लोकसेवकों से बोले प्रधानमंत्री मोदी- 'नागरिक प्रथम' मंत्र को अपनाने की आवश्यकता

Amrit Vichar Network
Published By Deepak Mishra
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नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बृहस्पतिवार को नागरिकों के जीवन को सुगम बनाने के लिए तेजी से बदलते समय के साथ शासन व्यवस्था को लगातार अद्यतन करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि आज देश के प्रशासन का मूल मंत्र 'नागरिक देवो भव:' है और सार्वजनिक सेवा को नागरिकों की जरूरतों के प्रति अधिक सक्षम और संवेदनशील बनाने के लिए पुनर्गठित किया जा रहा है। 

पीएम मोदी ने 'साधना सप्ताह' कार्यक्रम की शुरुआत पर एक वीडियो संदेश में कहा, ''शासन को अब सही मायने में नागरिक-केंद्रित बनाकर एक नयी पहचान दी जा रही है।'' प्रधानमंत्री ने कहा कि नागरिकों के जीवन की सुगमता और गुणवत्ता में सुधार के लिए शासन व्यवस्था ही मानदंड होनी चाहिए और उन्होंने लोक सेवकों से प्रतिदिन कुछ नया सीखने का आग्रह किया। 

उन्होंने कहा, ''हमारी शासन व्यवस्था यह सुनिश्चित करे कि नागरिकों के जीवन की गुणवत्ता में दिन-प्रतिदिन सुधार हो। यही हमारा सच्चा मानदंड है।'' प्रशासनिक संस्कृति में बुनियादी बदलाव की आवश्यकता पर जोर देते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि पुरानी व्यवस्था में 'अधिकारी' होने पर अत्यधिक जोर दिया जाता था, जबकि आज देश का ध्यान पूरी तरह कर्तव्य भावना पर केंद्रित है। उन्होंने लोकसेवकों को संबोधित करते हुए कहा, ''हर निर्णय से पहले यदि आप यह सोचें कि आपका कर्तव्य क्या मांगता है, तो आपके निर्णयों का प्रभाव खुद कई गुना बढ़ जाएगा।'' 

प्रधानमंत्री ने कहा कि तेजी से बदलती वैश्विक व्यवस्थाओं के बीच भारत तेजी से आगे बढ़ रहा है और उसे अपनी शासन प्रणाली को लगातार अद्यतन करते रहना होगा। लोकसेवकों को यह याद दिलाते हुए कि आम नागरिक के लिए स्थानीय सरकारी दफ्तर ही पूरे शासन का चेहरा होता है, मोदी ने कहा कि अधिकारियों की कार्यशैली और व्यवहार लोकतंत्र और संवैधानिक संस्थाओं में जनता के विश्वास को सीधे प्रभावित करते हैं। 

उन्होंने कहा, ''हम जो भी करें, जिस भी स्तर पर करें, हमें उस विश्वास की रक्षा करनी चाहिए; यही हमारे लोकतंत्र की नींव है।'' भारत की संघीय व्यवस्था का उल्लेख करते हुए मोदी ने कहा कि देश की सफलता उसके सभी राज्यों की सामूहिक सफलता है। उन्होंने ''अग्रणी राज्य'', ''पिछड़े राज्य'' और ''बीमारू राज्य'' जैसी पुरानी श्रेणियों को समाप्त करने की आवश्यकता पर भी बल दिया और समन्वित प्रयासों के माध्यम से राज्यों के बीच की खाई को पाटने की बात कही। 

पीएम मोदी ने कहा, "हमें अलग-अलग खांचों को तोड़कर बेहतर समन्वय, साझा समझ और समग्र सरकार के दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़ना होगा; तभी हर मिशन सफल होगा।'' पीएम मोदी ने तेज आर्थिक विकास, आधुनिक बुनियादी ढांचे, तकनीक के उपयोग और बड़े कौशलयुक्त कार्यबल की आवश्यकता को 'विकसित भारत' के व्यापक लक्ष्य से जोड़ा और कहा कि इन उद्देश्यों को हासिल करने में सार्वजनिक संस्थानों और लोकसेवकों की अहम भूमिका है। 

उन्होंने कहा, ''आज का भारत आकांक्षाओं से भरा हुआ है। हर नागरिक के अपने सपने और लक्ष्य हैं, और हम सभी की जिम्मेदारी है कि उन्हें पूरा करने के लिए अधिकतम सहयोग प्रदान करें।'' प्रधानमंत्री ने लोकसेवकों को अपने वर्तमान कार्य को भविष्य के व्यापक संदर्भ में देखने के लिए प्रेरित किया और यह सोचने की चुनौती दी कि उनके व्यक्तिगत निर्णय लाखों लोगों के जीवन को कैसे प्रभावित कर सकते हैं।

उन्होंने कहा, ''हम (लोकसेवक) जो काम कर रहे हैं, उसका देश की विकास यात्रा पर क्या प्रभाव पड़ेगा? हमारे एक फैसले से कितने नागरिकों के जीवन में बदलाव आ सकता है? हमारा व्यक्तिगत परिवर्तन कैसे संस्थागत परिवर्तन बन सकता है? ये प्रश्न हमारे हर प्रयास का मार्गदर्शन करें। मैं अपने अनुभव से कह सकता हूं कि इसे हासिल करने के लिए काफी ऊर्जा की आवश्यकता होती है।''

प्रौद्योगिकी के महत्व पर जोर देते हुए मोदी ने कहा कि पिछले 11 वर्षों में सरकार के कामकाज में तकनीक का व्यापक समावेश हुआ है, जिससे शासन, सेवा वितरण और अर्थव्यवस्था प्रभावित हुई है। उन्होंने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के आगमन के साथ ये परिवर्तन और तेज होंगे। 

मोदी ने कहा, ''एक बेहतर प्रशासक और बेहतर लोकसेवक वही होगा, जो तकनीक और डेटा की गहरी समझ रखता हो; यही निर्णय लेने की प्रक्रिया का आधार बनेगा।" साधना (राष्ट्रीय उन्नति के लिए अनुकूल विकास और मानवीय योग्यता को मजबूत करना) सप्ताह का आयोजन क्षमता विकास आयोग (सीबीसी) द्वारा दो से आठ अप्रैल तक किया जा रहा है। यह सप्ताह भारत के सिविल सेवा तंत्र में सबसे बड़े सहयोगी क्षमता निर्माण प्रयासों में से एक है। 

आयोग की स्थापना की पृष्ठभूमि पर विचार करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि स्वतंत्रता के बाद से कई संस्थान अलग-अलग क्षेत्रों में काम कर रहे थे, लेकिन प्रत्येक सरकारी कर्मचारी की क्षमता बढ़ाने के लिए एक समर्पित संस्था की स्पष्ट आवश्यकता महसूस की जा रही थी। उन्होंने कहा, ''इसी सोच ने क्षमता विकास आयोग को जन्म दिया, जो व्यवस्था में प्रत्येक 'कर्मयोगी' को सशक्त बनाने पर केंद्रित है।'' 

यह आयोग शासन को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह, नागरिक-केंद्रित और भविष्य के लिए तैयार बनाने हेतु रूपरेखा तैयार करता है, मानक निर्धारित करता है और सहयोग को प्रोत्साहित करता है। यह क्षमता विकास और योग्यता पर आधारित शिक्षा के माध्यम से सिविल सेवा सुधारों को आगे बढ़ाने के लिए मिशन कर्मयोगी रूपरेखा का संरक्षक है।  

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