प्रोजेक्ट अलंकार में अब जरूरत के अनुसार मिलेगा पैसा, जिलाधिकारी की अध्यक्षता में बनाई जाएगी समिति

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Published By Muskan Dixit
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लखनऊ, अमृत विचार: राजकीय माध्यमिक विद्यालयों में मरम्मत और रखरखाव कार्यों को तेज करने के लिए प्रदेश सरकार ने ‘प्रोजेक्ट अलंकार’ की प्रक्रिया में बड़ा बदलाव किया है। अब स्कूलों को पहले की तरह तय भारांक (वेटेज) के आधार पर नहीं, बल्कि उनकी वास्तविक जरूरत के अनुसार धनराशि उपलब्ध कराई जाएगी।

नई व्यवस्था के तहत विद्यालय अब पहले से निर्धारित 35 मानकों के अलावा अपनी अन्य आवश्यक मरम्मत कार्यों को भी प्रस्ताव में शामिल कर सकेंगे। वर्तमान में प्रदेश के 1167 राजकीय माध्यमिक विद्यालय इस योजना से जुड़े हुए हैं। शासनादेश के अनुसार वर्ष 2021 और 2023 में जारी पुराने आदेशों में प्रक्रिया जटिल होने के कारण समय पर प्रस्ताव नहीं मिल पाते थे, जिससे धन आवंटन में देरी होती थी। इस समस्या को दूर करने के लिए अब पुराने आदेशों को निरस्त करते हुए नई सरल व्यवस्था लागू की गई है।

नई प्रक्रिया के तहत किसी भी विद्यालय में मरम्मत की जरूरत का चिन्हांकन सबसे पहले प्रधानाचार्य या प्रधानाध्यापक करेंगे। इसके बाद प्रस्ताव जिला विद्यालय निरीक्षक (डीआईओएस) को भेजा जाएगा। डीआईओएस निर्माण एजेंसी से लागत का एस्टीमेट तैयार कराकर प्रस्ताव को जिला स्तर की समिति के समक्ष प्रस्तुत करेंगे।

प्रस्तावों को स्वीकृति देने के लिए जिलाधिकारी की अध्यक्षता में चार सदस्यीय समिति गठित की जाएगी। इसमें मुख्य विकास अधिकारी उपाध्यक्ष, लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता तकनीकी सदस्य और डीआईओएस सदस्य सचिव होंगे। समिति से मंजूरी मिलने के बाद प्रस्ताव शिक्षा निदेशक (माध्यमिक), प्रयागराज को भेजा जाएगा, जहां से धनराशि जारी की जाएगी। इस संबंध में अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा ने सभी संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश जारी किए हैं।

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