब मुझे पहली पोस्टिंग के स्थान का पता चला, तो वह था ओखलकांडा, नैनीताल जिले का एक बेहद दुर्गम क्षेत्र। सच कहूं तो इससे पहले मैंने इस जगह का नाम भी कभी नहीं सुना था। मन में उत्सुकता भी थी और थोड़ी चिंता भी।

5 जून 2015 का वह दिन आज भी मुझे अच्छी तरह याद है, जब मैंने ओखलकांडा में अपनी ज्वाइनिंग की। यह अनुभव मेरे लिए बिल्कुल नया था। नैनीताल जिले का यह सबसे दुर्गम क्षेत्र माना जाता है। रास्ते में दूर-दूर तक कोई वाहन दिखाई नहीं देता था, न ही कहीं घरों की कतारें थीं। मेरे कार्यालय तक पहुंचने के लिए मुझे लगभग डेढ़ किलोमीटर पैदल चलना पड़ा। जब मैं ऑफिस पहुंची तो वहां कुछ लोग पहले से बैठे हुए थे। कुछ शिक्षक अपने काम से आए हुए थे और उस समय अपॉइंटमेंट तथा ट्रांसफर का दौर चल रहा था। कुछ क्लर्क भी वहां मौजूद थे। मैं करीब एक घंटे तक वहीं बैठी रही। मन में यह इच्छा थी कि स्टाफ और कर्मचारियों से बातचीत करके वहां की कार्यप्रणाली के बारे में जानकारी लूं, लेकिन शायद उन्होंने यह समझ लिया था कि मैं भी कोई शिक्षक हूं, जो अपने ट्रांसफर या किसी अन्य काम के सिलसिले में वहां आई हूं। काफी देर तक जब किसी ने मुझसे कुछ नहीं पूछा, तो अंततः मैंने ही उनसे पूछ लिया कि उप शिक्षा अधिकारी का कार्यालय कहां है और उनका कमरा कौन-सा है। उनमें से एक व्यक्ति ने जवाब दिया कि यहां अभी कोई कमरा तय नहीं है और यहां अभी कोई उप शिक्षा अधिकारी भी नहीं है। हां, इतना जरूर बताया कि जल्द ही कोई नए उप शिक्षा अधिकारी आने वाले हैं। तब मैंने मुस्कराते हुए कहा, “मैं ही वह नई उप शिक्षा अधिकारी हूं, मेरा नाम कमलेश्वरी मेहता है।” 

यह सुनते ही वहां मौजूद सभी लोग एकदम से खड़े हो गए। उनके चेहरे पर आश्चर्य साफ दिखाई दे रहा था। उन्होंने तुरंत कहा, “सॉरी मैम, हमने आपको पहचाना नहीं। हमें लगा कि आप कोई टीचर होंगी, जो अपने काम के लिए यहां आई हैं।” इसके बाद उन्होंने मुझे सम्मानपूर्वक अंदर बुलाया, मेरा कमरा दिखाया और बैठने का आग्रह किया। थोड़ी ही देर में चाय भी आ गई। इसी तरह मेरे पहले दिन की शुरुआत हुई। शुरुआत में वहां सुविधाओं का अभाव था और परिस्थितियां भी चुनौतीपूर्ण थीं, लेकिन उसी कठिन इलाके में काम करते हुए मैंने अपनी जिम्मेदारियों को पूरी निष्ठा से निभाया। ओखलकांडा में ज्वाइनिंग का वह पहला दिन मेरे जीवन का ऐसा अनुभव बन गया, जिसने मुझे आगे आने वाली हर चुनौती का सामना करने की ताकत दी। (कमलेश्वरी मेहता ब्लॉक एजुकेशन ऑफिसर गरुड़, बागेश्वर)