बिजली दरें बढ़ाने के प्रस्ताव पर उपभोक्ताओं का गुस्सा: 51 हजार करोड़ सरप्लस के बावजूद क्यों बढ़ोतरी? प्रबंधन पर लगे एस्मा की मांग

Amrit Vichar Network
Published By Muskan Dixit
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लखनऊ, अमृत विचार: विद्युत नियामक आयोग की सुनवाई में बताया गया कि उपभोक्ताओं का बिजली कंपनियों पर 51 हजार करोड़ रुपए सरप्लस है। ऐसे में बिजली बिल की दरों मे बढ़ोत्तरी का सवाल ही पैदा नहीं होता। उधर प्रीपेड स्मार्ट मीटर रिचार्ज कराने के बाद भी लाखों उपभोक्ताओं को बिजली नहीं मिलने पर मुआवजा दिए जाए। साथ ही बिजली बाधित करने की साजिश का आरोप लगाते हुए विद्युत वितरण निगम के प्रबंधन के खिलाफ एस्मा लगाने की भी मांग की गई।

विद्युत नियामक आयोग की सुनवाई मंगलवार को बरेली के जीआईसी आडीटोरियम में हुई। आयोग के अध्यक्ष अरविंद कुमार और सदस्य संजय कुमार सिंह के समक्ष राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष अवधेश वर्मा और मध्यांचल विद्युत वितरण निगम की प्रबंध निदेशक रिया केजरीवाल आला अफसरों के साथ मौजूद रहीं। मध्यांचल विद्युत वितरण निगम की प्रबंध निदेशक ने विभागों के कार्यों व टैरिफ पर अपना प्रस्तुतीकरण किया गया। उन्होंने बिजली दरें बढ़ाने के पक्ष में तर्क रखे।

उधर राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष ने कहा कि देश में कोई भी कानून बिजली दरों में बढ़ोतरी की इजाजत नहीं देता। बिजली कंपनियां चोर दरवाजे से अपने 12 हजार करोड़ के गैप के आधार पर दरों में बढ़ोतरी चोर दरवाजे चाहती हैं। वह भी तब जब प्रदेश के उपभोक्ताओं का बिजली कंपनियों पर 51000 करोड़ से ज्यादा का सरप्लस है। उन्होंने कहा कि विद्युत वितरण निगम प्रबंधन ने कर्मचारियों की छंटनी कर दी है। जिसके कारण 300 इंडस्ट्री पर एक लाइनमैन ही रह गया है। इससे बिजली सप्लाई को बाधित करने की साजिश है।

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