वैज्ञानिक फैक्ट: आखिर क्यों उदय और अस्त के समय लाल दिखाई पड़ता है सूर्य 

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Published By Anjali Singh
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सुबह उगते और शाम को ढलते समय सूरज का लालिमा लिए दिखाई देना एक सामान्य, लेकिन बेहद आकर्षक प्राकृतिक दृश्य है। दिन के समय वही सूरज सुनहरा या पीला नजर आता है, जबकि क्षितिज के पास पहुंचते ही उसका रंग लाल या नारंगी हो जाता है। साथ ही आसमान भी कई रंगों- लाल, पीला, नीला, बैंगनी और नारंगी की छटा बिखेरता नजर आता है। यह परिवर्तन किसी जादू का नहीं, बल्कि विज्ञान का परिणाम है।

इस घटना के पीछे “रेली स्कैटरिंग” यानी प्रकाश का प्रकीर्णन जिम्मेदार होता है। जब सूर्य का सफेद प्रकाश पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करता है, तो वह हवा में मौजूद गैसों, धूल और अन्य सूक्ष्म कणों से टकराकर अलग-अलग दिशाओं में फैल जाता है। सूर्य के प्रकाश में सात रंग होते हैं- लाल, नारंगी, पीला, हरा, नीला, जामुनी और बैंगनी। इन सभी रंगों की तरंगदैर्ध्य (वेवलेंथ) अलग-अलग होती है।

बैंगनी और नीले रंग की तरंगदैर्ध्य सबसे छोटी होती है, इसलिए ये रंग वायुमंडल में अधिक बिखर जाते हैं। इसी कारण दिन के समय आसमान हमें नीला दिखाई देता है। वहीं लाल और नारंगी रंग की तरंगदैर्ध्य लंबी होती है, जिससे ये रंग ज्यादा दूरी तय कर पाते हैं और कम बिखरते हैं।

सुबह और शाम के समय सूर्य की किरणें पृथ्वी के वायुमंडल से तिरछे कोण पर गुजरती हैं। इस दौरान उन्हें अधिक दूरी तय करनी पड़ती है। परिणामस्वरूप छोटी तरंगदैर्ध्य वाले रंग (नीला और बैंगनी) रास्ते में ही बिखर जाते हैं, जबकि लंबी तरंगदैर्ध्य वाले रंग (लाल और नारंगी) हमारी आंखों तक पहुंचते हैं। यही कारण है कि सूरज उस समय लाल या नारंगी दिखाई देता है और आसमान रंग-बिरंगा हो जाता है।

इस समय सूरज जरूर पीले से लाल रंग का लगने लगता हो, लेकिन इसका मतलब ये नहीं होता कि उसका रंग बदल गया है। धूल के बादल, धुंआ और इसी तरह के अन्य तत्व आसमान के रंग पर असर डालते हैं। अगर आप भारत, कैलिफॉर्निया, चिली, ऑस्ट्रेलिया या अफ्रीका के कुछ हिस्सों या लाल रेत वाले इलाकों के नजदीक रहते हैं, तो आपका वातावरण मौसम की स्थिति के आधार पर प्रकाश को प्रतिबिंबित करने वाले कणों से भरा हो सकता है।