चुनाव से पहले संगठन को धार देने में जुटी भाजपा, नए चेहरों और जातीय संतुलन पर फोकस, 17 जिलों में अभी फंसा पेंच

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Published By Muskan Dixit
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मार्च तक सभी जिला इकाइयों के गठन का लक्ष्य, कई जगह मतभेद बने बाधा

लखनऊ, अमृत विचार: पंचायत और विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा संगठन को मजबूत करने में जुटी है और जिला इकाइयों के गठन को लेकर तेजी से मंथन चल रहा है। पार्टी नए चेहरों को अवसर देने के साथ जातीय समीकरण साधने पर विशेष ध्यान दे रही है, लेकिन कई जिलों में मतभेदों के कारण अंतिम सहमति बनने में देरी हो रही है।

प्रदेश मुख्यालय पर पिछले दो दिनों में विभिन्न क्षेत्रों की जिला टीमों को लेकर व्यापक चर्चा हुई। शनिवार को कानपुर और काशी क्षेत्र, जबकि रविवार को अवध क्षेत्र के जिलों पर विचार-विमर्श किया गया। अब तक पांच क्षेत्रों के 82 संगठनात्मक जिलों पर चर्चा पूरी हो चुकी है, लेकिन 17 जिलों में अभी भी पेंच फंसा हुआ है।

सूत्रों के अनुसार, जिन जिलों में नए जिलाध्यक्ष बनाए जाने हैं, वहां संगठन और जनप्रतिनिधियों के बीच मतभेद सामने आए हैं। पश्चिम क्षेत्र में बागपत, मेरठ, मुरादाबाद और अमरोहा, जबकि ब्रज क्षेत्र में अलीगढ़, आगरा, शाहजहांपुर, हाथरस और मैनपुरी में सहमति नहीं बन सकी है। काशी क्षेत्र में जौनपुर, वाराणसी महानगर, वाराणसी जिला और चंदौली, वहीं अवध क्षेत्र में अंबेडकरनगर, रायबरेली और लखीमपुर में भी प्रक्रिया अटकी हुई है।

हालांकि कानपुर क्षेत्र के सभी 17 जिलों में सहमति बन चुकी है। पार्टी पदाधिकारियों का कहना है कि मार्च के भीतर सभी जिला इकाइयों का गठन कर लिया जाएगा, ताकि संगठन चुनावी मोड में पूरी तरह सक्रिय हो सके। भाजपा नेतृत्व का मानना है कि मजबूत जिला संगठन ही विधानसभा स्तर तक चुनावी जमीन तैयार करेगा और पार्टी के अभियानों को प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाएगा।

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