किसानों की मदद करती रहेगी सरकार... पश्चिम एशिया संकट के बीच संसद में बोले PM मोदी- आपात स्थिति से निपटने के लिए खाद की पर्याप्त व्यवस्था
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पश्चिम एशिया में युद्ध से आपूर्ति श्रृंखलाओं के समक्ष गहराते संकट के बीच सोमवार को देश के किसानों को भरोसा दिया कि सरकार कोरोना काल की तरह इस संकट में भी उनकी मदद करती रहेगी। प्रधानमंत्री ने जनता को यह भी भरोसा दिया है कि देश में अन्न का पूरा भंडार है और इसकी कमी नहीं होगी। वह ईरान युद्धके चलते पश्चिम एशिया संकट के असर पर लोक सभा में स्वत: वक्तव्य दे रहे थे।
पीएम मोदी ने कहा, "मैं इस सदन के माध्यम से देश के किसानों को विश्वास दिलाता हूं कि सरकार किसानों की हर संभव मदद करती रहेगी।" उन्होंने देश के हर वर्ग से इस गंभीर समय में चुनौतियों का मुकाबला मिल कर करने का आह्वान किया। मोदी ने अपने लम्बे वक्तव्य में खेती, उर्वरकों की आपूर्ति और किसानों पर असर के बारे में विस्तार से उल्लेख किया और कहा, 'एक बड़ा सवाल यह है कि युद्ध का खेती पर क्या प्रभाव होगा? देश के किसानों ने हमारे अन्न के भंडार भर रखे हैं, इसलिए भारत के पास पर्याप्त खाद्यान्न है। हमारा ये भी प्रयास है कि खरीफ सीजन की ठीक से बुआई हो सके। सरकार ने बीते सालों में आपात स्थिति से निपटने के लिए खाद की पर्याप्त व्यवस्था भी की है।"
प्रधानमंत्री ने कोराना काल और विभिन्न भू राजनीतिक संकटों की ओर संकेत करते हुए कहा कि विगत में भी उनकी सरकार ने दुनिया के संकटों का बोझ किसानों पर नहीं पड़ने दिया था। कोरोना और बाद के घटनाक्रम के दौरान वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाएं भंग हो गयी थी और दुनिया के बाजार में यूरिया की एक बोरी 3000 रूपये तक पहुंच गई।
उन्होंने कहा कि उस समय भी भारत में किसानों को यूरिया की वही बोरी 300 रूपये से भी कम कीमत पर उपलब्ध कराई गई। प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले एक दशक में देश में छह यूरिया प्लांट शुरू किए गए हैं, इससे सालाना 76 लाख टन से अधिक की यूरिया उत्पादन की क्षमता जुड़ी है। इसी दौरान डाई अमोनिया फास्फेट (डीएपी) और पोटैशियम (एनपीकेएस) जैसी खाद का घरेलू उत्पादन भी करीब 50 लाख टन बढ़ाया गया है।
उन्होंने कहा, 'इतना ही नहीं तेल और गैस की तरह खाद के आयात को भी डायवर्सिफाई किया गया है। ऐसे ही डीएपी और एनपीकेएस के आयात के लिए भी, हमने अपने विकल्पों को विस्तार किया है।" उन्होंने कहा कि किसानों को देश में विनिर्मित नैनो यूरिया के प्रयोग का विकल्प दिया गया है और उन्हें प्राकृतिक खेती के लिए भी प्रोत्साहित किया जा रहा है। पीएम कुसुम योजना के तहत किसानों को 22 लाख से ज्यादा सोलर पंप दिए गए हैं, इससे भी डीजल पर उनकी निर्भरता कम हुई है।
प्रधानमंत्री ने कहा , 'युद्ध की एक बहुत बड़ी चुनौती ये भी है कि भारत में गर्मी का मौसम शुरू हो रहा है। आने वाले समय में बढ़ती गर्मी के साथ बिजली की मांग भी बढ़ती जाएगी। फिलहाल देश के सभी पावर प्लांट्स के पर्याप्त कोयला स्टॉक्स उपलब्ध हैं।" उन्होंने कहा कि भारत में लगातार दूसरे साल 100 करोड़ टन कोयला उत्पादन करने का रिकॉर्ड बनाया गया है।बिजली उत्पादन से आपूर्ति तक के हमारे सभी सिस्टम की निरंतर निगरानी भी की जा रही है, और सरकार की तैयारियां को नवीकरणीय ऊर्जा से भी मदद मिली है।
बीते दशक में नवीकरणीय ऊर्जा की तरफ देश ने बड़े कदम उठाए हैं। ये सारे प्रयास आज देश के बहुत काम आ रहे हैं। उन्होंने कहा, ' हमारी कुल स्थापित विद्युत उत्पादन क्षमता का आधा हिस्सा नवीकरणीय स्रोत से आता है। हमारी कुल नवीकरणीय क्षमता आज 250 गीगावॉट (2.5 लाख मेगावाट) के ऐतिहासिक आंकड़े को पार कर गई है। बीते 11 वर्षों में देश ने अपनी सौर ऊर्जा क्षमता करीब तीन गीगावाट से बढ़कर 140 गीगा वाट (1.4 लाख मेगावाट ) तक पहुंचाइ है।
बीते वर्षों में देश में करीब 40 लाख रूफटॉप सोलर लगे हैं, इसमें पीएम सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना से भी लोगों को काफी मदद मिली है। गोबरधन योजना के तहत देश में आज 200 कंप्रेस बायोगैस प्लांट भी काम करना शुरू कर चुके हैं। सरकार ने भविष्य की तैयारी और बढ़ते हुए शांति अधिनियम माध्यम से देश में परमाणु ऊर्जा उत्पादन को भी प्रोत्साहित किया है। प्रधानमंत्री ने कहा कि कुछ ही दिन पहले लघु जल विद्युत विकास योजना को भी हरी झंडी दी गई है, जिससे आने वाले वर्षों में 1500 मेगावाट नई जल विद्युत क्षमता जोड़ी जाएगी।
