कानपुर में महाअष्टमी पर मां महागौरी की हुई विशेष पूजा, मंदिरों में उमड़ी भीड़, भजन-कीर्तन से गूंजा वातावरण

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Published By Deepak Mishra
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कानपुर। चैत्र नवरात्र के आठवें दिन महाअष्टमी पर मां महागौरी की आराधना पूरे शहर में श्रद्धा और भक्ति के साथ की गई। सुबह से ही प्रमुख देवी मंदिरों में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। श्रद्धालु हाथों में फूल, नारियल, सांग और प्रसाद लेकर मां के दर्शन के लिए लंबी कतारों में खड़े नजर आए। मंदिरों में भक्ति का माहौल देखते ही बन रहा था। मां महागौरी को शक्ति, साहस और निर्भयता का प्रतीक माना जाता है।

भक्तों ने विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर अपने जीवन से भय, संकट और कष्टों के निवारण की कामना की। घरों में भी विशेष पूजन, कन्या पूजन और हवन का आयोजन किया गया। देवी मंदिरों को आकर्षक फूलों और रंग-बिरंगी रोशनी से सजाया गया, जिससे वातावरण और अधिक भक्तिमय हो उठा।

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शाम के समय शहर के परेड, किदवई नगर, विजय नगर, हैलेट कैंपस, स्वरुप नगर, ग्वालटोली, खलासी लाइन, गोविंद नगर से जवारे उठाकर श्रद्धालु ढोल-नगाड़ों और भजन-कीर्तन के साथ देवी मंदिरों में पहुंचे। बारादेवी, जंगली देवी, तपेश्वरी सहित अन्य प्रमुख शक्तिपीठों पर भक्तों ने शीश झुकाकर मां का आशीर्वाद प्राप्त किया।

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पुजारियों द्वारा दुर्गा सप्तशती का पाठ और विशेष आरती का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। धार्मिक मान्यता के अनुसार मां दुर्गा की आठवीं शक्ति महागौरी हैं, जिनका वर्ण अत्यंत गौर और श्वेत आभूषणों से अलंकृत है। कहा जाता है कि कठोर तपस्या के बाद भगवान शिव ने गंगाजल से उनका अभिषेक किया, जिससे उनका स्वरूप अत्यंत कांतिमान हो गया। मान्यता है कि मां महागौरी की उपासना से भक्तों के पाप नष्ट होते हैं और जीवन में सुख-समृद्धि का आगमन होता है।

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सांग व सुई लगाने के लिए लगी होड़

बारादेवी, जवाहर नगर, तपेश्वरी व जूही क्षेत्र से श्रद्धालु पारंपरिक गीत-संगीत के साथ सांग और सुई लगा कर निकले। जिसमें पांच किलो से सवा कुंटल वजनी सांग के साथ भक्तों ने जयकारों के बीच यात्रा निकाली, जिससे पूरे क्षेत्र में भक्ति और उत्साह का माहौल बना रहा।

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