Satire: स्मार्टफोन ने डॉक्टरों के चैंबर भर दिए! “डाटा और आटा” के इस युग में सबसे ज्यादा फायदा किसे हो रहा है?
लखनऊः जैसे साधू-संत पहाड़ों पर बैठकर हाथ में माला लेकर तपस्या में लीन रहते थे। वैसे ही अब हर कोई हाथ में स्मार्ट फोन लेकर सोशल मीडिया की दुनिया में लीन है। कोई रील देख रहा है, तो कोई वाट्सऐप यूनिवर्सिटी की पढ़ाई कर रहा है। फेसबुक, इंस्टाग्राम की आभासी दुनिया में खोए लोग अस्ल जिंदगी को भूल गए हैं।
नब्बे फीसद लोगों के लिए ये सब घातक है, तो दस फीसद पेशेवर लोग समाज की इस विकृत धारा का लाभ भी उठा रहे हैं। स्मार्ट फोन बनाने वाले, टेलीकॉम कंपनियां, फेसबुक, इंस्टाग्राम, वाट्सएप के मालिक खुश हैं, तो इंटरनेट/डाटा का बाजार भी खूब झूम रहा है।
आम इंसान की जिंदगी जीने की दो जरूरतें पूरी हो रही हैं- डाटा और आटा-गरीब से गरीब को आटा फ्री में मयस्सर हो रहा है और तीन-चार सौ रुपये महीना डाटा का इंतजाम भी कहीं न कहीं से तो हो ही जाता है। कुछ नहीं तो चुनावी मौसम में शुरू हुई आर्थिक सहायता की रेवड़ी ही डाटा का मामूली खर्च पूरा कर देती है।
डाटा और आटा से पर्याप्त आनंदमय जिंदगी जीने के दौर में डाटा/स्मार्टफोन की लत से नुकसान की बात कर मूड खराब करने की गुस्ताखी न करके स्मार्टफोन और सोशल मीडिया के नशे से किसको क्या-क्या फायदा है बस इसी पर बात करेंगे।
अस्पताल/क्लीनिक में बढ़ी गहमागहमी, डाक्टरों की बढ़ी कमाई
आंखों देखा हाल- एक अस्पताल में लंच टाइम सब डॉक्टर इकट्ठा थे। आंख का डॉक्टर इतराकर बोला-ये दौर हमारा है, एक जमाना था, जब आंख के डाक्टर को हल्के में लिया जाता था। आज सबसे ज्यादा पेशेंट हमारे पास लाइन लगाए रहते हैं। इस बीच दिमाग का डाक्टर बोला- पगले! सबसे ज्यादा पेशेंट मेरे बढ़े हैं,सोशल मीडिया ने सबको पागल कर दिया है।
दिल और पेट के डाक्टर झट से बोले अरे बेवकूफों तुम क्या समझते हो स्मार्टफोन और सोशल मीडिया लोगों की सिर्फ आंखें और दिमाग ही खराब कर रहा, दिल और पेट की बीमारियों ने भी हमारे पेशेंट्स का खूब इजाफा किया है। सोशल मीडिया के नशे से लोगों का चलना-फिरना, घूमना-फिरना, वर्जिश सब छूट गया है। डाटा और आटा तक सीमित जीवन पेट और दिल की बीमारियों से कमजोर पड़ता जा रहा है। ये सब सुनकर हड्डी का डॉक्टर भी खामोश नहीं रहा। अपनी-अपनी बात करते रहोगे या दूसरे की भी सुनोगे। मेरी भी बल्ले-बल्ले है। हर दिन हड्डी तुड़वाकर दो चार पेशेंट हर रोज आ ही जाते हैं। कोई मोबाइल देखते हुए ड्राइव करने में दुर्घटनाग्रस्त हो जाता है, तो कोई रील बनाने में हड्डियां तोड़ लेता है। सुनकर सभी डॉक्टरों की ठहाकों से अस्पताल गूंज जाता है। अस्पताल का लंच ब्रेक खत्म होते ही हर तरफ मरीजों की कतारें लंबी हो चुकी हैं। सभी डॉक्टर अपना-अपना पुराने जमाने का बटन वाला मोबाइल हैंड सेट उठाकर अपने-अपने मरीजों को देखने पहुंच जाते हैं।
