यूपी में ‘री-यूज वाटर’ नीति लागू, योगी कैबिनेट ने दी मंजूरी, क्या है 'Re-Used Water' नीति ?

Amrit Vichar Network
Published By Deepak Mishra
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लखनऊ, अमृत विचार: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में प्रदेश सरकार ने सेफ री-यूज ट्रीटेड वाटर पॉलिसी को मंजूरी देते हुए जल प्रबंधन के क्षेत्र में बड़ा कदम उठाया है। इस नीति के तहत अब घरों और उद्योगों से निकलने वाले अपशिष्ट जल को शोधन (ट्रीटमेंट) के बाद दोबारा उपयोग में लाया जाएगा, जिससे पेयजल संसाधनों पर बढ़ते दबाव को कम किया जा सके।

प्रदेश में सिंचाई, घरेलू, औद्योगिक और ऊर्जा क्षेत्रों में पानी की मांग लगातार बढ़ रही है। इसे देखते हुए सरकार ने सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) और फीकल स्लज ट्रीटमेंट प्लांट (एफएसटीपी) के माध्यम से शोधित जल के सुरक्षित उपयोग को बढ़ावा देने की योजना बनाई है। नीति के तहत पहले चरण में नगर निकायों के कार्य, निर्माण गतिविधियों, बागवानी और सिंचाई में इस पानी का उपयोग किया जाएगा। 

दूसरे चरण में इसे उद्योग, कृषि और रेलवे जैसे क्षेत्रों तक विस्तारित किया जाएगा। वहीं तीसरे चरण में ड्यूल पाइप सिस्टम के जरिए घरों तक गैर-पीने योग्य पानी की अलग आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी। सरकार का मानना है कि इस पहल से न केवल स्वच्छ पेयजल की बचत होगी, बल्कि नदियों और जलाशयों में प्रदूषण भी कम होगा। 

साथ ही जल संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा और ऊर्जा की खपत में भी कमी आएगी। विशेषज्ञों के अनुसार, यह नीति शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में सतत जल प्रबंधन (सस्टेनेबल वाटर मैनेजमेंट) की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो भविष्य में जल संकट से निपटने में मददगार साबित होगी।

क्या है ‘री-यूज वाटर’ नीति

• अपशिष्ट जल को ट्रीट कर दोबारा उपयोग
• एसटीपी और एफएसटीपी के जरिए शोधन
• निर्माण, बागवानी और सिंचाई में उपयोग
• उद्योग और रेलवे तक विस्तार
• ड्यूल पाइप सिस्टम से घरों में अलग सप्लाई
• पेयजल की बचत और प्रदूषण में कमी
• जल संरक्षण और ऊर्जा बचत को बढ़ावा

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