Navratri Special : डोली पर सवार होकर आएंगी माता, इस साल नवरात्र पर 72 वर्ष बाद अमावस्या और प्रतिपदा एक ही दिन 

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Published By Anjali Singh
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सीतापुर। इस बार 72 वर्ष बाद अमावस्या और प्रतिपदा नवरात्र में एक ही दिन पड़ रहे हैं और आता डोली पर सवार होकर आ रही हैंजो प्रकृति, धर्म, आस्था और दान का समन्वय बनाएंगे। इस वर्ष 19 मार्च को सुबह 6:52 से 7:45 तक कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त है। नैमिषारण्य के चक्र तीर्थ के प्रधान पुजारी राजेंद्र प्रसाद पांडे ने बताया कि वर्ष 1954 में अमावस्या और प्रतिपदा एक ही दिन पड़ा था। इस बार भी पहला नवरात्रा पड़ रहा है। 

इसके बाद देश में आर्थिक और राजनीतिक स्थिरता आ गई थी। उन्होंने बताया कि इस विक्रम संवत 2083 में सब शुभ होगा।मां की कृपा से आत्मनिर्भरता बढ़ेगी। इस बार हिंदू नव वर्ष गुरुवार को पड़ रहा है। इसलिए इस साल के राजा देव गुरु बृहस्पति यानी गुरु है। गुरु ज्ञान के दाता है और ज्ञान होने पर सब कुछ जीवन में आसान हो जाता है।

उन्होंने कहा कि ग्रहों के सहयोग से डोली में सवार होकर मां आएंगे और भक्तों की मनोवृत्ति को अंधेरे से प्रकाश की ओर ले जाएगी। उन्होंने कहा कि मां डोली पर सवार होकर जब भी नवरात्रि में आती है ,तो एक मां अपने बच्चों के साथ वात्सल्य भाव रखती है। इस तरह पूरा विश्व भी वात्सल्य भाव में रहता है। मां का वात्सल्य हमेशा बड़ा होता है। 

इससे विकास की गति को एक नयी ऊंचाई और ऊर्जा मिलती है। उन्होंने कहा कि सुबह 11:36 से अपराह्न 12:24 तक अभिजीत मुहूर्त रहेगा । इस वर्ष खरमास के दौरान नवरात्र पड़ रही है. लेकिन देवी पूजा के लिए यह समय दोष मुक्ति माना गया है। पहले खरमास 13 मार्च से लगा है, जो 14 अप्रैल तक चलेगा। भारत वर्ष इस बार विशेष तरक्की करेगा. ऐसी हम सभी की कामना एवं ईश्वर से मन से प्रार्थना है।

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