UP: शहीदों की प्रतिमाएं तोड़ने के बाद शाहजहांपुर में दूसरे दिन भी उबाल, प्रदर्शन-नारेबाजी
शाहजहांपुर, अमृत विचार। शहीदों की प्रतिमाएं तोड़े जाने के मामले ने शहर में उबाल ला दिया है। निर्माण संस्था की ओर से बुलडोजर चलाकर अमर शहीद पंडित राम प्रसाद बिस्मिल, ठाकुर रोशन सिंह और अशफाक उल्ला खां की प्रतिमाएं गिरा दी गईं और उनके अवशेष मलबे में डाल दिए गए। इस घटना के सामने आने के बाद लोगों में जबरदस्त आक्रोश देखा गया और जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई की मांग उठने लगी।
विभिन्न संगठनों ने इसको लेकर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। सपा, कांग्रेस और अधिवक्ताओं ने अलग-अलग स्थानों पर प्रदर्शन करते हुए घटना की निंदा की। कचहरी में निर्माण संस्था का पुतला फूंककर विरोध दर्ज कराया गया। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि शहीदों का अपमान किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और प्रतिमाएं तोड़ने की सहमति देने वाले अधिकारियों के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। पूरे मामले में जिलाधिकारी धर्मेंद्र प्रताप सिंह ने सख्त रुख अपनाते हुए संबंधित निर्माण संस्था के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश दिए हैं। साथ ही संस्था को ब्लैकलिस्ट करने की प्रक्रिया शुरू होने के भी संकेत मिले हैं। इस घटना को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रिया भी सामने आई है। सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने ट्वीट कर घटना को घोर निंदनीय बताया और इसे शहीदों के सम्मान के खिलाफ बताया। शहर में लगातार बढ़ते विरोध और आक्रोश के बीच प्रशासन पर कार्रवाई का दबाव बढ़ गया है।
इस पूरे मामले पर सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी नाराजगी जताई है। उन्होंने इसे घोर निंदनीय बताते हुए कहा कि सौंदर्यीकरण के नाम पर शहीदों के सम्मान से खिलवाड़ किया गया है और यह एक गलत मानसिकता को दर्शाता है। दरअसल, सौंदर्यीकरण कार्य के तहत इन प्रतिमाओं को हटाकर नई प्रतिमाएं स्थापित की जानी थीं, जिसके लिए करीब 40 लाख रुपये का ठेका एक एजेंसी को दिया गया था। योजना के अनुसार नई प्रतिमाएं पीछे लगाई जानी थीं, लेकिन संबंधित ठेकेदार ने नगर निगम अधिकारियों को जानकारी दिए बिना रविवार रात बुलडोजर से प्रतिमाओं को हटाने का प्रयास किया, जिससे वे खंडित हो गईं। घटना की जानकारी मिलने पर महापौर अर्चना वर्मा मौके पर पहुंचीं और नगर निगम अधिकारियों से नाराजगी जताई। इस मामले में सेंट्रल बार एसोसिएशन के पूर्व महासचिव अनीत कुमार त्रिवेदी ने जांच कराकर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि जिन वीरों ने देश के लिए अपना सर्वस्व न्यौछावर किया, उनकी प्रतिमाओं के साथ इस तरह की लापरवाही जनभावनाओं को ठेस पहुंचाने वाली है। सोशल मीडिया पर घटना के वीडियो सामने आने के बाद लोगों का गुस्सा और बढ़ गया। वीडियो में प्रतिमाओं का मलबा डंपिंग ग्राउंड में पड़ा दिखाई दे रहा है।
कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने नगर निगम घेरा, जताया विरोध
कांग्रेस ने इसे महान क्रांतिकारियों के बलिदान का अपमान बताते हुए राष्ट्रीय अस्मिता और जनभावनाओं पर आघात बताया है। उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष अजय राय के निर्देश पर जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष रजनीश गुप्ता के नेतृत्व में सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने नगर निगम कार्यालय का घेराव कर जोरदार प्रदर्शन और नारेबाजी की। प्रदर्शन के दौरान माहौल तनावपूर्ण हो गया, जिसके बाद सहायक नगर आयुक्त वार्ता के लिए पहुंचे, लेकिन कांग्रेस नेताओं ने स्पष्ट कर दिया कि जब तक दोषियों पर ठोस कार्रवाई नहीं होगी, तब तक कोई वार्ता स्वीकार नहीं की जाएगी। कांग्रेस जिलाध्यक्ष रजनीश गुप्ता ने कहा कि प्रतिमाओं को हटाने के लिए न तो नगर निगम की बोर्ड बैठक में प्रस्ताव लाया गया और न ही निर्धारित प्रक्रिया का पालन किया गया, जिससे यह कार्य मनमाने तरीके से किया गया प्रतीत होता है। उन्होंने मांग की कि यदि कोई प्रस्ताव पारित हुआ है तो उसे सार्वजनिक किया जाए और पूरी प्रक्रिया की पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि यह मामला केवल प्रशासनिक लापरवाही का नहीं बल्कि शहीदों के सम्मान से जुड़ा है, इसलिए सभी जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कानूनी और विभागीय कार्रवाई होनी चाहिए।
कांग्रेस ने मेयर की भूमिका पर उठाए सवाल
कांग्रेस नेताओं ने महापौर अर्चना वर्मा की भूमिका पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि इतनी बड़ी घटना की जानकारी न होना प्रशासनिक विफलता को दर्शाता है। युवा कांग्रेस जिला अध्यक्ष रामजी अवस्थी ने कहा कि शहीदों का अपमान किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और कांग्रेस इसके खिलाफ हर स्तर पर संघर्ष करेगी। प्रदर्शन में हरदोई कांग्रेस जिला अध्यक्ष विक्रम पांडे भी शामिल हुए और उन्होंने चेतावनी दी कि 24 घंटे के भीतर प्रतिमाओं को सम्मानपूर्वक पुनः स्थापित नहीं किया गया और दोषियों पर कार्रवाई नहीं हुई तो व्यापक आंदोलन किया जाएगा। जिला उपाध्यक्ष प्रभारी संगठन फुरकान अहमद कुरैशी ने कहा कि आंदोलन जारी रहेगा और अगले दिन पड़ोसी जिलों के कांग्रेस कार्यकर्ता भी इसमें शामिल होंगे। प्रदर्शन में प्रदेश सचिव अनूप वर्मा, प्रदेश महासचिव अभय प्रताप सिंह, पूर्व महानगर अध्यक्ष पवन सिंह, अर्चना कटारिया, रफी उल हसन, सईद अंसारी, पूनम पांडेय, बिंदेश्वरी राज, पार्षद तालिब खान, रामखेलावन मिश्रा सहित सैकड़ों कार्यकर्ता मौजूद रहे।
जनभावनाओं को आहत करने का लगाया आरोप
इस कार्रवाई को लेकर पार्षदों और नागरिकों ने नाराजगी जताते हुए इसे दुर्भाग्यपूर्ण और जनभावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला बताया है। जानकारी के अनुसार प्रतिमाओं को बिना किसी पूर्व सूचना, सार्वजनिक सहमति या सम्मानजनक प्रक्रिया अपनाए हटाया गया, जिससे लोगों में असंतोष बढ़ गया है। पार्षद रुपेश वर्मा अन्नू ने कहा कि जिन शहीदों ने देश की आजादी के लिए अपने प्राण न्यौछावर किए, उनकी प्रतिमाओं के साथ इस तरह का व्यवहार किसी भी हाल में स्वीकार नहीं किया जा सकता। पार्षदों ने नगर आयुक्त को ज्ञापन सौंपकर पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कराने, दोषी अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने और हटाई गई प्रतिमाओं को सम्मानपूर्वक पुनः स्थापित कराने की मांग की है। पार्षद रामबरन सिंह ने कहा कि शहीदों के सम्मान के साथ खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और प्रशासन को तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए। इस दौरान नगर निगम के कई पार्षद मौजूद रहे।
नगर आयुक्त बोले- नई जगह सम्मान के साथ लगाई जाएंगी
नगर निगम की ओर से अमर शहीदों की प्रतिमाओं को बुलडोजर से तोड़े जाने का मामला सामने आने के बाद लोगों में भारी आक्रोश है। नगर निगम कार्यालय के सामने सड़क किनारे स्थापित शहीद पंडित राम प्रसाद बिस्मिल, अशफाक उल्ला खां और ठाकुर रोशन सिंह की प्रतिमाओं को रविवार रात बुलडोजर चलाकर गिरा दिया गया। प्रतिमाओं के साथ उनके नाम लिखे पत्थरों को भी हटाया गया और पूरा मलबा डंपिंग ग्राउंड में फेंक दिया गया। सोमवार सुबह जब लोगों ने टूटी प्रतिमाएं देखीं तो नाराजगी बढ़ गई और जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई की मांग उठने लगी। स्थानीय लोगों का कहना है कि अब तक बुलडोजर माफियाओं के खिलाफ चलता देखा गया था, लेकिन यहां शहीदों की प्रतिमाओं को ही तोड़ दिया गया, जो बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। इस मामले में नगर आयुक्त डॉ. विपिन मिश्रा ने सफाई देते हुए बताया कि तिराहे पर कम जगह होने के कारण अक्सर जाम की स्थिति बनती थी, इसलिए प्रतिमाओं को वहां से हटाकर करीब 15 से 20 फीट पीछे स्थापित करने की योजना थी। उन्होंने कहा कि नई जगह पर चार स्टैंड तैयार किए जा चुके हैं और प्रतिमाओं को पूरे सम्मान के साथ वहां लगाया जाएगा।
सम्मानजनक ढंग से नहीं हटाई गईं शहीद प्रतिमाएं, महापौर सख्त
नगर निगम कार्यालय परिसर में शहीद प्रतिमा स्थल के सौंदर्यीकरण कार्य के दौरान प्रतिमाएं हटाने के मामले में महापौर ने कड़ा रुख अपनाया है। महापौर की ओर से नगर आयुक्त को भेजे गए पत्र में कहा गया है कि विभाग की ओर से सौंदर्यीकरण के अंतर्गत शहीद प्रतिमाओं को सम्मानपूर्वक हटाकर पुनः स्थापित किया जाना प्रस्तावित था, लेकिन 22 मार्च की रात कार्यस्थल पर प्रतिमाओं को सम्मानजनक तरीके से नहीं हटाया गया, जिससे वे विखंडित हो गईं। पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि विखंडित प्रतिमाओं को उचित स्थान पर नहीं रखा गया और प्रतिमाएं हटाने के संबंध में पार्षदों तथा महापौर को भी जानकारी नहीं दी गई, जो गंभीर और आपत्तिजनक है। महापौर ने कहा कि 23 मार्च को शहीद भगत सिंह के बलिदान दिवस के अवसर पर इस प्रकार की घटना होना शहीदों का अपमान है और यह पूरी तरह अक्षम्य है। इस घटना से स्थानीय लोगों में भारी रोष व्याप्त है, वहीं समाचार पत्रों और टीवी चैनलों में भी इस मामले को लेकर नगर निगम की छवि प्रभावित हुई है। महापौर ने नगर आयुक्त को निर्देश दिए हैं कि पूरे प्रकरण में शामिल दोषी लोगों के खिलाफ तत्काल एफआईआर दर्ज कराई जाए।
शहीद प्रतिमाएं तोड़ने पर ठेकेदार ब्लैकलिस्ट की मांग
नगर निगम परिसर में शहीदों की प्रतिमाएं अपमानजनक तरीके से हटाए जाने के मामले में सर्व समाज जन कल्याण समिति ने कड़ा विरोध जताया है। समिति के प्रदेश अध्यक्ष शाहनवाज अंसारी ने वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना को पत्र भेजकर घटना की निंदा करते हुए दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने कहा कि जेसीबी से प्रतिमाओं को जिस तरह खंडित कर हटाया गया, वह पूरी तरह अस्वीकार्य है और इसे किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने संबंधित ठेकेदार को ब्लैकलिस्ट करने और नगर निगम के जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग उठाई है। शाहनवाज अंसारी ने चेतावनी दी कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो समिति की बैठक बुलाकर आंदोलन का निर्णय लिया जाएगा।
शहीद प्रतिमाएं तोड़ने पर सौंपा ज्ञापन
नगर निगम क्षेत्र में शहीदों की प्रतिमाएं तोड़े जाने के मामले में समाजसेवी नवी सलमान ने पुलिस अधीक्षक को ज्ञापन देकर एफआईआर दर्ज कराने की मांग की है। उन्होंने कहा कि शहीद दिवस के मौके पर बुलडोजर से प्रतिमाओं को गिराना बेहद शर्मनाक है। ज्ञापन में उल्लेख किया गया कि अशफाक उल्ला खां, पंडित राम प्रसाद बिस्मिल और ठाकुर रोशन सिंह की प्रतिमाओं को अपमानजनक तरीके से तोड़ा गया और उनके अवशेष कूड़े की ट्रालियों में ले जाए गए, जो गलत है। उन्होंने कहा कि प्रतिमाओं को सम्मान के साथ कपड़े में लपेटकर हटाया जाना चाहिए था, लेकिन जेसीबी से तोड़कर हटाना शहीदों का अपमान है। समाजसेवी ने मांग की कि इस मामले में नगर निगम के संबंधित अधिकारियों की जांच कर उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए और ठेकेदार पर भी कार्रवाई की जाए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि प्रतिमाओं को रात के समय क्यों तोड़ा गया। ज्ञापन में दो दिन के भीतर नई प्रतिमाएं स्थापित कराने की मांग की गई है। चेतावनी दी गई है कि यदि निर्धारित समय में प्रतिमाएं नहीं लगाई गईं तो बड़ा कदम उठाया जाएगा, जिसकी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।
अधिवक्ता समाज और ट्रस्ट ने दी बड़े आंदोलन की चेतावनी
शहीदों की प्रतिमाओं के साथ हुई अवमानना को लेकर शहर में आक्रोश बढ़ता जा रहा है। शहीदी दिवस के अवसर पर प्रतिमाओं पर बुलडोजर चलाए जाने के मामले ने लोगों की भावनाओं को झकझोर दिया है। इस घटना को लेकर अधिवक्ता समाज और विभिन्न संगठनों में नाराजगी देखी जा रही है। राष्ट्र स्वाभिमान ट्रस्ट के संयोजक वरिष्ठ अधिवक्ता अशित पाठक ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि जिन शहीदों के बलिदान से देश स्वतंत्र हुआ, उन्हीं की प्रतिमाओं पर बुलडोजर चलाना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और निंदनीय है। उन्होंने कहा कि यह केवल प्रतिमाओं का नहीं बल्कि देश की गौरवशाली विरासत का भी अपमान है। इस दौरान संयुक्त सचिव बार एसोसिएशन अक्षय अवस्थी, संयुक्त सचिव श्याम दीक्षित, धर्मवीर एडवोकेट, आलोक पाठक, आदर्श मिश्रा, अजय मिश्रा, गणेश मिश्रा सहित अन्य अधिवक्ता मौजूद रहे।
जिम्मेदारों पर कार्रवाई की मांग तेज
शहीदों की प्रतिमाएं तोड़े जाने के मामले में जिम्मेदारों पर कार्रवाई की मांग तेज हो गई है। सेंट्रल बार एसोसिएशन के पूर्व महासचिव अनीत कुमार त्रिवेदी ने प्रशासन से पूरे प्रकरण की जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने कहा कि जिन वीरों ने देश के लिए अपना सर्वस्व न्यौछावर किया, उनकी प्रतिमाओं के साथ इस तरह की लापरवाही जनभावनाओं को आहत करती है। सोशल मीडिया पर घटना से जुड़े वीडियो सामने आने के बाद लोगों में गुस्सा बढ़ गया। वीडियो में प्रतिमाओं का मलबा डंपिंग ग्राउंड में पड़ा दिखाई दे रहा है।
