निजी संपत्ति में नमाज अदा करने में दखल ना दे बदायूं जिला प्रशासन : हाईकोर्ट

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Published By Deepak Mishra
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प्रयागराज। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने बदायूं के जिला प्रशासन को एक निजी संपत्ति के भीतर स्थित एक मस्जिद में अदा की जा रही नमाज में हस्तक्षेप नहीं करने का निर्देश दिया है। उक्त निर्देश देते हुए न्यायमूर्ति शेखर बी. सराफ और न्यायमूर्ति विवेक शरण की पीठ ने हाल में एक समन्वय पीठ द्वारा व्यक्त इस विचार से सहमति जताई कि एक निजी परिसर में धार्मिक सभा करने के खिलाफ कानून में कोई प्रतिबंध नहीं है।

अदालत ने कहा, "हम समन्वय पीठ के निर्णय से सहमत हैं और प्रतिवादी अधिकारियों को याचिकाकर्ताओं के परिसर के भीतर नमाज अदा किए जाने में किसी भी तरह से हस्तक्षेप नहीं करने का निर्देश देते हैं।" यह आदेश बदायूं के अलिशेर द्वारा दायर एक याचिका पर पारित किया गया।

अलिशेर ने अदालत से यह निर्देश जारी करने की मांग की थी कि उसकी संपत्ति के एक हिस्से में स्थित वक्फ मस्जिद रजा नाम की मस्जिद में उसके, उसके परिजनों और मुस्लिम समुदाय के अन्य सदस्यों द्वारा शांतिपूर्ण तरीके से अदा की जा रही नमाज में अधिकारी किसी तरह का हस्तक्षेप ना करें या कोई अड़चन ना डालें। 

याचिकाकर्ताओं के वकील ने मरांथा फुल गॉस्पेल मिनिस्ट्रीज बनाम उत्तर प्रदेश सरकार के मामले में एक खंडपीठ द्वारा 27 जनवरी को दिए गए निर्णय का हवाला दिया। इस रिट याचिका को निस्तारित करते हुए अदालत ने 25 फरवरी को दिए निर्णय में 27 जनवरी के निर्णय के आधार पर याचिकाकर्ताओं को राहत दी और स्पष्ट किया कि सार्वजनिक मार्ग या सार्वजनिक संपत्ति पर किसी कानून व्यवस्था की स्थिति उत्पन्न होने पर पुलिस कानून के मुताबिक पर्याप्त कार्रवाई कर सकती है।

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