मोजैक डिफेंस है ईरान का सुरक्षा कवच: अमेरिका-इजराइल के खिलाफ जंग में कामयाबी को दर्शाया, जानिए क्या है 'फोर्थ सक्सेसर' मॉडल

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Published By Anjali Singh
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तेहरान/ दिल्ली। ईरान के खिलाफ अमेरिका-इजराइल की ओर से छेड़े गये युद्ध में दो शब्द प्रमुखता से उभरे हैं-युद्ध की रणनीति का 'मोजैक डिफेंस' मॉडल और नेतृत्व का 'फोर्थ सक्सेसर' मॉडल। इन दोनों ने अब तक युद्ध में ईरानी शासन की कामयाबी को दर्शाया है। दुनिया ने पहली बार यह शब्द एक मार्च को ईरानी विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची की 'एक्स' पोस्ट में सुना था, जब उन्होंने लिखा था, "...विकेंद्रीकृत 'मोज़ेक डिफेंस' हमें यह तय करने में सक्षम बनाता है कि युद्ध कब और कैसे समाप्त होगा।" 

यहां ईरान की रणनीति के दो मुख्य स्तंभ पेश किए गये थे- पहला, अमेरिकी सैन्य कमजोरियों का अवलोकन और उनके अनुसार खुद को ढालना और दूसरा शीर्ष नेतृत्व को निशाना बनाने वाले हमले की स्थिति में लचीलापन और निरंतरता सुनिश्चित करने के लिए अपने 'कमांड एंड कंट्रोल' का पूर्ण विकेंद्रीकरण करना।

अराघची संदर्भित इस विकेंद्रीकृत रक्षा रणनीति, जिसे 'मोजैक डिफेंस' कहा गया है, का उद्देश्य नेतृत्व या 'कमांड-एंड-कंट्रोल' को निशाना बनाने वाले अमेरिकी या इजराइली हमलों के प्रभाव को बेअसर करना और किसी भी बड़े हमले की स्थिति में निरंतरता सुनिश्चित करना है। 

'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' की शुरुआत के बाद से वास्तविक समय में सामने आ रही ईरान की यह रक्षा पद्धति दशकों की तैयारी का परिणाम है। इसे 1980-88 के ईरान-इराक युद्ध के साथ-साथ गृहयुद्ध के दौरान लेबनान पर इजराइली आक्रमण और कब्जे ने और मजबूती दी। इन दोनों घटनाओं ने मौजूदा लड़ाई के प्रति ईरान और उसके प्राथमिक सहयोगी समूह लेबनानी हिज्बुल्लाह के दृष्टिकोण को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी है। 

इसके अलावा यह त्रि-आयामी रक्षा सिद्धांत 2005 में और विकसित हुआ, जब 'इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स' (आईआरजीसी) ने जनरल मोहम्मद जाफरी की देखरेख में अपने 'मोजैक डिफेंस' मॉडल की घोषणा की, जो अनिवार्य रूप से एक विकेंद्रीकृत 'कमांड-एंड-कंट्रोल' प्रणाली है। ईरानी सैन्य संस्कृति के विशेषज्ञ डॉ. माइकल कोनल के विश्लेषण के अनुसार, इस रणनीति के कारण आईआरजीसी के 'कमांड एंड कंट्रोल' ढांचे को 31 अलग-अलग कमानों की शृंखला में पुनर्गठित किया गया। ये कमानें किसी भी आक्रमण की स्थिति में विद्रोह शुरू कर सकती हैं। इससे ईरान की रक्षा व्यवस्था को कमजोर करने का कोई भी प्रयास बेहद कठिन हो जाता है। 

रैंड ऑर्गनाइजेशन की रिपोर्ट के अनुसार, 2003 में इराकी सेना एक ऐसे कमांड ढांचे के कारण पंगु हो गयी थी, जो इराकी तानाशाह सद्दाम हुसैन के इर्द-गिर्द पूरी तरह केंद्रित था। रिपोर्ट के मुताबिक, इसने नियमित इराकी सेना और रिपब्लिकन गार्ड की इकाइयों को एक-दूसरे के साथ समन्वय करने से रोक दिया था, जबकि डिवीजन और कोर स्तर के अधिकारी सद्दाम की मंजूरी के बिना बुनियादी सैन्य गतिविधियां तक नहीं कर सकते थे। 

2010 की यह रिपोर्ट बताती है कि सद्दाम हुसैन के शासन की तेजी से हुई हार ने जाफरी और अन्य ईरानी अधिकारियों को यह एहसास कराया कि उन्हें यह सुनिश्चित करने की ज़रूरत है कि आईआरजीसी और नियमित ईरानी सशस्त्र बल 'अर्तश' बिना किसी हस्तक्षेप के स्वतंत्र रूप से काम कर सकें और उच्च कमान से संपर्क टूटने पर बिखर न जायें। 

रैंड ऑर्गेनाइजेशन के अनुसार, ईरान के 'मोजैक डॉक्ट्रिन' की रूपरेखा पहली बार 2005 में तैयार की गयी थी, जब आईआरजीसी के रणनीतिक अध्ययन केंद्र के निदेशक के रूप में श्री जाफ़री ने 'आयतुल्लाह शासन' के लिए दो गंभीर खतरों की पहचान की थी- "पहला ईरानी एनजीओ और कार्यकर्ताओं के समर्थन से अहिंसक तख्तापलट' कराने का विदेशी प्रयास और दूसरा शासन को उखाड़ फेंकने के लिए अमेरिकी सैन्य हमला।" ईरान ने 2005 में इस सिद्धांत को लागू करना शुरू किया, जिसमें 2007 में  जाफरी को आईआरजीसी का कमांडर-इन-चीफ नियुक्त किये जाने के बाद तेजी आयी। 

'यूएस इंस्टीट्यूट ऑफ पीस' की 2010 की रिपोर्ट भी इसी बात की पुष्टि करती है। सूफ़ान सेंटर की रिपोर्ट के अनुसार, मोजैक डॉक्ट्रिन की रणनीति ने ईरान के भूगोल, ऊबड़-खाबड़ पहाड़ों, विशाल आंतरिक क्षेत्रों और बिखरे हुए जनसंख्या केंद्रों का लाभ उठाने के लिए 'स्तरित और वितरित' रक्षा प्रणाली पर जोर दिया, ताकि बेहतर सैन्य शक्ति वाले आक्रमणकारियों के खिलाफ लंबे समय तक प्रतिरोध किया जा सके। 

इसका मुख्य नवाचार आईआरजीसी को 31 अर्ध-स्वायत्त प्रांतीय कमानों (प्रत्येक प्रांत के लिए एक) की शृंखला में पुनर्गठित करना था। प्रत्येक कमान एक स्वतंत्र इकाई के रूप में कार्य करती है, जिसके पास अपने स्वयं के मुख्यालय, कमांड-एंड-कंट्रोल नोड्स, मिसाइल और ड्रोन भंडार, एकीकृत 'बसीज' अर्धसैनिक स्वयंसेवी बल इकाइयां तेजी से हमला करने वाले नौसैनिक बेड़े, खुफिया संपत्तियां और गोला-बारूद का जखीरा मौजूद है। 

साथ ही आपातकालीन अभियानों के लिए इनके पास पहले से सौंपे गये अधिकार भी होते हैं। वर्ष 2007 में आईआरजीसी की कमान संभालने के बाद श्री जाफरी ने इसके पूर्ण कार्यान्वयन की देखरेख की, जिसके तहत बसीज बलों को आईआरजीसी में एकीकृत किया गया और उनकी ' अपरंपरागत' युद्ध क्षमताओं को बढ़ाया गया। दिवंगत सर्वोच्च नेता खामेनेई से अनुमोदित इस विकेंद्रीकरण ने स्थानीय कमांडरों को वास्तविक समय में केंद्रीय निगरानी के बिना व्यापक उद्देश्यों को पूरा करने के लिए कार्रवाई की पूरी स्वतंत्रता दी। 

रैंड ऑर्गनाइजेशन की रिपोर्ट के अनुसार, 2003 में इराकी सेना एक ऐसे कमांड ढांचे के कारण पंगु हो गयी थी, जो इराकी तानाशाह सद्दाम हुसैन के इर्द-गिर्द पूरी तरह केंद्रित था। रिपोर्ट के मुताबिक, इसने नियमित इराकी सेना और रिपब्लिकन गार्ड की इकाइयों को एक-दूसरे के साथ समन्वय करने से रोक दिया था, जबकि डिवीजन और कोर स्तर के अधिकारी सद्दाम की मंजूरी के बिना बुनियादी सैन्य गतिविधियां तक नहीं कर सकते थे। 

2010 की यह रिपोर्ट बताती है कि सद्दाम हुसैन के शासन की तेजी से हुई हार ने जाफरी और अन्य ईरानी अधिकारियों को यह एहसास कराया कि उन्हें यह सुनिश्चित करने की ज़रूरत है कि आईआरजीसी और नियमित ईरानी सशस्त्र बल 'अर्तश' बिना किसी हस्तक्षेप के स्वतंत्र रूप से काम कर सकें और उच्च कमान से संपर्क टूटने पर बिखर न जायें। 

रैंड ऑर्गेनाइजेशन के अनुसार, ईरान के 'मोजैक डॉक्ट्रिन' की रूपरेखा पहली बार 2005 में तैयार की गयी थी, जब आईआरजीसी के रणनीतिक अध्ययन केंद्र के निदेशक के रूप में श्री जाफ़री ने 'आयतुल्लाह शासन' के लिए दो गंभीर खतरों की पहचान की थी- "पहला ईरानी एनजीओ और कार्यकर्ताओं के समर्थन से अहिंसक तख्तापलट' कराने का विदेशी प्रयास और दूसरा शासन को उखाड़ फेंकने के लिए अमेरिकी सैन्य हमला।" 

ईरान ने 2005 में इस सिद्धांत को लागू करना शुरू किया, जिसमें 2007 में जाफरी को आईआरजीसी का कमांडर-इन-चीफ नियुक्त किये जाने के बाद तेजी आयी। 'यूएस इंस्टीट्यूट ऑफ पीस' की 2010 की रिपोर्ट भी इसी बात की पुष्टि करती है। सूफ़ान सेंटर की रिपोर्ट के अनुसार, मोजैक डॉक्ट्रिन की रणनीति ने ईरान के भूगोल, ऊबड़-खाबड़ पहाड़ों, विशाल आंतरिक क्षेत्रों और बिखरे हुए जनसंख्या केंद्रों का लाभ उठाने के लिए 'स्तरित और वितरित' रक्षा प्रणाली पर जोर दिया, ताकि बेहतर सैन्य शक्ति वाले आक्रमणकारियों के खिलाफ लंबे समय तक प्रतिरोध किया जा सके। 

इसका मुख्य नवाचार आईआरजीसी को 31 अर्ध-स्वायत्त प्रांतीय कमानों (प्रत्येक प्रांत के लिए एक) की शृंखला में पुनर्गठित करना था। प्रत्येक कमान एक स्वतंत्र इकाई के रूप में कार्य करती है, जिसके पास अपने स्वयं के मुख्यालय, कमांड-एंड-कंट्रोल नोड्स, मिसाइल और ड्रोन भंडार, एकीकृत 'बसीज' अर्धसैनिक स्वयंसेवी बल इकाइयां तेजी से हमला करने वाले नौसैनिक बेड़े, खुफिया संपत्तियां और गोला-बारूद का जखीरा मौजूद है। 

साथ ही आपातकालीन अभियानों के लिए इनके पास पहले से सौंपे गये अधिकार भी होते हैं। वर्ष 2007 में आईआरजीसी की कमान संभालने के बाद श्री जाफरी ने इसके पूर्ण कार्यान्वयन की देखरेख की, जिसके तहत बसीज बलों को आईआरजीसी में एकीकृत किया गया और उनकी ' अपरंपरागत' युद्ध क्षमताओं को बढ़ाया गया। दिवंगत सर्वोच्च नेता खामेनेई से अनुमोदित इस विकेंद्रीकरण ने स्थानीय कमांडरों को वास्तविक समय में केंद्रीय निगरानी के बिना व्यापक उद्देश्यों को पूरा करने के लिए कार्रवाई की पूरी स्वतंत्रता दी। 

इस बीच ईरान ने एक स्तरीय नेतृत्व प्रणाली भी विकसित की है, जिसे युद्ध के समय सत्ता के शून्य को रोकने के लिए तैयार किया गया है। यह अवधारणा जिसे कभी-कभी 'फोर्थ सक्सेसर' मॉडल कहा जाता है। यह सुनिश्चित करती है कि यदि किसी संघर्ष में वरिष्ठ हस्तियां मारी जाती हैं, तो नेतृत्व का कई स्तर सत्ता संभालने के लिए तैयार रहे। ईरानी योजनाकारों को लंबे समय से यह अंदेशा रहा है कि अमेरिका या इजराइल जैसे शक्तिशाली विरोधियों के साथ युद्ध में शीर्ष नेताओं को निशाना बनाया जा सकता है। इसमें सर्वोच्च नेता और उत्तराधिकार की श्रेणी में आने वाले शुरुआती कुछ व्यक्ति शामिल हो सकते हैं। 

इस संकट को रोकने के लिए, राज्य ने नेतृत्व का एक गहरा पदानुक्रम बनाये रखा है, ताकि शासन या सैन्य कमान में बाधा डाले बिना सत्ता कई स्तरों तक नीचे जा सके। ईरान की राजनीतिक व्यवस्था के तहत, 'असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स' सर्वोच्च नेता चुनने के लिए जवाबदेह होती है। यदि वर्तमान नेता की मौत हो जाती है या वे अक्षम हो जाते हैं तो अंतरिम नेतृत्व परिषद अस्थायी रूप से उनके कार्यालय की जिम्मेदारियों को निभा सकती है, जब तक कि एक स्थायी उत्तराधिकारी का चयन न हो जाए। 

इस व्यवस्था का एक रूप श्री आयतुल्लाह अली खामेनेई की हत्या के बाद थोड़े समय के लिए देखा गया था। उस अवधि के दौरान, मसूद पेजेशकियान और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों की सदस्यता वाली तीन सदस्यीय परिषद ने नेतृत्व के कर्तव्यों को तब तक संभाला, जब तक कि नये सर्वोच्च नेता की नियुक्ति नहीं हो गयी। 'फोर्थ सक्सेसर' का विचार इसी तंत्र पर आधारित है। यह सुनिश्चित करता है कि यदि सर्वोच्च नेता और उनके तत्काल प्रतिस्थापन खत्म कर दिये जाते हैं तो नेतृत्व समूह के अन्य लोग अधिकार संभालने के लिए तैयार रहें। नेतृत्व की यह स्तरीय प्रणाली यह गारंटी देने के लिए है कि देश, विशेष रूप से उसकी सुरक्षा और सैन्य तंत्र, नेतृत्व को नुकसान पहुंचने के बावजूद काम करना जारी रखे। 

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