आज से चैत्र नवरात्र का शुभारंभ : मां के आगमन से भक्तिमय हुए मंदिर, हिन्दू नववर्ष पर जन भवन में सांस्कृतिक कार्यक्रम
लखनऊ, अमृत विचारः चैत्र नवरात्र का शुभारंभ गुरुवार 19 मार्च से होगा। पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा की जाएगी। घटस्थापना से लेकर दर्शन-पूजन के लिए घरों से लेकर मंदिरों तक तैयारी की गई है। शहर में चौथ स्थित कालीजी, कालीबाड़ी मंदिर, संदोहन माता मंदिर, शास्त्रीनगर के दुर्गा मंदिर और कठवारा के चंद्रिकादेवी मंदिर को रंग-बिरंगी लाइटों, फूलों और धार्मिक झांकियों से विशेष सजावट की गई है। प्रमुख मंदिरों के आसपास बैरिकेडिंग लगाने के साथ पुलिस ने सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए हैं। सीसीटीवी कैमरों से भी नजर रखी जाएगी। दर्शन के लिए महिला और पुरुष अलग-अलग कतारों में लगेंगे।
पूजन और व्रत की सामग्री खरीदने के लिए बुधवार को बाजारों में भीड़ रही। घट के अलावा धूपबत्ती, कपूर, घी, लौंग, हवन सामग्री, नारियल, कलश, आम के पत्ते, चुनरी, चूड़ियां और फूल माला की खरीदारी की गई। मांग बढ़ने से फल और फूलों की कीमतों में उछाल देखा गया। सेब 120 रुपये से बढ़कर 150 रुपये प्रति किलो और केला 50 रुपये दर्जन से 70 रुपये दर्जन तक पहुंच गया है।
विशेष धार्मिक आयोजन और कार्यक्रम
शास्त्रीनगर स्थित दुर्गा मंदिर शास्त्रीनगर में इस बार नवरात्र के दौरान पांच विशेष सूत्रों पर कार्य किया जा रहा है। इसमें जम्मू की ज्वालादेवी मंदिर से ज्योति लाकर श्रद्धालुओं को तिलक करने की योजना है। साथ ही हिंदू नववर्ष 2083 के अवसर पर ध्वजा वितरण भी किया जाएगा। नौ दिनों तक भजन, पूजा और माता के अलग-अलग श्रृंगार किए जाएंगे। 27 मार्च को भगवान राम का प्रकटोत्सव मनाया जाएगा और विश्व शांति के लिए विशेष यज्ञ आयोजित किया जाएगा, जिसमें ईरान और अमेरिका सहित वैश्विक संघर्षों की शांति की कामना की जाएगी।
मां शैलपुत्री की पूजा का महत्व
ज्योतिषाचार्य एसएस नागपाल ने बताया कि नवरात्र के प्रथम दिन मां शैलपुत्री की पूजा की जाती है। ये मां दुर्गा के नौ रूपों में प्रथम हैं और हिमालय की पुत्री होने के कारण इन्हें शैलपुत्री कहा जाता है। इनका वाहन वृषभ है और ये त्रिशूल तथा कमल धारण करती हैं। घटस्थापना के बाद मां शैलपुत्री की पूजा का विशेष महत्व होता है। उन्हें घी या दूध से बनी खीर का भोग लगाया जाता है। ॐ देवी शैलपुत्र्यै नमः मंत्र का जाप करने से जीवन में स्थिरता, शक्ति और सुख-शांति आती है। पौराणिक मान्यता के अनुसार, वे पूर्व जन्म में सती थीं।
दुर्गा सप्तशती और नवार्ण मंत्र का महत्व
नवरात्र में दुर्गा सप्तशती का पाठ अत्यंत फलदायी माना जाता है। इसके विभिन्न अध्यायों का पाठ अलग-अलग उद्देश्यों की पूर्ति के लिए किया जाता है जैसे चिंता दूर करने, शत्रु पर विजय, संतान प्राप्ति और मान-सम्मान बढ़ाने के लिए। नवार्ण मंत्र की साधना और नौ दिनों तक अलग-अलग नैवेद्य अर्पित करने की परंपरा भी प्रचलित है। प्रत्येक दिन विशेष भोग चढ़ाने से स्वास्थ्य, दीर्घायु, बुद्धि, सौभाग्य और समृद्धि की प्राप्ति होती है।
दुर्गा सप्तशती के अध्याय के पाठ से कामनापूर्ति
प्रथम अध्याय- हर प्रकार की चिन्ता मिटाने के लिए, द्धितीय अध्याय- मुकदमें झगड़ो में विजय के लिए, तृतीय अध्याय- शत्रु से छुटकारें के लिए, चतुर्थ अध्याय- भक्ति शक्ति तथा दर्शन के लिए, पचंम अध्याय- भक्ति शक्ति तथा दर्शन के लिए, षष्ठ अध्याय- डर, शक, बाधा दूर करने के लिए, सप्तम अध्याय- हर कामनापूर्ति के लिए, अष्ठम अध्याय- मिलाप व वशीकरण के लिए, नवम अध्याय- गुमशुदा की तलाश, दशम अध्याय- कामना व संतान प्राप्ति के लिए, एकादश अध्याय- व्यापार, सुख संपत्ति की प्राप्ति के लिए, द्वादश अध्याय- मान-सम्मान लाभ प्राप्ति के लिए, त्रयोदश अध्याय- शक्ति प्राप्ति के लिए।
राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने कहा कि गुरुवार से शुरू हो रहे हिन्दू नव वर्ष के मौके पर लोग कुसंगति एवं दुष्प्रवृत्तियों का त्याग करने का लें संकल्प लें। ग्रह-नक्षत्रों की गणना के आधार पर ही हमारे त्योहार निर्धारित होते हैं। देश के विभिन्न राज्यों में हिंदू नव वर्ष अलग-अलग परंपराओं के साथ मनाया जाता है, किंतु इसके मूल में वैज्ञानिक दृष्टिकोण निहित है।
राज्यपाल बुधवार को जन भवन में हिन्दू नव वर्ष की पूर्व संध्या पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रही थीं। उन्होंने विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों में हिंदू नव वर्ष के वैज्ञानिक आधार जैसे विक्रम संवत एवं पंचांग की गणना के विषय में विद्यार्थियों को जानकारी दिए जाने पर बल दिया। विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने कहा कि जिसे हम वर्ष 2026 के रूप में जानते हैं, हिंदू नव वर्ष के अनुसार वह वर्ष 2083 का प्रारंभ है।
हमारे जीवन में सहकार, सेवा की भावना तथा धर्म की जय, अधर्म का विनाश जैसे आदर्श सदैव मार्गदर्शक रहे हैं। इस दौरान एक सांस्कृतिक कार्यक्रम का भी आयोजन किया गया। इस दौरान जन भवन कार्मिकों के बच्चों ने देश के विभिन्न राज्यों की पारंपरिक वेशभूषा में सुसज्जित होकर सांस्कृतिक नृत्य प्रस्तुत किए। इस अवसर पर विशेष कार्याधिकारी डॉ. सुधीर महादेव बोबडे, विशेष सचिव श्रीप्रकाश गुप्ता, विशेष कार्याधिकारी शिक्षा डॉ. पंकज एल. जानी आदि मौजूद रहे।
