पद्मश्री से सम्मानित कवयित्री सुगत कुमारी का निधन
तिरुवनंतपुरम। पद्मश्री से सम्मानित प्रख्यात कवयित्री एवं पर्यावरण कार्यकर्ता सुगत कुमारी का बुधवार को मेडिकल कॉलेज अस्पताल में कोरोना वायरस के उपचार के दौरान निधन हो गया। वह 86 वर्ष की थीं। सुगत कुमारी को मंगलवार को हालत ज्यादा बिगड़ने के बाद एक निजी अस्पताल से मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भर्ती किया गया था। उल्लेखनीय …
तिरुवनंतपुरम। पद्मश्री से सम्मानित प्रख्यात कवयित्री एवं पर्यावरण कार्यकर्ता सुगत कुमारी का बुधवार को मेडिकल कॉलेज अस्पताल में कोरोना वायरस के उपचार के दौरान निधन हो गया। वह 86 वर्ष की थीं। सुगत कुमारी को मंगलवार को हालत ज्यादा बिगड़ने के बाद एक निजी अस्पताल से मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भर्ती किया गया था।
उल्लेखनीय है कि केरल में पर्यावरण और नारीवादी आंदोलनों में वह सबसे आगे रहीं। वह प्रकृति की सुरक्षा के लिये एक संगठन प्रकृति संरक्षण समिति और बेसहारा महिलाओं के लिए घर तथा मानसिक रूप से बीमार लोगों के लिये एक डे-केयर सेंटर ‘अभय’ की संस्थापक सचिव थी। वह केरल प्रदेश महिला आयोग की पूर्व अध्यक्ष भी रहीं। जिन्होंने ‘सेव साइलेंट वैली’ आंदोलन में बड़ी भूमिका निभायी थी।
सुगत कुमारी ने कई पुरस्कार जीते थे, जिनमें केरल साहित्य अकादमी पुरस्कार (1968), केंद्र साहित्य अकादमी पुरस्कार (1978), ओडक्कुजल पुरस्कार (1982), वायलार पुरस्कार (1984), इंदिरा प्रियदर्शिनी वृक्ष मित्र पुरस्कार (1986), आसन पुरस्कार (1991), वल्लथोल पुरस्कार (2003), केरल साहित्य अकादमी फेलोशिप (2004), एजुथचन पुरस्करम (2009), सरस्वती सम्मान (2012), मातृभूमि साहित्य पुरस्कार (2014) और ओएनवी साहित्य पुरस्कार (2017) शामिल हैं। वर्ष 2006 में उन्हें देश के चौथे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्मश्री से भी नवाजा गया। तिरुवनंतपुरम के यूनिवर्सिटी कॉलेज से स्नातक की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने 1955 में दर्शनशास्त्र में मास्टर डिग्री प्राप्त की और इंडियन स्कूल ऑफ फिलॉसफी में मोक्ष के तुलनात्मक अध्ययन पर तीन वर्षों तक शोध किया, लेकिन इसे पूरा नहीं किया। उनके पिता देश के स्वतंत्रता संग्राम में शामिल एक प्रसिद्ध गांधीवादी विचारक एवं लेखक थे।
