LU में पीएचडी के नए नियम: साल में दो बार एडमिशन, 4-वर्षीय ग्रेजुएट्स को भी मिलेगा मौका
लखनऊ, अमृत विचार: लखनऊ विश्वविद्यालय मैं अब प्रत्येक वर्ष दो बार एचडी में प्रवेश लियाजाएगा। विश्वविद्यालय के विद्या परिषद ने नए 'पी.एच.डी. अध्यादेश 2026' को मंजूरी प्रदान कर दी है। कुलपति प्रो. जे.पी. सैनी की अध्यक्षता में इस बैठक का आयोजन किया गया जिसमें महत्वपूर्ण फैसले किए गए।
लखनऊ विश्वविद्यालय अब साल में दो बार (मई और दिसंबर) पी.एच.डी. प्रवेश अधिसूचना जारी करेगा । प्रवेश को तीन चरणों में व्यवस्थित किया गया है। प्रथम चरण: यूजीसी-जेआरएफ, सीएसआईआर-जेआरएफ, आईसीएमआर, डीबीटी और एआईसीटीई डॉक्टोरल फेलोशिप प्राप्त अभ्यर्थी । द्वितीय चरण: प्रथम चरण के बाद रिक्त सीटों पर वे अभ्यर्थी जो सहायक प्रोफेसर या पी.एच.डी. प्रवेश के लिए यूजीसी-नेट/सीएसआईआर-नेट उत्तीर्ण हैं । तृतीय चरण: शेष सीटों के लिए विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित शोध प्रवेश परीक्षा के माध्यम से प्रवेश होगा।
4-वर्षीय स्नातक धारकों के लिए भी पीएचडी की सुविधा
अकादमिक लचीलेपन को बढ़ावा देते हुए, अब 4-वर्षीय, 8-सेमेस्टर स्नातक डिग्री वाले मेधावी छात्र पी.एच.डी. में प्रवेश ले सकते हैं ।
'फास्ट लर्नर' शोधार्थियों को विशेष रियायत
अध्यादेश में शोध की न्यूनतम अवधि 3 वर्ष और अधिकतम 6 वर्ष रखी गई है । हालांकि, असाधारण प्रतिभा वाले 'फास्ट लर्नर' शोधार्थियों के लिए कुलपति की अनुमति से थीसिस जमा करने की अवधि में 6 महीने की कटौती की जा सकती है ।
