अप्रैल में आकाश दर्शन
अप्रैल 2026 आकाश को देखने वालों के लिए काफी रोमांचक महीना है। इसमें कोई सूर्य या चंद्र ग्रहण नहीं है, लेकिन पूर्णिमा, उल्का वर्षा, ग्रहों के सुंदर संयोग और गहरी आकाशीय वस्तुएं अच्छा-खासा नज़ारा दिखाएंगी। हमें सबकुछ आसानी से दिखेगा, बस शहर की रोशनी से दूर जाएं, बाइनोकुलर या छोटा टेलीस्कोप हो तो बेहतर है। सभी समय यूटीसी में दिए गए हैं (भारतीय समय आईएसटी= यूटीसी+ 5:30 घंटे)।
चंद्र पूर्णिमा
2 अप्रैल को पूर्णिमा थी। चंद्रमा सूर्य से पृथ्वी के विपरीत स्थित और उसका चेहरा पूरी तरह से रोशन था। यह चरण 2:13 यूटीसी ( कोऑर्डिनेटेड यूनिवर्सल टाइम) पर होगा। इस पूर्णिमा को प्रारंभिक मूल अमेरिकी जनजातियों द्वारा पूर्ण कृमि चंद्रमा (पिंग मून) के रूप में जाना जाता था, क्योंकि इसने मॉस पिंक या जंगली ग्राउंड फ्लॉक्स की उपस्थिति को चिह्नित किया, जो पहले वसंत फूलों में से एक है। इस चंद्रमा को स्प्राउटिंग ग्रास मून, ग्रोइंग मून और एग मून के नाम से भी जाना जाता है। कई तटीय जनजातियों ने इसे फिश मून भी कहा जाता है।
उच्चतम बिंदु पर बुध
3 अप्रैल को बुध ग्रह सूरज से 27.8 डिग्री की सबसे ज्यादा पश्चिमी ऊंचाई पर पहुंचेगा। बुद्ध ग्रह को देखने का यह सबसे अच्छा समय है, क्योंकि यह सुबह आसमान में क्षितिज के ऊपर अपने सबसे ऊंचे बिंदु पर होगा। सूरज उगने से ठीक पहले ग्रह को पूर्वी आसमान में नीचे देखें। बुध ग्रह को देखने का आनंद वाकई अनोखा और रोमांचक होता है। सौरमंडल का सबसे छोटा और सूर्य के सबसे नजदीक ग्रह होने के कारण बुध को ‘भूतिया ग्रह’ भी कहते हैं। यह ज्यादातर समय सूर्य की चमक में छिपा रहता है, इसलिए इसे देखना चुनौतीपूर्ण, लेकिन बेहद संतोषजनक होता है।
बुध सूर्य से कभी ज्यादा दूर नहीं जाता। इसे देखने का सबसे अच्छा समय सूर्योदय से ठीक पहले (सुबह) या सूर्यास्त के तुरंत बाद (शाम) होता है, जब यह क्षितिज के पास चमकदार बिंदु की तरह दिखता है। सूर्यास्त के 30-40 मिनट बाद पश्चिम-उत्तर-पश्चिम दिशा में देखा जाकता है। इसे देखने के लिए साफ क्षितिज चाहिए, शहर की लाइट्स से दूर बेहतर रहेगा। बुध को देखने का आनंद सिर्फ दृश्य नहीं, बल्कि यह एहसास भी है कि आप सूर्य के इतने करीब घूमते एक चट्टानी दुनिया को देख रहे हैं, जहां दिन में 400° सेल्सियस+ तापमान और जहां रात में बेहद ठंड होती है।
आकाश में अंधकार
17 अप्रैल को अमावस्या (न्यू मून) होगी। इस दिन चंद्रमा सूर्य की तरह पृथ्वी के एक ही तरफ स्थित रहेगा और रात्रि आकाश में दिखाई नहीं देगा। यह खगोलीय घटना 20:30 यूटीसी पर घटित होगी। यह आकाशगंगा और तारा समूहों जैसी धुंधली वस्तुओं का निरीक्षण करने के लिए इस माह का का सबसे अच्छा समय है क्योंकि इन्हें देखने के लिए चांदनी बाधा नहीं बनेगी। ऐसे में रात के आकाश में आकाशगंगा या मन्दाकिनी के दर्शन किये जा सकते हैं। नासा की शक्तिशाली हब्बल टेलिस्कोप ने अंतरिक्ष की कई आकाशगंगाओं की तस्वीरें लेने का अद्भुत काम किया है। कई आकाशगंगाएं इतनी दूर हैं कि उनका प्रकाश हम तक पहुंचने में लाखों साल का समय लग जाता है।
अर्थ शाइन
19-20 अप्रैल को अर्थशाइन होगी, जिसे हिंदी में पृथ्वी चमक या चंद्र चमक भी कहा जाता है, एक खगोलीय घटना है जिसमें चंद्रमा के उस भाग पर पृथ्वी से परावर्तित सूर्य की रोशनी पड़ती है, जो हमारी दृष्टि से अंधेरा (अनिलुमिनेटेड) दिखाई देता है। सरल शब्दों में, जब चंद्रमा पतला (क्रिसेंट) आकार का होता है, तो उसके उज्ज्वल किनारे पर सूर्य की सीधी रोशनी पड़ती है, लेकिन अंधेरे भाग पर पृथ्वी की चमक (जो सूर्य से प्राप्त रोशनी को परावर्तित करती है) दिखाई देती है। यह चंद्रमा को दोहरी चमक वाला बनाती है, एक पतली रोशनी की पट्टी और उसके पीछे हल्की, नीली-ग्रे चमक।
यह घटना अल्बर्टाे डेमोंड (15वीं शताब्दी) द्वारा वर्णित की गई थी, और इसे ‘पुराना चंद्रमा नई चंद्रमा की गोद में’ (ओल्ड मून इन द न्यू मून्स आम्र्स) भी कहा जाता है। अर्थशाइन पृथ्वी के वायुमंडल और महासागरों के कारण चमकीला होता है, जो सूर्य की रोशनी को फैलाते हैं। इसे देखने का सबसे अच्छा दृश्य नव चंद्रमा (न्यू मून) के 2-3 दिन बाद या पहले, जब चंद्रमा 5-10 प्रतिशत रोशन (इल्यूमिनेटेड) होता है। इस समय चंद्रमा सूर्योदय या सूर्यास्त के करीब होता है, और अंधेरा आकाश चमक को उभारता है।
उल्का वर्षा का आनंद
अप्रैल माह में रात के आकाश में उल्का वर्षा का आनंद लिया जा सकता है। 22 व 23 अप्रैल रात के आकाष मंे लिरिड्स नामक उल्का वर्षा दिखाई देगी। आकाश में कभी-कभी एक ओर से दूसरी ओर अत्यंत वेग से जाते हुए अथवा पृथ्वी पर गिरते हुए जो पिंड दिखाई देते हैं उन्हें उल्का (मेट्योर) और साधारण बोलचाल में टूटते हुए तारे अथवा लूका कहते हैं। उल्काओं का जो अंश वायुमंडल में जलने से बचकर पृथ्वी तक पहुँचता है उसे उल्कापिंड (मेट्योराइट) कहते हैं। प्रायः प्रत्येक रात्रि को उल्काएँ अनगिनत संख्या में देखी जा सकती हैं, किंतु इनमें से पृथ्वी पर गिरने वाले पिंडों की संख्या अत्यंत अल्प होती है।
एक विशेष समय में रात के आकाश में इनके गिरने की संख्या बढ़ जाती है, तब इसे उल्का वर्षा (मेट्योर शॉवर) कहते हैं। यह एक औसत प्रकार की उल्का वर्षा है, जिसमें आमतौर पर प्रति घंटे लगभग 20 उल्काओं का पात होगा। यह धूमकेतु सी/1861 जी1 थैचर द्वारा छोड़े गए धूल कणों द्वारा निर्मित उल्का वर्षा है, जिसे वर्ष 1861 में खोजा गया था। उल्का वर्षा 16-25 अप्रैल तक सालाना चलती है। यह इस साल 22 की रात और 23 की सुबह अपने उत्कृष पर होगी। ये उल्कापिंड कभी-कभी चमकीले धूलकणों का उत्पादन कर सकते हैं जो कई सेकंड तक चलते हैं और टूटते तारों के रूप में दृष्टिगोचर होंगे। सर्वश्रेष्ठ दृश्य आधी रात के बाद किसी अंधेरे स्थान से दिखाई दे सकता है। उल्का नक्षत्र लियरा से आते दिखाई देंगे, लेकिन आकाश में कहीं भी दिखाई दे सकते हैं।-डॉ. इरफान ह्यूमन, एसोसिएट प्रोफेसर/विज्ञान लेखक
