योगी मंत्रिमंडल में जल्द होगा फेरबदल, नए चेहरों की एंट्री तय... कोर कमेटी की बैठक में नामों पर मंथन

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Published By Muskan Dixit
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सीमित बदलाव से साधे जाएंगे समीकरण, पश्चिम, ब्राह्मण और अनुसूचित वर्ग को मिलेगा प्रतिनिधित्व

लखनऊ, अमृत विचार: प्रदेश की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आवास पर हुई भाजपा कोर कमेटी की लंबी बैठक के बाद मंत्रिमंडल विस्तार और आंशिक फेरबदल के संकेत स्पष्ट हो गए हैं। सूत्रों के अनुसार, एक-दो मौजूदा मंत्रियों को हटाकर नए चेहरों को शामिल करने पर सहमति बनी है, जबकि जातीय और क्षेत्रीय संतुलन को बिना छेड़े बदलाव किए जाएंगे।

बैठक में आरएसएस के राष्ट्रीय सह सरकार्यवाह अरुण कुमार, प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी, संगठन महामंत्री धर्मपाल सिंह और दोनों उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य व ब्रजेश पाठक मौजूद रहे। इसमें हाल में हुई क्षेत्रीय समन्वय बैठकों के फीडबैक के साथ संगठन और सरकार के बीच तालमेल, प्रतिनिधित्व और आगामी चुनावी रणनीति पर विस्तार से चर्चा हुई। माना जा रहा है कि मंत्रिमंडल में एक ब्राह्मण और एक अनुसूचित वर्ग के चेहरे को जगह मिल सकती है। साथ ही पश्चिमी उत्तर प्रदेश और कानपुर क्षेत्र का प्रतिनिधित्व बढ़ाने पर जोर है। पार्टी सवर्ण, ओबीसी और दलित वर्गों के बीच संतुलन साधते हुए ‘संदेशात्मक विस्तार’ की रणनीति पर काम कर रही है।

वर्तमान में मंत्रिपरिषद में 54 सदस्य हैं, जबकि अधिकतम संख्या 60 तक हो सकती है। ऐसे में 5-6 नए चेहरों की एंट्री की संभावना जताई जा रही है। कुछ मौजूदा मंत्रियों को संगठन या अन्य जिम्मेदारियां भी दी जा सकती हैं। संगठन स्तर पर भी तेजी दिखाई दे रही है। प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी पहले ही संकेत दे चुके हैं कि मार्च तक निगम, बोर्ड और आयोगों के रिक्त पद भरे जाएंगे। इसे 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियों से जोड़कर देखा जा रहा है।

23 मार्च को कैबिनेट बैठक, पेंशन बढ़ोतरी पर फैसला संभव

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में 23 मार्च को लोकभवन में कैबिनेट बैठक होगी। इसमें सामाजिक पेंशन बढ़ाने का प्रस्ताव आ सकता है। वर्तमान में 1.06 करोड़ लाभार्थियों को 1000 रुपये मासिक पेंशन मिलती है, जिसे बढ़ाकर 1500 रुपये करने की तैयारी है। इसके साथ ही गेहूं खरीद नीति (25 मार्च से 15 जून) को मंजूरी मिल सकती है, जिसमें 2585 रुपये प्रति क्विंटल एमएसपी तय है। नए वित्तीय वर्ष की योजनाओं पर भी कैबिनेट में अहम फैसले संभव हैं।

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