संपादकीय: सुधार के आसार 

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Published By Monis Khan
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देश में घरेलू और व्यावसायिक इस्तेमाल की गैस आपूर्ति में सुधार का आसार नजर आने लगा है। सरकार की कालाबाजारियों पर कारगुजारी से इसकी किल्लत की अफवाहों के शीघ्र समाप्त होने के संकेत मिलने लगे हैं। 92 हजार सात सौ टन एलपीजी ला रहे दो जहाजों के कल तक गुजरात के कांडला तथा मुंद्रा बंदरगाह पर आ लगने की संभावना के साथ 22 दूसरे जहाज, जो हार्मुज स्ट्रेट के पश्चिमी हिस्से में रुके हैं, जिनमें से छह एलपीजी ला रहे हैं, उन्हें भी शीघ्र वहां से निकलने की उम्मीद ने यह आशा बढ़ा दी है कि निकट भविष्य में घरेलू और कामर्शियल गैस सिलेंडरों की समस्या नहीं आने वाली।

 इसके अलावा कई अन्य जहाज खाड़ी के क्षेत्र में रुके हुए हैं, उन्हें भी सुरक्षित निकालने के लिए जहाजरानी मंत्रालय और सरकार अपने स्तर पर लगी हुई है। इसके अलावा ऊर्जा सुरक्षा के लिए विदेश मंत्रालय अमेरिका, इजरायल और ईरान के साथ निरंतर कूटनीतिक संपर्क के साथ वैकल्पिक स्रोत तथा रास्ते भी देख रही है। 29 राज्यों में वाणिज्यिक गैस आपूर्ति सुचारू होना भी स्थितियों में सकारात्मक प्रगति का संकेत है। इसी के मद्देनजर पेट्रोलियम मंत्रालय ने 75 लाख से बढ़ाकर अचानक 88 लाख प्रतिदिन पहुंच गई सिलिंडर बुकिंग पर लोगों को भरोसा दिलाया है कि देश में पेट्रोल-डीजल का पर्याप्त उत्पादन हो रहा है, आपूर्ति के प्रति आश्वस्त रहें। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से भारतीय ध्वज वाले दो जहाजों की सुरक्षित निकासी केवल एक समुद्री घटना नहीं, बल्कि भारत की सक्रिय कूटनीति और ऊर्जा सुरक्षा नीति का महत्वपूर्ण संकेत है। 

यह संकेत देता है कि भारत ने क्षेत्रीय शक्तियों, विशेषकर ईरान और खाड़ी देशों के साथ संवाद की ऐसी संतुलित नीति अपनाई है, जिससे संकट की स्थिति में भी भारतीय हितों की रक्षा संभव हो पाती है। हालिया घटनाक्रम से घरेलू और वाणिज्यिक गैस संकट के तत्काल दबाव में कुछ राहत के संकेत अवश्य मिले हैं, लेकिन यदि क्षेत्रीय संघर्ष लंबा खिंचता है, तो स्थिति फिर से अस्थिर हो सकती है। ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता अक्सर कीमतों में तेज वृद्धि, आपूर्ति में देरी और घरेलू स्तर पर कालाबाजारी जैसी समस्याओं को जन्म देती है। यह मान लेना जल्दबाज़ी होगी कि ईरान शेष भारतीय जहाजों को भी स्वतः निर्बाध मार्ग प्रदान कर देगा। होर्मुज का समुद्री मार्ग वैश्विक भू-राजनीति से गहराई से जुड़ा है और वहां की परिस्थितियां तेजी से बदलती रहती हैं, इसलिए भारत को निरंतर कूटनीतिक संवाद बनाए रखना होगा। 

यह घटनाक्रम उस समय सामने आया है जब क्षेत्र में तनाव बढ़ा हुआ है और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला पर इसका असर पड़ने की आशंका बनी हुई है। स्पष्ट है कि होर्मुज से जहाजों की सुरक्षित निकासी तत्काल राहत का संकेत अवश्य है, लेकिन यह ऊर्जा सुरक्षा की बड़ी चुनौती का स्थायी समाधान नहीं। भारत को अपनी कूटनीति, ऊर्जा नीति और समुद्री क्षमता तीनों को समान रूप से मजबूत करना होगा, साथ ही घरेलू स्तर पर वितरण प्रणाली की निगरानी और डिजिटल ट्रैकिंग को सुदृढ़ करना भी आवश्यक है, तभी कालाबाजारी और जमाखोरी को रोका जा सकेगा और भविष्य में ऐसे संकटों का सामना अधिक आत्मविश्वास से किया जा सकेगा।