Bareilly : 1000 वर्ष बाद सोमनाथ ज्योतिर्लिंग के पावन अवशेष 6 अप्रैल को बरेली पहुंचेंगे
बरेली, अमृत विचार। नाथ नगरी बरेली 6 अप्रैल को एक ऐतिहासिक और आध्यात्मिक क्षण की साक्षी बनने जा रही है। देशव्यापी यात्रा के अंतर्गत सोमनाथ ज्योतिर्लिंग के 1000 वर्षों तक संरक्षित रहे पावन अवशेष बरेली पहुंचेंगे। यह आयोजन केवल धार्मिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि भारतीय सांस्कृतिक अस्मिता और आध्यात्मिक चेतना के पुनर्जागरण का प्रतीक माना जा रहा है। बरेली में भक्तों के दर्शनार्थ इन अवशेषों को बाबा त्रिवटीनाथ मंदिर में एक कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा।
जनवरी 2025 में परंपरा के अंतिम संरक्षक सीतारामन शास्त्री ने ये पवित्र अवशेष बेंगलुरु स्थित आर्ट ऑफ लिविंग आश्रम में आध्यात्मिक गुरू श्री श्री रविशंकर को सौंपे थे। इसके बाद महाशिवरात्रि 2025 पर इनका सार्वजनिक अनावरण किया गया, फिर इन अवशेषों की देशव्यापी यात्रा प्रारंभ हुई। यह यात्रा पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़, हिमाचल प्रदेश, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, केरल और तमिलनाडु से होते हुए उत्तर प्रदेश में 30 मार्च को प्रवेश कर रही है।
उत्तर प्रदेश में प्रवेश के बाद यात्रा झांसी, कानपुर, आगरा, मथुरा, वृंदावन, मेरठ, गजरौला, मुरादाबाद, प्रयागराज और वाराणसी जैसे प्रमुख शहरों से गुजरते हुए 6 अप्रैल को बरेली पहुंचेगी। इतिहास के अनुसार वर्ष 1026 ईस्वी में आक्रमण कारी महमूद गजनबी ने सोमनाथ मंदिर को ध्वस्त कर दिया था, लेकिन आस्था की ज्योति निरंतर प्रज्वलित रही।
मंदिर के कुछ पवित्र अवशेषों को अग्निहोत्री पुजारियों ने गुप्त रूप से सहेज लिया, जो पीढ़ी दर पीढ़ी संरक्षित होते रहे। सन 1924 में कांची के शंकराचार्य ने यह भविष्यवाणी की थी कि इन अवशेषों को एक शताब्दी तक सुरक्षित रखा जाए और उपयुक्त समय आने पर एक योग्य आध्यात्मिक नेतृत्व को सौंपा जाए। इसी क्रम में जनवरी 2025 में परंपरा के अंतिम संरक्षक सीतारामन शास्त्री ने इन अवशेषों को गुरुदेव श्री श्री रविशंकर को समर्पित किया गया था। इससे 100 वर्षों पुरानी भविष्यवाणी पूर्ण हुई।
बता दें कि श्री श्री रविशंकर, आर्ट ऑफ लिविंग संस्था के संस्थापक है और लम्बे समय से भारतीय आध्यात्मिक विरासत को वैश्विक मंच पर प्रतिष्ठित करने का कार्य कर रहे हैं। सोमनाथ ज्योतिर्लिंग के पावन अवशेषों का आगमन न केवल शहर के धार्मिक महत्व को बढ़ाएगा, बल्कि इसे राष्ट्रीय स्तर पर भी एक विशेष स्थान दिलाएगा।
यह आयोजन श्रद्धा, धैर्य और सांस्कृतिक चेतना की विजय का प्रतीक है, जहां 1000 वर्षों का संरक्षण, 100 वर्षों की प्रतीक्षा और वर्तमान का पुनरुत्थान एक साथ परिलक्षित होता है। यह जानकारी आर्ट ऑफ लिविंग बरेली चैप्टर के पदाधिकारियों ने सोमवार काे प्रेसवार्ता में दी। इस दौरान श्वेता कुनार, पार्थो कुनार, गोपाल, सौरभ, मोहित, संदीप, अमित, अशोक, राजेश व रीना आदि उपस्थित रहीं।
