गिग-प्लेटफॉर्म वर्कर्स को सामाजिक सुरक्षा देने की पहल तेज: संवाद कार्यशाला में पंजीयन, बीमा और कार्यदशाओं में सुधार पर मंथन 

Amrit Vichar Network
Published By Anjali Singh
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लखनऊ, अमृत विचार : प्रदेश में गिग एवं प्लेटफॉर्म वर्कर्स को सामाजिक सुरक्षा के दायरे में लाने के लिए सरकार ने पहल तेज कर दी है। प्रमुख सचिव श्रम एवं सेवायोजन डॉ. शन्मुगा सुंदरम् ने कहा कि श्रम संहिताओं में पहली बार गिग वर्कर्स को स्पष्ट पहचान दी गई है।

उन्होंने बताया कि प्रदेश में अनुमानित 14-15 लाख गिग वर्कर्स हैं, जबकि अब तक करीब 1.34 लाख का ही पंजीयन हुआ है। इस अंतर को कम करने के लिए तेजी से काम करने की जरूरत है। प्रमुख सचिव बुधवार को उप्र.राज्य सामाजिक सुरक्षा बोर्ड के तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए संबोधित कर रहे थे। 

इस कार्यशाला में वर्कर्स, ट्रेड यूनियनों, एग्रीगेटर्स और विभिन्न संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने भाग लेकर गिग वर्कर्स की समस्याओं और आवश्यकताओं पर खुलकर चर्चा की। पहले सत्र में श्रमिकों और एग्रीगेटर्स के साथ अलग-अलग संवाद कर कार्यदशाओं, सुरक्षा, बीमा और सामाजिक सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर विचार-विमर्श हुआ।

निदेशक सेवायोजन नेहा प्रकाश ने गिग वर्कर्स की परिभाषा स्पष्ट करते हुए सेवामित्र पोर्टल की 28 सेवाओं की जानकारी दी और पंजीयन के लिए प्रेरित किया। कार्यशाला में कस्टमर केवाईसी, मेडिकल क्लेम, दुर्घटना बीमा और आईडी ब्लॉक करने से पहले वर्कर का पक्ष सुनने जैसी मांगें प्रमुखता से उठीं। एग्रीगेटर्स ने भी पंजीयन प्रक्रिया की चुनौतियों को सामने रखा।

दूसरे सत्र में एग्रीगेटर्स के साथ सामाजिक सुरक्षा योजनाओं, हेल्थ व एक्सीडेंटल इंश्योरेंस, छात्रवृत्ति, रियायती ऋण और रेस्ट प्वाइंट जैसी सुविधाओं पर चर्चा हुई। अंत में अधिकारियों ने सभी सुझावों को भविष्य की नीतियों में शामिल करने का भरोसा दिलाया।

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