Bareilly: बच्चों की सुरक्षा पर अभिभावकों में चिंता, कई स्कूलों में नहीं सीसीटीवी, फायर सुरक्षा की अनदेखी 

Amrit Vichar Network
Published By Monis Khan
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बरेली, अमृत विचार। जिले के सरकारी और निजी स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल परिजनों के मन में हैं लेकिन वह उनके भविष्य की चिंता में सब सवालों को दरकिनार कर रहे हैं। सरकारी स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा राम भरोसे है। वहीं निजी स्कूलों में भी बहुत ज्यादा गंभीरता दिखाई नहीं देती। कई स्कूलों में मानक से कम सीसीटीवी लगे हैं। साथ ही फायर सुरक्षा के मानक भी पूरे नहीं हैं। तमाम स्कूली वाहनों में भी बच्चों की सुरक्षा के मानक पूरे नहीं हैं। ऑटो,वैन में और ज्यादा खतरा है।

स्कूल तमाम तरह के ढाेंग- ढकोसले करके अभिभावकों से पैसा वसूलते हैं लेकिन बदले में अपनी जिम्मेदारी निभाने को तैयार नहीं। मामला चाहें पढ़ाई को हो या बच्चों की सुरक्षा का, स्कूलों के दावे हवाहवाई नजर आते हैं। स्कूलों में बच्चों कर सुरक्षा के नाम पर सिर्फ औपचारिकताएं पूरी की जा रही हैं। अधिकतर स्कूलों में मुख्य गेट पर केवल एक गार्ड सैकड़ों बच्चों की आवाजाही को नियंत्रित करता है। स्कूल के बाहर की स्थिति और भी चिंताजनक है, जहां कोई ठोस सुरक्षा व्यवस्था नजर नहीं आती। स्कूल की छुट्टी के समय छात्र-छात्राओं की सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं। अनियंत्रित ट्रैफिक में बच्चों के लिए हमेशा जोखिम बना रहता है। 

स्कूलों में अनुशासन समितियां भी सिर्फ कागजों तक सीमित रह गई हैं। इनमें बैठकों का आयोजन लंबे समय से नहीं हुआ है।सीसीटीवी की व्यवस्था भी तमाम स्कूलों में स्तरीय नहीं। बीते दिनों एक स्कूल में बच्ची के साथ मारपीट की गई। बच्ची लहूलुहान हुई लेकिन उसका सीसीटीवी परिजनों को नहीं दिया गया। सुभाषनगर में कुछ दिन पहले देर से पहुंचने पर छात्र को शिक्षक ने जमकर पीटा। उसकी हालत बिगड़ने पर परिजनों ने जिला अस्पताल में भर्ती कराया। एक स्कूल में फीस जमा न होने पर छात्राओं को कमरे में बंद कर दिया गया। तब स्कूल के प्रबंधन पर रिपोर्ट दर्ज हुई थी। बच्चों के भविष्य को लेकर चिंतित अभिभावक मजबूरी में हमेशा समझौता करने की स्थिति में होते हैं। इसी को देखते हुए स्कूल प्रबंधन हावी हो जाते हैं।


अभिभावकों ने जताई चिंता
संजय नगर निवासी मुन्नी देवी ने बताया कि मेरी बेटी कॉलोनी के एक स्कूल में पढ़ती है। हमारे घर के करीब में होने के कारण हमने वहां बेटी का एडमिशन कराया है। यहां सीसीटीवी नाम मात्र के लगे हैं। हमें यह आराम है कि स्कूल पास में होने के कारण खुद छोड़ आते हैं और ले आते हैं। सौ फुटा रोड के पंकज पटेल ने कहा कि मेरा बेटा सुरेश शर्मा नगर के पास एक स्कूल में पढ़ता है। इस रोड पर बहुत ट्रैफिक है। बेटे को स्कूल छोड़ने और लाने के लिए परिवार का कोई सदस्य जाता है। हम वैन वालों पर भरोसा नहीं करते।

वैन में ठूंसे जाते हैं बच्चे, कई जगह चल रहे डग्गामार
सबसे बड़ी चिंता बच्चों के आवागमन को लेकर सामने आ रही हैं। कई स्कूलों में डग्गामारी यानी बिना अनुमति और नियमों के चलने वाले वाहनों से बच्चों को ले जाया जा रहा है। इन वाहनों में न तो पर्याप्त सुरक्षा होती है और न ही बच्चों की निर्धारित संख्या का पालन किया जाता है। ओवरलोडिंग और लापरवाही किसी भी समय बड़े हादसे को न्योता दे सकती है।
वर्जन

डीआईओएस डॉ अजीत सिंह ने बताया कि निजी स्कूलों का हमसे कोई लेना देना नहीं है। सरकारी कॉलेजों में चौकीदार की पोस्ट होती है। वह स्कूल में ही रुकते हैं। कुछ समय पहले ही जिले में कई चौकीदारों को नियुक्त किया है। जिले में वर्तमान में 100 के लगभग चौकीदार हैं।

आरटीओ प्रशासन पंकज सिंह के मुताबिक कुछ समय पहले स्कूल संचालकों को बस, वैन व ऑटो में कैमरे लगाने के निर्देश दिए गए थे। फिटनेस दुरुस्त रखने को कहा गया था। एक अप्रैल से स्कूली वाहनों की चेकिंग का अभियान चलाया जा रहा है। इस दौरान जो भी स्कूली वाहन मानकों के अनुसार फिट नहीं मिलेगा, पहले उन्हें सात दिन का समय दिया जाएगा। उसके बाद परमिट निलंबित करने की कार्यवाही की जाएगी।

 

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