ईरान-इजरायल युद्ध से होर्मुज स्ट्रेट तक... संसद में पीएम मोदी के भाषण की 5 जरूरी बातें, जानें क्या-क्या खास

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Published By Muskan Dixit
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नई दिल्ली: ईरान-अमेरिका-इजरायल युद्ध के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदीने सोमवार, 23 मार्च 2026 को लोकसभा में महत्वपूर्ण संबोधन दिया। उन्होंने पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव, होर्मुज जलडमरूमध्य की रुकावट और भारत पर पड़ने वाले इसके प्रभावों पर विस्तार से बात की। पीएम मोदी ने जोर दिया कि भारत युद्ध को रोकने और शांति के लिए कूटनीति पर जोर दे रहा है, साथ ही देश की ऊर्जा सुरक्षा और नागरिकों की सुरक्षा को प्राथमिकता दे रहा है।

यह भाषण वैश्विक संकट के बीच भारत की मजबूत स्थिति और तैयारियों को रेखांकित करता है। आइए जानते हैं उनके संबोधन की 5 सबसे अहम बातें क्या हैं।

1. पश्चिम एशिया में स्थिति चिंताजनक, लेकिन भारत सतर्क 

पीएम मोदी ने कहा कि पश्चिम एशिया (वेस्ट एशिया) में जारी युद्ध "चिंताजनक" और "अलार्मिंग" है। यह वैश्विक अर्थव्यवस्था, व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति पर गहरा असर डाल रहा है। भारत लगातार स्थिति पर नजर रखे हुए है और कूटनीति के जरिए तनाव कम करने व संघर्ष खत्म करने के प्रयास कर रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि व्यावसायिक जहाजों पर हमले और होर्मुज जैसे अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों में रुकावट "अस्वीकार्य" है।

2. होर्मुज स्ट्रेट की रुकावट से ऊर्जा संकट, लेकिन भारत तैयार 

प्रधानमंत्री ने होर्मुज जलडमरूमध्य का विशेष जिक्र किया, जहां से दुनिया का बड़ा हिस्सा तेल-गैस गुजरता है। युद्ध के कारण जहाजों की आवाजाही चुनौतीपूर्ण हो गई है, जिससे भारत में पेट्रोल, डीजल, एलपीजी और उर्वरकों की सप्लाई प्रभावित हो सकती है। लेकिन पिछले 11 सालों में सरकार ने ऊर्जा आयात को 27 से बढ़ाकर 41 देशों तक विविधीकृत किया है, स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व को 5.3 मिलियन मीट्रिक टन से ज्यादा बढ़ाया है (और 6.5 मिलियन तक विस्तार की योजना है)। इससे घरेलू उपभोक्ताओं को कोई बड़ी दिक्कत नहीं हो रही।

3. विदेशों में भारतीयों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता 

पीएम ने कहा कि खाड़ी देशों में रहने वाले लगभग 1 करोड़ भारतीयों की सुरक्षा सरकार की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। युद्ध शुरू होने के बाद 3.75 लाख से ज्यादा भारतीय सुरक्षित स्वदेश लौट चुके हैं (जिनमें ईरान से 1,000 से ज्यादा, ज्यादातर मेडिकल छात्र शामिल हैं)। भारतीय मिशन निरंतर संपर्क में हैं और जरूरत पड़ने पर विशेष निकासी अभियान चलाए जा सकते हैं। सीबीएसई ने खाड़ी में परीक्षाएं स्थगित/रद्द कर वैकल्पिक मूल्यांकन की व्यवस्था की है।

4. किसानों और आम नागरिकों के लिए संवेदनशीलता 

युद्ध के असर से उर्वरक और ईंधन की कीमतों पर संभावित प्रभाव को देखते हुए सरकार किसानों की मदद के लिए प्रतिबद्ध है। MSP बढ़ाने, सिंचाई सुविधाओं में सुधार और नई तकनीकों को बढ़ावा देने पर फोकस है। साथ ही, एलपीजी (जिसकी 60% जरूरत आयात पर निर्भर है) की घरेलू उत्पादन बढ़ाने और आम उपभोक्ताओं को प्राथमिकता देने के कदम उठाए जा रहे हैं। पीएम ने कहा, "सरकार संवेदनशील, सतर्क और हर सहायता के लिए तत्पर है।"

5. भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत, दुनिया में अनिश्चितता के बावजूद स्थिर 

वैश्विक संकट के बीच भारत की अर्थव्यवस्था स्थिर बनी हुई है। सरकार निवेश बढ़ाने, रोजगार सृजन और विकास को गति देने पर फोकस कर रही है। पीएम ने संसद से अपील की कि इस संकट पर "एक स्वर" में संदेश जाए, ताकि दुनिया को भारत की एकजुटता दिखे।

पीएम मोदी का यह संबोधन न सिर्फ भारत की ऊर्जा और सुरक्षा रणनीति को उजागर करता है, बल्कि वैश्विक शांति के लिए भारत की सक्रिय भूमिका को भी रेखांकित करता है। सरकार ने पहले ही कैबिनेट कमिटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) की बैठक कर लंबे और छोटे समय के उपायों की समीक्षा की है।

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