Moradabad: 30 भवन व प्रतिष्ठान सील, नगर निगम की टीमों ने वसूले 87.21 लाख रुपये
मुरादाबाद, अमृत विचार। गृहकर व जलकर के बड़े बकाएदारों के खिलाफ मंगलवार को भी नगर निगम की टीमों ने अभियान चलाया। बकाया जमा न करने वाले 30 से अधिक बड़े बकाएदारों के भवन व प्रतिष्ठान सील किए गए।
मुख्य कर निर्धारण अधिकारी आरती सिंह, कर निर्धारण अधिकारी प्रमोद कुमार के नेतृत्व में टीमों ने बकाएदारों पर सख्ती की। टीमों ने गांधी नगर स्थित जगमोहन सबरवाल पर 3,69,103.30 रुपये बकाया होने के चलते प्रतिष्ठान सील कर दिया। असालतपुरा इस्लामनगर के अकील अहमद के प्रतिष्ठान पर 37,86,479.91 रुपये की बकाएदारी के चलते सील किया गया। सराय गुलजारी मल के प्रबन्धक देवकी नन्द गुप्ता पर 1,71,529.69 रुपये का बकाया था जिसमें 10,000 रुपये जमा किया गया लेकिन पूरा बकाया न चुकाने पर टीम ने उसे सील कर दिया।
हाजी अब्दुल राशिद पुत्र सराय गुलजारी मल पर 6,90,16.01 रुपये का बकाया था और सुरेन्द्र कुमार निवासी सीधी सराय के ऊपर 3,41,977.80 रुपये बकाया था जिसमें मात्र 50,000 जमा किया गया इसके चलते प्रतिष्ठान सील किया गया। दीवान का बाजार निवासी मो. फैजान के प्रतिष्ठान पर 1,25,419.28 रुपये की बकाएदारी के चलते सील किया गया। असालतपुरा के मो. नईम पर 3,00,890 रुपये का टैक्स बकाया था जिसमें 30,000 जमा किया गया लेकिन फिर भी सीलिंग की कार्रवाई हुई।
अशोक नगर के विकासपुरी पर 2,18,643.61 रुपये बकाया था जिसमें से सिर्फ एक लाख रुपये जमा करने के चलते सील कर दिया गया। सर सैय्यद नगर के जुल्फिकार के प्रतिष्ठान पर 1,57,643.47 रुपये बकाया था। जिसमें से मौके पर 50,000 रुपये जमा करने के बाद भी पूरा चुकता न करने पर प्रतिष्ठान सील किया गया। रहमतनगर के मो. मुशाहिद पर 3,81,759.82 रुपये की बकाएदारी के चलते सीलिंग की कार्रवाई की गई। मो. असलम रेहाना पर 1,05,674.40 रुपये की टैक्स की अदायगी बाकी थी जिसके चलते प्रतिष्ठान सील हुआ।
वहीं रहमतनगर के ही राजी उल्ला पर टैक्स का 1,34,837.02 रुपये बकाएदारी के चलते प्रतिष्ठान सील कर दिया गया। इसके अलावा ठठेरा मोहल्ला, पीरजादा, करूला, पंडित नगला, दिल्ली, कांठ और रामपुर रोड पर 17 भवनों की सीलिंग कार्रवाई भी की गई। इस दौरान कर अधीक्षक प्रदीप कुमार चौधरी, मंगल सिंह पापडा के अलावा सभी राजस्व निरीक्षक/कर संग्रहकर्ता व ईटीएफ के जवान उपस्थित रहे। टीमों ने कुल 87,21,132 रुपये की धनराशि वसूल की।
