भारत के लिए अंतरिक्ष के अगले 20 साल 'सुनहरा दौर', जानें क्या बोले जीओकॉन-2026 में वैज्ञानिक
लखनऊ, अमृत विचार: जलवायु परिवर्तन पर लखनऊ विश्वविद्यालय के भू विज्ञान विभाग में हुई दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी में भौतिक अनुसंधान प्रयोगशाला अहमदाबाद के निदेशक प्रो. अनिल भारद्वाज ने कहा कि आने वाले दो दशक भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण हैं। अंतर विश्वविद्यालय त्वरक केंद्र, नई दिल्ली के निदेशक प्रो. अविनाश चंद्र पांडे ने कहा कि विश्वविद्यालय और संस्थान मिलकर इस महत्वपूर्ण विषय पर निरंतर विचार-विमर्श कर रहे हैं।
संगोष्ठी में 54 विश्वविद्यालयों एवं संस्थानों के प्रतिभागियों ने 215 शोध पत्रों और पोस्टर प्रस्तुत किए। संगोष्ठी में आठ मुख्य व्याख्यान और छह प्लेनरी व्याख्यान भी हुई। इनमें विभिन्न प्रतिष्ठित संस्थानों के विशेषज्ञों ने शोध निष्कर्ष और विचार साझा करते हुए पृथ्वी विज्ञान, पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर प्रकाश डाला।
समापन सत्र में भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण के अपर महानिदेशक राजेंद्र कुमार ने भूवैज्ञानिक मानचित्रण और खनिज अन्वेषण में आधुनिक तकनीकों की उपयोगिता पर बल दिया। बीरबल साहनी पुराविज्ञान संस्थान के निदेशक प्रो. एम. जी. ठक्कर ने अतीत के जलवायु परिवर्तनों को समझकर भविष्य की चुनौतियों के बेहतर प्रबंधन की आवश्यकता बताई। पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय, नई दिल्ली के डॉ. नीलाय खरे ने महासागरीय संसाधनों के सतत दोहन और तटीय पर्यावरण की सुरक्षा को समय की मांग बताया। अंतर विश्वविद्यालय त्वरक केंद्र, नई दिल्ली से आए पंकज कुमार ने पृथ्वी विज्ञान के क्षेत्र में उन्नत प्रयोगशाला उपकरणों और प्रयोगात्मक अनुसंधान के महत्व को साझा किया।
नागालैंड विश्वविद्यालय में विज्ञान संकाय के डीन प्रो. संतोष कुमार सिंह, बीएचयू वाराणसी के प्रो. उमा कांत शुक्ला, केंद्रीय खनन एवं ईंधन अनुसंधान संस्थान, धनबाद के डॉ. अभय कुमार सिंह, प्रो. राज कुमार सिंह (आईआईटी, भुवनेश्वर) , राष्ट्रीय समुद्र विज्ञान संस्थान के निदेशक डॉ. सुनील सिंह, प्रो. अनिल भारद्वाज, प्रो. उमा कांत शुक्ल, प्रो. संतोष कुमार सिंह, प्रो. ध्रुव सेन सिंह, सह-संयोजक डॉ. राजेश सिंह, सह-संयोजक डॉ. मनोज कुमार यादव एवं डॉ. विनीत कुमार ने भी विचार रखे।
छात्रों ने दो पोस्टर प्रस्तुति
जीओकॉन-2026 के पोस्टर सत्र में देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों और अनुसंधान संस्थानों के शोधार्थियों व वैज्ञानिकों द्वारा 65 शोध पत्र पोस्टरों के माध्यम से प्रस्तुत किए गए। पोस्टर प्रस्तुति में शिवेंद्र द्विवेदी प्रथम, विशेष गुप्ता द्वितीय, प्रीति को तृतीय स्थान तथा वैभव सिंह को सांत्वना पुरस्कार मिला।
छोटे प्रयास, बड़ा प्रभाव अभियान की शुरुआत
विभागाध्यक्ष प्रो. ध्रुवसेन सिंह ने बताया कि इस अभियान का मुख्य उद्देश्य जनमानस को छोटे-छोटे प्रयासों के माध्यम से पृथ्वी और पर्यावरण की रक्षा के लिए प्रेरित करना है। इसके अंतर्गत स्वच्छ पर्यावरण, जल व ऊर्जा के संरक्षण, प्राकृतिक संसाधनों के जिम्मेदार उपयोग, हरित गृह गैसों में कमी तथा प्लास्टिक के उपयोग को न्यूनतम करने की अपील की गई।
