दिल्ली पुलिस की बड़ी कार्रवाई : ISI समर्थित आतंकी मॉड्यूल का भंडाफोड़, लश्कर-ए-तैयबा का हैंडलर शब्बीर गिरफ्तार

Amrit Vichar Network
Published By Deepak Mishra
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नई दिल्ली। दिल्ली पुलिस के विशेष प्रकोष्ठ ने गाजीपुर इलाके से लश्कर-ए-तैयबा के एक संदिग्ध आतंकी शब्बीर अहमद लोन को गिरफ्तार किया है। अधिकारियों ने सोमवार को यह जानकारी दी। अधिकारियों ने लोन को "कट्टर और उच्च प्रशिक्षित आतंकवादी" करार देते हुए कहा कि उसने कथित तौर पर पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी 'इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस' (आईएसआई) की ओर से काम करने वाले आकाओं के साथ संबंध स्थापित किए थे। 

एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया, "राजा और कश्मीरी जैसे उपनामों से जाने जाने वाला लोन जम्मू-कश्मीर के श्रीनगर का निवासी है। वह कथित तौर पर उस मॉड्यूल के आका के रूप में काम कर रहा था, जिसका हाल में दिल्ली और कोलकाता के कई स्थानों पर राष्ट्रविरोधी पोस्टर लगाने के मामले में भंड़ाफोड़ किया गया था।" अधिकारी के अनुसार, विशेष प्रकोष्ठ की नयी दिल्ली रेंज की एक टीम ने रविवार रात गाजीपुर इलाके से शब्बीर अहमद लोन को गिरफ्तार किया। 

अधिकारी ने बताया कि लोन उस लश्कर मॉड्यूल के सिलसिले में वांछित था, जो हाल में मेट्रो स्टेशनों के पास पोस्टर लगाने के मामले में शामिल था। उन्होंने कहा, "गिरफ्तारी के दौरान, पुलिस ने उसके कब्जे से कई विदेशी मुद्राएं और अन्य आपत्तिजनक सामग्री बरामद की। इनमें लगभग 2,300 बांग्लादेशी टका, 1,400 नेपाली मुद्रा, 5,000 पाकिस्तानी मुद्रा और 3,000 भारतीय मुद्रा शामिल हैं।" 

एक नेपाली सिम कार्ड भी जब्त किया गया है, जिससे सीमा पार बातचीत और परिचालन समन्वय का संदेह पैदा हुआ है। अधिकारी ने कहा, "यह मॉड्यूल पाकिस्तान की आईएसआई के इशारे पर चलाया जा रहा था, जिसमें लोन विदेश में बैठे आकाओं और भारत में जमीनी स्तर पर काम करने वाले सदस्यों के बीच एक प्रमुख कड़ी के रूप में काम कर रहा था।" 

लोन का आतंकी गतिविधियों में शामिल होने का लंबा इतिहास रहा है और उसे पहले 2007 में विशेष प्रकोष्ठ ने गिरफ्तार किया था। उस समय उसके पास से एक एके-47 राइफल और एक हैंड ग्रेनेड बरामद हुआ था। उसे दोबारा 2015 में श्रीनगर के परिमपोरा थाना क्षेत्र से गिरफ्तार किया गया था। 

उन्होंने यह भी कहा कि अपनी पिछली गिरफ्तारी के दौरान भी लोन लक्षित हत्याओं को अंजाम देने के इरादे से दिल्ली आया था। वह एक उच्च प्रशिक्षित आतंकी है जिसने पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर के मुजफ्फराबाद स्थित लश्कर शिविर से 'दौरा-ए-आम' (बुनियादी आतंकी प्रशिक्षण) और 'दौरा-ए-खास' (उन्नत आतंकी प्रशिक्षण) प्राप्त किया है। अपनी रिहाई के बाद, वह कथित तौर पर बांग्लादेश भाग गया और भारत को निशाना बनाने के लिए एक नया आतंकी नेटवर्क बनाना शुरू कर दिया। 

बांग्लादेश में रहने के दौरान, लोन ने लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े कथित तौर पर नए आकाओं के साथ संपर्क स्थापित किया। अबू हुजैफा और सुमामा बाबर के कोड नाम से जाने वाले ये आका आईएसआई की ओर से काम कर रहे थे। अधिकारी ने बताया, "लोन का काम 'स्लीपर सेल' को सक्रिय करके और नए सदस्यों की भर्ती करके भारत में आतंकी गतिविधियों को फिर से शुरू करना था। उसने घुसपैठ और समन्वय की सुविधा के लिए बांग्लादेश को आधार के रूप में इस्तेमाल किया।" 

पुलिस ने बताया कि सदस्यों ने मंदिरों और अधिक भीड़भाड़ वाले सार्वजनिक स्थानों सहित देश के कई संवेदनशील स्थानों की रेकी भी की थी। इन रेकी मिशनों के वीडियो रिकॉर्ड किए गए और पाकिस्तान में बैठे आकाओं को भेजे गए। अधिकारी ने बताया कि लोन ने विदेशी नागरिकों, विशेष रूप से बांग्लादेशियों को शामिल करते हुए एक संरचित नेटवर्क बनाया था और भविष्य के अभिनायों के लिए नए लोगों को भर्ती करने और स्थानों की पहचान करके इसका और विस्तार करने का प्रयास कर रहा था। 

पुलिस ने कहा कि अन्य सहयोगियों, वित्तीय संपर्कों और संभावित लक्ष्यों की पहचान करने के लिए फिलहाल उससे पूछताछ की जा रही है। पुलिस ने बताया कि बरामद विदेशी मुद्राओं से जुड़े संभावित हवाला माध्यमों और सीमा पार वित्त पोषण तंत्र की भी जांच की जा रही है। अधिकारी ने कहा, "लोन की गिरफ्तारी मेट्रो पोस्टर मामले की जारी जांच में एक महत्वपूर्ण सफलता है, जिसने इस साल की शुरुआत में सुरक्षा चिंताएं पैदा कर दी थीं।" 

इससे संबंधित घटनाक्रम में, विशेष प्रकोष्ठ ने 22 फरवरी को भारत भर में फैले लश्कर से जुड़े मॉड्यूल का भंडाफोड़ किया था और पश्चिम बंगाल तथा तमिलनाडु में समन्वित छापेमारी के बाद सात बांग्लादेशी नागरिकों सहित आठ कथित आतंकियों को गिरफ्तार किया था। गिरफ्तार किए गए लोग कथित तौर पर लोन के निर्देश पर काम कर रहे थे और आतंकवाद के समर्थन में पोस्टर लगाने तथा संवेदनशील प्रतिष्ठानों की रेकी करने में शामिल थे। 

जांचकर्ताओं ने पाया था कि लोन बांग्लादेश से उनके आका के रूप में काम कर रहा था और सक्रिय रूप से उनकी गतिविधियों को निर्देशित कर रहा था। पुलिस सूत्र ने बताया, "इस मॉड्यूल का गठन अवैध अप्रवासन नेटवर्क और फर्जी पहचान दस्तावेजों का फायदा उठाकर भारत में आतंकी गतिविधियों को पुनर्जीवित करने के उद्देश्य से किया गया था।" 

सूत्र ने बताया कि इन संदिग्ध आतंकियों को लोगों की भर्ती करने और सुरक्षित ठिकाने तथा हथियारों सहित साजो समान की व्यवस्था करने का काम सौंपा गया था। फरवरी में हुई कार्रवाई ने व्यापक नेटवर्क का पर्दाफाश किया था और लोन की गतिविधियों पर नज़र रखने तथा अंततः उसकी गिरफ्तारी का आधार तैयार किया था। मामले में आगे की जांच जारी है।  

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