बाराबंकी : अष्टमी-रामनवमी के संयोग पर मंदिरों में उमड़ा श्रद्धा का सैलाब, घरों में भी हुआ पूजन

Amrit Vichar Network
Published By Deepak Mishra
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बाराबंकी, अमृत विचार। चैत्र नवरात्र की अष्टमी और रामनवमी के पावन संयोग पर गुरुवार को जिले भर में श्रद्धा और आस्था का अद्भुत वातावरण देखने को मिला। ज्योतिषीय गणना के अनुसार इस वर्ष दुर्गाष्टमी और रामनवमी का शुभ संयोग एक ही दिन पड़ने से पर्व का महत्व और बढ़ गया। सुबह से ही मंदिरों में श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लग गईं और मां दुर्गा के जयकारों से वातावरण भक्तिमय हो उठा। भक्तों ने विधि-विधान से हवन-पूजन कर मां दुर्गा की आराधना की।

घरों और मंदिरों में कन्या पूजन का विशेष आयोजन किया गया, जहां श्रद्धालुओं ने छोटी कन्याओं को मां का स्वरूप मानकर उनका पूजन कर भोजन कराया और उपहार भेंट किए। मंदिरों में रामचरित मानस का पाठ भी किया गया। शहर के गुलरियागार्दा स्थित बड़ी माता मंदिर, रसूलपुर का छोटी माता मंदिर, दूधेश्वर महादेव मंदिर, सत्यप्रेमीनगर स्थित संतोषी माता मंदिर, पूर्वी देवी मंदिर, मुड़कटी देवी मंदिर सहित ज्वाला देवी और नैना देवी जैसे ग्रामीण क्षेत्रों के मंदिरों में भी सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी रही।

भक्त माता रानी के जयकारे लगाते हुए दर्शन के लिए घंटों कतारों में खड़े रहे। मंदिरों में महिलाओं ने भक्ति गीत गाकर माहौल को और भक्तिमय बना दिया। मां महागौरी को चुनरी अर्पित की गई और देवी मंदिरों को भव्य रूप से सजाया गया। शहर के कई मंदिरों में देवी मां की आकर्षक झांकियां सजाई गईं, जिसकी छटा देखने के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी रही। श्रद्धालुओं ने पहले घरों में हवन-पूजन करने के बाद मंदिरों में जाकर माता रानी के दर्शन किए और बाद में कन्या भोज का आयोजन कर परंपराओं का श्रद्धा के साथ निर्वहन किया।

पंडित नित्यानंद बाजपेई ने बताया कि रामचरितमानस के बालखण्ड में वर्णन मिलता है कि, भगवान राम का जन्म चैत्र महीने के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को अभिजीत मुहूर्त यानी दोपहर के समय हुआ था। यही कारण है कि राम नवमी मनाने के लिए मध्याह्न काल को देखा जाता है, जोकि गुरुवार को पड़ी। इसलिए गुरुवार को ही राम जन्मोत्सव मनाया जाना उत्तम था। हालांकि कई लोग उदयातिथि को मान्यता देते हैं। ऐसे में वे शुक्रवार को राम नवमी का पर्व मनाएंगे।

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