संपादकीय: संकट विकट निकट है

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Published By Monis Khan
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तेल, गैस आपूर्ति के सुचारु रहने के आश्वासनों तथा सामान्य पेट्रोल, डीजल के दामों में बढ़ोतरी को कुशलतापूर्वक थामे रहने के बावजूद इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि विकट संकट निकट आता दिख रहा है। पश्चिमी एशिया में तनाव और युद्ध का चौथा सप्ताह शुरू हो चुका है और युद्ध की तीव्रता मंद पड़ने की बजाय और भी तीव्रतर होती जा रही है। 

चौथे हफ्ते की शुरुआत ईरान द्वारा इजराइल पर भीषण हमले के जवाब से हुई, जो इजराइल के उसके परमाणु संयंत्र पर आक्रमण का प्रत्युत्तर था। उधर अमेरिका ने धमकी दी है कि यदि होर्मुज जलडमरूमध्य को नहीं खोला गया, तो वह ईरान के तमाम ऊर्जा संयंत्रों, पावर प्लांट को तबाह कर देगा। जवाब में ईरान ने भी अमेरिका को खाड़ी के देशों में उनके खारे पानी को पीने योग्य बनाने वाले संयंत्रों को भारी नुकसान पहुंचाने की धमकी दी।

 हजारों किलोमीटर दूर डियागो गार्सिया पर ईरानी मिसाइल हमले के बाद यूरोप भी खौफजदा है, उसे लगता है कि लंदन और बर्लिन भी उसके निशाने पर आ सकते हैं। ब्रिटेन की परमाणु संचालित पनडुब्बी के अरब सागर में उतरने के बाद अब ब्रिटेन भी युद्ध में शामिल हो चुका है। ये सभी ऐसे संकेत हैं, जिससे लगता है कि शायद जंग जल्द खत्म नहीं होगी।

इस बीच डैम कैपिटल एडवाइजर्स की रिपोर्ट की चेतावनी चिंता बढ़ाने वाली है कि खाड़ी क्षेत्र में जारी तनाव और आशंकित व्यवधानों के चलते दुनिया के कई प्रमुख क्षेत्रों में वैश्विक आपूर्ति संकट खड़ा हो सकता है। यह संकट यदि दो महीने और चला तो भारतीय अर्थव्यवस्था व्यापक मंदी की शिकार हो सकती है। रिपोर्ट में व्यक्त यह चिंता वाकई काबिले गौर है कि कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बनी रहीं तथा होर्मुज जलडमरूमध्य इसी तरह बाधित रहा, तो देश का राजकोषीय घाटा बुरी तरह बढ़ेगा और सल्फर, हिलियम, मेथेनॉल,एल्यूमीनियम जैसी वस्तुओं की आपूर्ति बाधित होगी। रसायन, सेमीकंडक्टर तथा उर्वरक निर्माण उद्योग को गहरा धक्का लगेगा।

 साथ ही कृषि एवं खाद्य सुरक्षा पर भी बहुत बुरा असर दिखेगा। आम उपभोक्ता वस्तुओं के दाम भी बढ़ेंगे। तेल कीमतों की उछाल को नियंत्रित करने के लिए ऑल इंडिया डिस्टलर्स एसोसिएशन द्वारा पेट्रोल के साथ 20 प्रतिशत एथेनॉल के मिश्रण की आपूर्ति की पेशकश और इसे तीस फीसदी तक पहुंचाने की बात हो अथवा एथेनॉल से चलने वाली गाड़ियों और कुकिंग स्टोव के इस्तेमाल को बढ़ावा देने के लिए लोगों को जागरूक करना, इस आसन्न संकट से निपटने के बहुत ठोस उपाय नहीं हैं और न ही अमेरिका से एलपीजी तथा रूस से कच्चे तेल लिए भारत पहुंचने वाले कुछ जहाज। 

अच्छी बात यह है कि भारत सरकार इस संकट के पूर्वानुमानों को लेकर सतर्क है। मंत्रालय ने कच्चे तेल की आपूर्ति के विकल्पों की तरफ देखा है और प्रधानमंत्री ने इस बात की सख्त ताकीद की है कि कालाबाजारी और जमाखोरी कतई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सरकार ने गैस परियोजनाओं को तेजी से मंजूरी देने के साथ ही उपभोक्ताओं और उद्योगों की रक्षा के लिए कड़े कदम उठाने के संकेत दिए। उम्मीद है यह सतर्कता संकट समाधान का स्थायी कारक बनेगी।