जयपुर में गुलाबी हाथी पर विवाद: रूसी कलाकार का फोटोशूट हुआ वायरल, जानिए क्या है मामला  

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Published By Anjali Singh
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जयपुर। रूस की एक कलाकार ने यहां एक हथिनी को गुलाबी रंग से रंगकर फोटोशूट किया जिसकी तस्वीरें बड़े पैमाने पर ऑनलाइन प्रसारित होने के बाद विवाद खड़ा हो गया। कई लोगों ने पशु कल्याण को लेकर चिंता व्यक्त की है। इस बीच फोटो शूट में काम में ली गई इस हथिनी की पिछले महीने मौत हो गई। उसके मालिक ने इसकी पुष्टि की है। हालांकि अधिकारियों ने कहा कि हथिनी की मौत से इस चर्चित फोटो शूट का कोई लेना-देना नहीं है। 

रूस की कलाकार एवं फोटोग्राफर जूलिया बुरुलेवा ने गुलाबी रंगे से रंगे हथिनी की तस्वीरें और वीडियो को मूल रूप से पिछले साल दिसंबर में साझा किया था। ये फोटो एवं वीडियो हाल में सोशल मीडिया पर काफी वायरल हुए। उसपर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं आ रही हैं। कई लोगों ने जहां इस फोटो शूट की रचनात्मकता बताकर सराहना की, वहीं कई अन्य ने कलात्मक परियोजनाओं में जानवरों के इस्तेमाल की नैतिकता पर सवाल उठाए हैं। 

बुरुलेवा के पोस्ट के अनुसार नवंबर 2025 में किए गए इस फोटो शूट में मॉडल यशस्वी और जयपुर के 'हाथी गांव' इलाके की 'चंचल' नाम की हथिनी शामिल थी। हाथी गांव समिति के अध्यक्ष बल्लू खान ने कहा कि फोटो शूट में शामिल हथिनी को आमतौर पर 'गुलाल' से रंगा गया था तथा फोटोशूट के कुछ ही मिनटों में गुलाल धो दिया गया था। उन्होंने यह भी बताया कि लगभग 65 साल की चंचल की पिछले महीने मौत हो गई थी। 

खान के अनुसार वह और हथिनी के मालिक "पिछली पांच पीढ़ियों" से जानवरों की देखभाल कर रहे हैं। उन्होंने पूछा कि वे हाथी को नुकसान क्यों पहुंचाएंगे। उन्होंने कहा, "विभिन्न त्योहारों पर भी हाथियों को सजाया और रंगा जाता रहा है लेकिन गुलाल से, न कि किसी रासायनिक पेंट से।'' उन्होंने कहा कि उक्त फोटोशूट के लिए हथिनी चंचल को केवल एक तरफ से रंगा गया था। चंचल के मालिक सादिक खान ने कहा कि फोटोशूट के समय 65 साल की हथिनी काफी बूढ़ी हो चुकी थी और उसे सवारी के काम में नहीं लिया जा रहा था। 

उन्होंने कहा, ''फोटो एवं वीडियोशूट लगभग 10 मिनट तक चला। कच्चा गुलाल लगाया गया था और उसे तुरंत धो दिया गया। यह वही रंग था जिसका इस्तेमाल होली के दौरान किया जाता है।'' उन्होंने बताया कि हथिनी की मौत इस साल फरवरी में हुई थी। हालांकि इस हथिनी की मौत और फोटो शूट के बीच किसी भी तरह के संबंध का कोई सबूत नहीं मिला है। अधिकारियों और पशुओं की देखरेख करने वाले स्थानीय लोगों ने बताया कि हथिनी काफी बूढ़ी हो चुकी थी एवं माना जा रहा है कि उसकी मौत प्राकृतिक कारणों से हुई। 

इस बीच हथिनी से जुड़े फोटो सोशल एवं दूसरे मीडिया पर प्रसारित होने तथा इससे जुड़ी हथिनीकी मौत के समाचार ने लोगों की उत्सुकता बढ़ा दी है। कई लोग वाणिज्यिक और कला से जुड़ी गतिविधियों में जानवरों के इस्तेमाल पर ज़्यादा सख्त निगरानी और स्पष्ट दिशानिर्देश की मांग कर रहे हैं। एक पोस्ट में, बुरुलेवा ने बताया कि उन्होंने जयपुर में छह हफ़्ते बिताए और शहर के मशहूर गुलाबी रंग और सांस्कृतिक विरासत से प्रेरणा ली। 

उन्होंने लिखा, "वहां हाथी हर जगह हैं -- सड़कों पर, सजावटी चीजों में, इमारतों में। असल में यह राजस्थान का मुख्य प्रतीक है। मैं बिना किसी हाथी को शामिल किए अपने काम को आगे नहीं बढ़ा सकती थी।" इस बीच जिला क्षेत्रीय वनसंरक्षक डीसीएफ विजय पाल सिंह ने कहा कि फिलहाल इस मामले में कोई जांच नहीं चल रही है। उन्होंने इस मुद्दे पर कोई और टिप्पणी करने से मना कर दिया। पशु अधिकारों के लिए काम करने वाले कार्यकर्ताओं ने कहा कि यह फोटो शूट भारत में हाथियों के लिए एक आपातकालीन स्थिति का संकेत है। 

गैर सरकारी संगठन 'पेटा इंडिया' की उपाध्यक्ष खुशबू गुप्ता ने कहा, "हथिनी चंचल की कथित मौत भारत के 'बंदी' हाथियों के लिए आपातकालीन स्थिति का संकेत है।' उन्होंने कहा कि जिन हाथियों का इस्तेमाल सवारी और दूसरे प्रदर्शनों के लिए किया जाता है, उन्हें जब काम में नहीं लिया जाता तो अक्सर ज़ंजीरों में बांधकर रखा जाता है और हथियारों के जरिए काबू किया जाता है; ये ऐसी स्थितियां हैं जिनसे हाथियों को बहुत ज़्यादा तकलीफ़ होती है और जब वे परेशान होकर हमला करते हैं तो खतरनाक घटनाएं हो सकती हैं। उन्होंने कहा, "पेटा इंडिया लंबे समय से यह सुझाव देता रहा है कि जयपुर और दूसरी जगहों पर हाथियों पर सवारी और दूसरे कामों में उनके इस्तेमाल को धीरे-धीरे बंद किया जाए। संगठन का सुझाव है कि इसकी जगह सजे-धजे इलेक्ट्रिक वाहनों और रोबोट हाथियों का इस्तेमाल किया जाए।

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